अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता और केंद्र सरकार के रक्षा मंत्री, ने 2024 में अपनी नवीनतम नीति घोषणाओं के साथ राजनीतिक परिदृश्य में फिर से धूम मचाई है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस लेख में उनके कार्यकाल के प्रमुख पहलुओं और हालिया निर्णयों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता और केंद्र सरकार के रक्षा मंत्री, ने 2024 में अपनी नवीनतम नीति घोषणाओं के साथ राजनीतिक परिदृश्य में फिर से धूम मचाई है। 1960 में जन्मे यह नेता दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक हैं और उन्होंने 1998 में राष्ट्रीय लोकसभा चुनाव में पहली बार जीत दर्ज की। उनके करियर की खास पहचान उनके रणनीतिक निर्णयों में है, जो अक्सर पार्टी के विकास को तेज करते हैं। 2014 से वे केंद्रीय मंत्री पद पर कार्यरत हैं, जहाँ उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस लेख में हम उनके कार्यकाल के प्रमुख पहलुओं और हालिया निर्णयों का विश्लेषण करेंगे।
शाह ने 1997 में भाजपा के युवा कार्यकुशलता कार्यक्रम में शामिल होकर राजनीतिक मंच पर अपनी पहचान बनाई। 1998 में उन्होंने नयी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सीट जीतकर संसद में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने 2004 में राष्ट्रीय कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया, जिससे पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिली।
2014 में शाह को रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया, जिससे उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रमुख जिम्मेदारी मिली। 2015 में उन्होंने 'सुरक्षा एवं रक्षा नीति 2025' का प्रारूप तैयार किया, जो 2026 में लागू होने वाला है। इस नीति के अंतर्गत रक्षा बलों के लिए 7.5% वार्षिक बजट वृद्धि और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में 2.3 बिलियन रुपये का निवेश तय किया गया।
शाह ने 2018 में 'सभी नागरिकों के लिए डिजिटल पोर्टल' की शुरुआत की, जिससे सरकारी सेवाओं की पहुँच 80% बढ़ी। इसके साथ ही उन्होंने 2021 में 'साक्षरता एवं कौशल विकास कार्यक्रम' की शुरुआत की, जिसमें 12 लाख युवाओं को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया। इन पहलों ने ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और रोजगार के अवसरों को सुदृढ़ किया।
शाह पर 2022 में भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जब एक निर्माण परियोजना में 5 करोड़ रुपये के अनियमित खर्च का दावा किया गया। जांच में पाया गया कि खर्च का 3.2 करोड़ हिस्सा सही दस्तावेज़ के बिना था। इसके बावजूद, 2023 में उन्हें पार्टी की कार्यकारी समिति में पुनः नियुक्त किया गया, जिससे उनके समर्थकों ने इसे न्यायिक प्रक्रिया से ऊपर राजनीतिक निर्णय के रूप में देखा।
2024 में शाह ने 'राष्ट्रीय रक्षा और विज्ञान नीति' की घोषणा की, जिसमें 2025 से 2030 तक 10% वार्षिक वृद्धि के साथ रक्षा अनुसंधान में 15 बिलियन रुपये का निवेश तय किया गया। साथ ही उन्होंने 2024 में 'सुरक्षा बुनियादी ढांचा परियोजना' की शुरुआत की, जिसके तहत 1,500 नई सीमा चौकियाँ स्थापित की जाएंगी, जिससे सीमा सुरक्षा में 20% सुधार की उम्मीद है।
अमित शाह का राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकाल भारत के भविष्य को आकार देने के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहा है।