केन्द्रीय सरकार ने ग्रामीण डिजिटल बुनियादी ढाँचा तेज करने के लिए नई पहल की घोषणा
City News Mumbai••1 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
केन्द्रीय सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में तेज़ इंटरनेट पहुंच सुनिश्चित करने हेतु 'डिजिटल कनेक्ट' योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत 5 साल में 1.5 करोड़ गाँवों तक हाई‑स्पीड ब्रॉडबैंड पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
केन्द्रीय सरकार ने ग्रामीण भारत में हाई‑स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के लिए नई 'डिजिटल कनेक्ट' योजना लॉन्च की, जिसका उद्देश्य पाँच वर्षों में 1.5 करोड़ गाँवों को डिजिटल बुनियादी ढाँचा प्रदान करना है। इस पहल के तहत फाइबर‑ऑप्टिक नेटवर्क, सैटेलाइट‑आधारित कनेक्शन और 5G‑सहायक टावर्स की स्थापना की जाएगी। योजना का प्रमुख लक्ष्य शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और स्थानीय उद्यमिता को डिजिटल साधनों से सशक्त बनाना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास की गति तेज़ हो सके।
डिजिटल कनेक्ट योजना की कुल लागत लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें केंद्र, राज्य और निजी क्षेत्र का सहयोग शामिल होगा। केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए विशेष रूप से 1.2 लाख करोड़ रुपये की अनुदान राशि आवंटित की है, जबकि शेष धनराशि राज्य सरकारों और निजी निवेशकों द्वारा पूरित की जाएगी। कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (NDIB) को मुख्य एजेंसी नियुक्त किया गया है, जो प्रत्येक राज्य के साथ समन्वय कर प्रोजेक्ट की समयसीमा और गुणवत्ता मानकों की निगरानी करेगा।
योजना के प्रमुख बिंदुओं में 4G/5G नेटवर्क का विस्तार, फाइबर‑ऑप्टिक केबलिंग का ग्रामीण हब‑टाउन तक पहुंचाना, और दूरस्थ क्षेत्रों में सैटेलाइट‑आधारित इंटरनेट कनेक्शन स्थापित करना शामिल है। साथ ही, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को भी इस पहल के अंतर्गत चलाया जाएगा, जिससे ग्रामीण जनसंख्या को ऑनलाइन सेवाओं का सही उपयोग करने में सक्षम बनाया जा सके। सरकार ने इस योजना को दो चरणों में बांटा है: पहला चरण 2024‑2026 में 75 लाख गाँवों तक कनेक्शन प्रदान करेगा, जबकि दूसरा चरण 2027‑2029 में शेष गाँवों को जोड़ने का लक्ष्य रखेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से ग्रामीण शिक्षा में सुधार, टेली‑मेडिसिन सेवाओं का विस्तार और कृषि उत्पादन में तकनीकी सहायता मिल सकती है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के एक प्रोफेसर ने कहा, "बिना विश्वसनीय इंटरनेट के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल परिवर्तन संभव नहीं है; यह पहल उन बाधाओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।" वहीं, कुछ आर्थिक विश्लेषकों ने फंडिंग मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि निजी निवेशकों को पर्याप्त प्रोत्साहन न मिलने पर परियोजना की गति धीमी पड़ सकती है।
डिजिटल कनेक्ट योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए कई चुनौतियों का समाधान आवश्यक है। भू‑भौगोलिक कठिनाइयाँ, मौजूदा बुनियादी ढाँचा की कमी और स्थानीय प्रशासन की क्षमता इस प्रक्रिया में प्रमुख बाधाएँ बन सकती हैं। सरकार ने इन चुनौतियों को कम करने के लिए विशेष तकनीकी सहायता टीमों की नियुक्ति की घोषणा की है, जो प्रत्येक राज्य में स्थानीय निकायों के साथ मिलकर कार्य करेगी। यदि योजना समय पर पूरी हो जाती है, तो यह न केवल ग्रामीण भारत को डिजिटल भारत के लक्ष्य के करीब लाएगी, बल्कि आर्थिक असमानताओं को भी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।