एग्रीगेटर कंपनियों के लिए बनेगा अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश


सिटी न्यूज़ मुंबई/गनी खान
भिवंडी में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए महानगरपालिका और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रदूषण फैलाने वाली डाइंग, टेक्सटाइल और साइजिंग इकाइयों पर शिकंजा कसते हुए अब तक 60 इकाइयां बंद की जा चुकी हैं। हालांकि, 79 इकाइयों के मामले अब भी लंबित हैं। ऐसे में शहर की हवा को साफ करने की मुहिम के बीच कार्रवाई की रफ्तार और उसके नतीजों पर सवाल उठ रहे हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भिवंडी की 249 औद्योगिक इकाइयों में से 110 का डेटा उपलब्ध है, जबकि 60 इकाइयों को बंद किया गया है और 79 के मामले लंबित हैं। इनमें 54 डाइंग, 74 टेक्सटाइल और 121 साइजिंग इकाइयां शामिल हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 54 डाइंग इकाइयों में से 12 बंद की गई हैं, 33 का डेटा उपलब्ध है और नौ के मामले लंबित हैं। वहीं, 74 टेक्सटाइल इकाइयों में से 17 बंद की गई हैं, 37 का डेटा उपलब्ध है और 20 के मामले लंबित हैं।
साइजिंग इकाइयों की स्थिति और भी चिंताजनक है। कुल 121 इकाइयों में से 31 बंद की गई हैं, 40 का डेटा उपलब्ध है, जबकि 50 इकाइयों के मामले लंबित हैं। एमपीसीबी ने 22 साइजिंग, सात डाइंग और 29 टेक्सटाइल इकाइयों को बंद करने के नोटिस जारी किए हैं।
औद्योगिक इकाइयों के अलावा निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल भी शहर के वायु प्रदूषण की बड़ी वजह है। इसे देखते हुए महानगरपालिका के नगर नियोजन विभाग और पांच प्रभाग समितियों ने 192 निर्माण परियोजनाओं को नोटिस जारी किए हैं।
निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय करने, मलबे का उचित निस्तारण करने और सड़क पर निर्माण सामग्री नहीं फैलाने के निर्देश दिए गए हैं। अब देखना होगा कि इन निर्देशों का पालन नहीं करने वाली परियोजनाओं के खिलाफ आगे कितनी सख्ती दिखाई जाती है।
लकड़ी के इस्तेमाल से होने वाले धुएं पर नियंत्रण के लिए शहर की 32 बेकरी को एक महीने के भीतर पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) या इलेक्ट्रिक ओवन अपनाने का निर्देश दिया गया था। निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी नियमों का पालन नहीं करने वाली बेकरी के खिलाफ आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए महानगरपालिका प्रमुख सड़कों पर सफाई मशीनों के इस्तेमाल और पानी के छिड़काव की व्यवस्था करने की तैयारी में है। इसके अलावा सड़कों और फ्लाईओवर की सफाई के लिए उच्च दबाव वाली पानी की मशीनों का उपयोग करने की योजना है। फॉगिंग मशीनों के इस्तेमाल की भी व्यवस्था की जा रही है, ताकि धूल के कणों को हवा में फैलने से रोका जा सके।
भिवंडी में औद्योगिक गतिविधियों, निर्माण कार्यों और ईंधन से निकलने वाले धुएं के कारण वायु प्रदूषण पर नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इकाइयों को नोटिस जारी करना और बंदी की कार्रवाई करना अहम कदम हैं, लेकिन इसका वास्तविक असर तभी दिखेगा, जब नियमों का लगातार पालन सुनिश्चित किया जाएगा। अब सवाल यह है कि लंबित मामलों का निपटारा कब होगा और प्रदूषण कम करने के लिए उठाए जा रहे कदम जमीन पर कितने प्रभावी साबित होंगे।

संस्थापक और मुख्य संपादक | सिटी न्यूज़ मुंबई







