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महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने वाले नियम की कार्यवाही शुरू हो गई है। मुंबई महानगर क्षेत्र के 139 चालकों सहित राज्य के कुल 331 चालकों को आरटीओ से नोटिस जारी की गई हैं। इस निर्णय पर चालक संघों ने आपत्ति जताई है, और कुछ चालकों ने दावा किया है कि परीक्षा के प्रश्न प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के बाहर हैं।
महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का प्राथमिक ज्ञान आवश्यक करने के निर्णय से मुंबई में विवाद उत्पन्न हुआ है। राज्य के RTO विभाग ने मराठी भाषा का आवश्यक ज्ञान सिद्ध न कर पाने वाले 331 चालकों को नोटिस जारी किए हैं। इसमें मुंबई महानगर क्षेत्र के 139 चालकों को शामिल किया गया है।
इस नियम का उद्देश्य चालक और यात्रियों के बीच स्थानीय भाषा में बुनियादी संवाद को आसान बनाना है, ऐसा प्रशासन का कहना है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि चालकों को मराठी में विशेषज्ञ बनने की जरूरत नहीं है, बल्कि आवश्यक स्तर का भाषा ज्ञान प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है।
इसी बीच, कुछ चालकों ने RTO द्वारा ली जाने वाली भाषा परीक्षा पर भी प्रश्न उठाए हैं। प्रशिक्षण में नहीं सिखाए गए प्रश्न परीक्षा में पूछे जा रहे हैं, ऐसा आरोप कुछ चालकों ने किया है। इसलिए नियम के कार्यान्वयन और परीक्षा की विधि को लेकर भविष्य में विवाद बढ़ने की संभावना है।
इस निर्णय को चुनौती देने के लिए मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल करने की तैयारी भी की गई है। इसलिए महाराष्ट्र में भाषा संबंधी नीति का मुद्दा अब न्यायिक स्तर पर भी पहुंचने की संभावना है।







