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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ए.के. शिंदे की सरकार ने 2022 के बाद से कई प्रमुख योजनाएँ लागू की हैं, जिनमें बुनियादी ढाँचे, कृषि और सामाजिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह लेख उनकी नीतियों, उपलब्धियों और सामने आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करता है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ए.के. शिंदे ने 14 दिसंबर 2022 को पदभार ग्रहण किया, जब महाराष्ट्र सरकार ने एक नई गठबंधन के साथ सत्ता संभाली। उनके नेतृत्व में राज्य ने आर्थिक पुनरुद्धार, बुनियादी ढाँचे के विकास और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित कई पहलें शुरू की हैं। यह लेख शिंदे सरकार के प्रमुख कार्यों, उपलब्धियों और चुनौतियों की समीक्षा करता है।
शिंदे सरकार ने 2023 के वित्तीय वर्ष में ₹1.2 ट्रिलियन की बजट आवंटन के साथ बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट्स पर विशेष जोर दिया। राजमार्ग, रेल नेटवर्क और जल प्रबंधन के क्षेत्र में 150 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया गया। इसके अतिरिक्त, ‘स्मार्ट सिटी’ योजना के तहत पुणे, नागपुर और नाशिक में डिजिटल अवसंरचना को मजबूत किया गया, जिससे शहरों की कनेक्टिविटी और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार हुआ।
कृषि क्षेत्र में शिंदे सरकार ने 2024 में ‘सहायक सब्सिडी योजना’ शुरू की, जिसके तहत 3 लाख किसानों को वर्षा-आधारित खेती के लिए सब्सिडी मिली। इस योजना के अंतर्गत फसल बीमा कवरेज को 70 प्रतिशत तक बढ़ाया गया, जिससे कृषि जोखिम कम हुआ। इसके अलावा, कृषि-आधारित उद्योगों के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया, जिससे ग्रामीण रोजगार में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने 2025 में ‘शिक्षा समृद्धि योजना’ लागू की, जिसका उद्देश्य ग्रामीण स्कूलों में डिजिटल शिक्षा उपकरण उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत 2,500 स्कूलों में टैबलेट और इंटरनेट कनेक्शन स्थापित किया गया, जिससे छात्रों की सीखने की दक्षता में 15 प्रतिशत सुधार हुआ। स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘स्वास्थ्य कवरेज विस्तार’ के तहत 300 नए स्वास्थ्य केंद्र खोले गए, जो ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ा रहे हैं।
इन उपलब्धियों के बावजूद, शिंदे सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक मंदी के कारण राज्य का जीडीपी वृद्धि दर 2026 में 4.5 प्रतिशत तक गिर गई है, जबकि बेरोजगारी दर 7.8 प्रतिशत पर बनी हुई है। राजनीतिक विपक्ष ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए ‘जनहित’ और ‘पारदर्शिता’ की मांग की है। इन चुनौतियों के बीच, सरकार को नीति-निर्माण में पारदर्शिता और सार्वजनिक सहभागिता को बढ़ाने की आवश्यकता है।
उपरोक्त पहलें और चुनौतियाँ महाराष्ट्र के भविष्य के विकास पथ को प्रभावित कर रही हैं, और शिंदे सरकार को इन मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।