नरेंद्र मेहता की विधायकी और नगरसेवकों के पद रद्द करने की मांग, प्रताप सरनाईक ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को लिखा पत्र


भारत के चुनाव आयोग ने हाल ही में पारदर्शिता बढ़ाने और चुनावी प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने के लिए कई नई नीतियाँ अपनाई हैं। इन पहलों का उद्देश्य मतदाता विश्वास को पुनः स्थापित करना और चुनावी निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
भारत के चुनाव आयोग ने 2024 में एक व्यापक सुधार कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसमें डिजिटल मतपत्र प्रणाली को विस्तारित करने के साथ-साथ चुनावी कर्मचारियों के प्रशिक्षण को भी मजबूत किया गया। इस पहल के तहत, 10,000 से अधिक प्रशिक्षित कर्मियों को नए डिजिटल उपकरणों के उपयोग में दक्ष बनाया गया, जिससे मतदान प्रक्रिया अधिक सुगम और पारदर्शी हो सके।
नई नीति के अंतर्गत, चुनाव आयोग ने प्रत्येक राज्य के लिए स्वतंत्र ऑडिट बोर्ड गठित किया, जो चुनावी डेटा की सत्यता की जाँच करेगा। इस बोर्ड के गठन से मतपत्रों की गिनती में संभावित त्रुटियों को कम करने की उम्मीद है, और यह सुनिश्चित करेगा कि चुनावी परिणाम पूरी तरह से सटीक हों।
इसके अलावा, आयोग ने चुनावी विज्ञापन पर कठोर नियम लागू किए, जिसमें उम्मीदवारों के प्रचार खर्च पर सीमा निर्धारित की गई। इस कदम का उद्देश्य धन के प्रभाव को कम करना और सभी उम्मीदवारों के लिए समान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना है। साथ ही, सोशल मीडिया पर चुनावी प्रचार के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए गए, जिससे गलत सूचना फैलने की संभावना घटेगी।
मतदाता शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने 25,000 से अधिक वॉलंटियर को चुनावी जागरूकता अभियान चलाने के लिए प्रशिक्षित किया। इन वॉलंटियरों ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मतदाता पंजीकरण बढ़ाने के लिए कार्य किया, जिससे 5 मिलियन से अधिक नए पंजीकरण हुए।
अंत में, चुनाव आयोग ने एक नया ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया, जहाँ मतदाता अपनी मतदान स्थिति, उम्मीदवारों की जानकारी और चुनावी नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह प्लेटफ़ॉर्म 24/7 उपलब्ध रहेगा और बहुभाषी समर्थन के साथ उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाएगा।
इन सभी पहलों के माध्यम से चुनाव आयोग ने लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया है, और आने वाले चुनावों में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए कार्यरत रहेगा।







