भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग के विकास में नई दिशा
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
सरकारी फंड, निजी निवेश और शैक्षणिक सहयोग के साथ भारत में AI और क्वांटम कंप्यूटिंग तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। इस लेख में इन पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
भारत में तकनीकी प्रगति ने पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व गति हासिल की है, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्रों में। सरकारी पहल, निजी निवेश और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से देश में कई प्रयोगशालाएँ और स्टार्ट‑अप इस दिशा में काम कर रहे हैं। हाल ही में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (DST) ने AI‑संचालित स्वास्थ्य समाधान और क्वांटम‑आधारित सुरक्षा प्रणाली के लिए 1,200 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया है। यह कदम न केवल अनुसंधान को तेज़ करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक तकनीकी मंच पर प्रतिस्पर्धी स्थिति में लाएगा। इन विकासों के सामाजिक‑आर्थिक प्रभावों को समझना, नीति‑निर्माताओं और उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सरकारी स्तर पर, भारत सरकार ने "डिजिटल इंडिया" और "मेकर आंदोलन" जैसी पहलों के तहत AI और क्वांटम तकनीकों को प्रमुखता दी है। 2023 में लॉन्च किया गया राष्ट्रीय AI रणनीति, पाँच साल में AI स्टार्ट‑अप्स की संख्या को दोगुना करने और सार्वजनिक सेवाओं में AI के उपयोग को 30% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने 2024‑2029 के लिए विशेष क्वांटम रिसर्च फंड स्थापित किया, जिससे शैक्षणिक संस्थानों को उच्च‑स्तरीय प्रयोगशालाओं की स्थापना में सहायता मिलेगी।
निजी क्षेत्र ने भी इस गति को तेज़ किया है। प्रमुख भारतीय टेक कंपनियों ने AI‑आधारित प्लेटफ़ॉर्म, डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड सेवाओं में भारी निवेश किया है। 2024 में, एक प्रमुख फिनटेक कंपनी ने AI‑संचालित क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल को लागू किया, जिससे ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में 40% समय बचा। क्वांटम क्षेत्र में, कई स्टार्ट‑अप्स ने क्वांटम‑सुरक्षित एन्क्रिप्शन समाधान विकसित किए हैं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा दिया है।
शैक्षणिक संस्थानों ने भी इस प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs) के कई कैंपस में AI और क्वांटम अनुसंधान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहाँ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत संयुक्त प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इन केंद्रों ने पिछले दो वर्षों में 150 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और 30 से अधिक पेटेंट दायर किए हैं। साथ ही, उद्योग‑अकादमी सहयोग मंच (IACC) ने छात्रों को वास्तविक‑विश्व प्रोजेक्ट्स में शामिल करने के लिए इंटर्नशिप और फंडिंग योजनाएँ शुरू की हैं।
इन सभी प्रयासों के बावजूद चुनौतियाँ बनी हुई हैं। डेटा सुरक्षा, कुशल मानव संसाधन की कमी और उच्च लागत वाले क्वांटम हार्डवेयर की उपलब्धता प्रमुख बाधाएँ हैं। नीति निर्माताओं को इन मुद्दों को संबोधित करने के लिए नियामक ढाँचा तैयार करना, स्किल‑डिवेलपमेंट कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना आवश्यक है। यदि इन चुनौतियों का समाधान सफलतापूर्वक किया जाता है, तो भारत अगले दशक में AI और क्वांटम कंप्यूटिंग के वैश्विक नेता के रूप में उभर सकता है।