केन्द्र सरकार ने 2024-25 बजट में सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल विकास को दिया प्राथमिकता
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
भारत की वित्त मंत्रालय ने 2024-25 के बजट में सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल बुनियादी ढाँचा को प्रमुखता दी। कुल खर्च 45 लाख करोड़ रुपये का अनुमानित है, जिसमें सामाजिक कल्याण के लिए 12 लाख करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं।
नई दिल्ली—भारत की वित्त मंत्रालय ने आज रात 2024-25 वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट प्रस्तुत किया, जिसमें सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल बुनियादी ढाँचे को प्रमुखता दी गई है। कुल अनुमानित खर्च 45 लाख करोड़ रुपये बताया गया, जिसमें 12 लाख करोड़ रुपये सीधे सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए आवंटित किए गए हैं। सरकार ने ग्रामीण इलेक्ट्रॉनिक सेवाओं के विस्तार, हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया। यह बजट आर्थिक पुनरुद्धार, रोजगार सृजन और सतत विकास के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
बजट में कुल 45 लाख करोड़ रुपये का खर्च बताया गया, जिसमें 12 लाख करोड़ रुपये सीधे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए earmarked हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र को 2.5 लाख करोड़ रुपये, शिक्षा को 1.8 लाख करोड़ रुपये और कृषि को 1.2 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस बार सरकार ने ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ को विस्तारित किया और वृद्धावस्था पेंशन, बेरोजगार युवा सहायता और गरीब परिवारों के लिए सब्सिडी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। इन उपायों का उद्देश्य सामाजिक असमानताओं को कम करना और आर्थिक अवसरों का विस्तार करना है।
सामाजिक सुरक्षा के तहत ‘आयुष्मान भारत’ को अतिरिक्त 1.2 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार सुविधाओं का विस्तार होगा। वृद्धावस्था पेंशन को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये किया गया, जबकि बेरोजगार युवाओं के लिए ‘प्रधानमंत्री रोजगार योजना’ के तहत 10 लाख नई नौकरियों का सृजन लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, गरीब परिवारों को ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत 30 लाख घरों का निर्माण करने की योजना है, जिससे आवासीय सुरक्षा में सुधार होगा।
डिजिटल बुनियादी ढाँचा को सुदृढ़ करने के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया। इस राशि का उपयोग ग्रामीण 5G नेटवर्क, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम और ई-शिक्षा प्लेटफ़ॉर्म के विस्तार में किया जाएगा। सरकार ने ‘डिजिटल इंडिया’ के तहत 10 करोड़ घरों में हाईस्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिससे शहरी‑ग्रामीण डिजिटल अंतर को कम किया जा सके। साथ ही, साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण के लिए नई नीतियों का प्रस्ताव भी पेश किया गया, जिससे डिजिटल अर्थव्यवस्था की स्थिरता सुनिश्चित हो।
आर्थिक विशेषज्ञों ने इस बजट को ‘संतुलित और प्रगतिशील’ बताया। कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि सामाजिक सुरक्षा में बढ़ी हुई खर्च से उपभोक्ता खर्च में वृद्धि होगी, जिससे आर्थिक वृद्धि को बल मिलेगा। वहीं, डिजिटल बुनियादी ढाँचे में निवेश को भविष्य की तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिए आवश्यक माना गया। कुछ आलोचकों ने कहा कि राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए कर सुधारों की कमी है, लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट किया कि अगले दो वर्षों में आय वृद्धि के माध्यम से घाटे को घटाया जाएगा।
भविष्य की राह देखते हुए, केन्द्र सरकार ने बजट को दीर्घकालिक विकास के एक मंच के रूप में प्रस्तुत किया है। सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल बुनियादी ढाँचे में निवेश को राष्ट्रीय विकास के मुख्य स्तंभ माना गया है। यदि इन योजनाओं को समय पर और पारदर्शी तरीके से लागू किया गया, तो भारत की आर्थिक स्थिरता, रोजगार सृजन और सामाजिक समावेशन में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद की जा रही है।