मीरा-भाईंदर में स्व. गिल्बर्ट मेंडोसा के नाम पर बनेगा 400 बेड का अत्याधुनिक सरकारी अस्पताल, 28 जून 2028 की डेडलाइन तय


मंत्री सरनाईक के निधि से खरीदी गयी थी गाड़िया
मीरा भायंदर वर्षों पहले खरीदी गईं कचरा गाड़ियां डिपो में धूल फांक रहीं, करोड़ों के खर्च पर उठे सवाल
मीरा-भायंदर, दि. 1 अक्टूबर (सिटी न्यूज़ मुंबई)
मीरा-भायंदर महानगरपालिका के घोड़बंदर बस डिपो में कचरा संकलन के लिए खरीदी गईं करीब दस घंटागाड़ियां वर्षों से उपयोग के बिना खड़ी होने का मामला सामने आया है। इन वाहनों पर विशेष निधि से खर्च किए जाने का उल्लेख है। कुछ वाहनों की नियमित रूप से नंबर प्लेट तक नहीं लगी होने का दावा किया गया है, जिससे नागरिकों के पैसों के इस्तेमाल और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, महानगरपालिका के परिवहन उपक्रम के डिपो में कई वाहन लंबे समय से खड़े हैं। नियमित इस्तेमाल और देखभाल के अभाव में वाहनों की हालत खराब होने की बात सामने आई है। लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण लोहे के हिस्सों में जंग लगने की भी बात कही जा रही है।
विशेष निधि से खरीदी गईं गाड़ियां, फिर इस्तेमाल क्यों नहीं?
इन घंटागाड़ियों की खरीद के लिए परिवहन मंत्री तथा विधायक प्रताप सरनाईक की विशेष निधि से राशि उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख किया गया है। शहर की कचरा संकलन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से वाहन खरीदे गए थे, लेकिन खरीदी के बाद उनका अपेक्षित उपयोग नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे अहम सवाल यह है कि यदि कचरा संकलन के लिए वाहनों की आवश्यकता थी, तो खरीदी गई गाड़ियां डिपो में खड़ी क्यों हैं और उनका इस्तेमाल कब शुरू होगा?
वाहन पंजीकरण को लेकर भी सवाल
इस मामले में कुछ वाहनों की पंजीकरण प्रक्रिया पूरी हुई या नहीं, इसे लेकर भी सवाल सामने आए हैं। वाहन खरीद, पंजीकरण, बीमा, फिटनेस तथा प्रत्यक्ष उपयोग के लिए आवश्यक प्रक्रिया में कौन-सा चरण लंबित है, इसकी स्पष्ट जानकारी महानगरपालिका प्रशासन से मांगे जाने की बात कही जा रही है।
यदि वाहन पंजीकृत नहीं हैं, तो उन्हें सड़क पर चलाने की अनुमति कैसे मिलेगी और अब तक उन पर खर्च की गई राशि का उपयोग किस प्रकार हुआ—ये सवाल भी नागरिकों के बीच चर्चा में हैं।
खरीदी से लेकर इस्तेमाल तक पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
नागरिकों की ओर से मांग की जा रही है कि महानगरपालिका प्रशासन इन वाहनों की खरीद से लेकर वर्तमान स्थिति तक पूरी जानकारी सार्वजनिक करे। इसमें प्रत्येक वाहन की खरीद कीमत, खरीद की तारीख, निधि का स्रोत, पंजीकरण की स्थिति, रखरखाव पर हुआ खर्च और अब तक किए गए वास्तविक उपयोग का विवरण शामिल किया जाए।
कचरा प्रबंधन जैसी आवश्यक नागरिक सेवा के लिए खरीदे गए वाहन यदि लंबे समय तक डिपो में ही खड़े रहते हैं, तो उनकी उपयोगिता और सार्वजनिक धन के प्रभावी इस्तेमाल को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर स्पष्ट और तथ्यात्मक जानकारी सामने आना अपेक्षित है।







