भारत की प्रौद्योगिकी परिदृश्य 2024: एआई, 5G और साइबर सुरक्षा में नई ऊँचाइयाँ
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
2024 में भारत की प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश और नवाचार ने नई दिशा ली है। एआई, 5G और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति के साथ, सरकार और निजी क्षेत्र ने मिलकर डिजिटल परिवर्तन को तेज किया।
भारत की प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 2024 की पहली तिमाही में निवेश में 12% की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली। यह वृद्धि मुख्यतः कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में हुई, जहाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों और स्टार्टअप्स ने मिलकर ₹5,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया। सरकार की 'डिजिटल इंडिया' पहल और निजी क्षेत्र के सहयोग से बुनियादी ढाँचे का विकास तेज़ हुआ, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँच में 15% की वृद्धि हुई। इस प्रवृत्ति के पीछे नीतिगत सुधार, अनुदान योजनाएँ और नई तकनीकी मानकों का योगदान स्पष्ट है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में 2024 में 18% से अधिक कंपनियों ने अपने उत्पादों में एआई आधारित समाधान लागू किये, जिससे ग्राहक अनुभव और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। विशेषकर स्वास्थ्य और शिक्षा में टेलीमेडिसिन और अनुकूलित पाठ्यक्रमों के माध्यम से एआई का उपयोग बढ़ा, जिससे 2,50,000 से अधिक लोगों को बेहतर सेवाएँ मिलीं। इन प्रगतियों के लिए भारतीय सरकार ने एआई अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने हेतु ₹1,200 करोड़ का बजट आवंटित किया, जो 2025 तक 30% बढ़ेगा। 5G नेटवर्क का विस्तार 2024 में 35% बढ़ा, जिससे भारत में 1.2 करोड़ नए 5G सब्सक्राइबर जुड़ गए। यह विस्तार मुख्यतः मुंबई, दिल्ली और बंगलोर जैसे प्रमुख शहरों में हुआ, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में 12% सुधार देखा गया। 5G के तेज़ डेटा ट्रांसफर और कम लेटेंसी ने स्वायत्त वाहनों, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और दूरस्थ शिक्षा के लिए नई संभावनाएँ खोलीं। सरकार की '5G प्रोजेक्ट इंडिया' योजना ने निजी क्षेत्र को 2,000 करोड़ का निवेश प्रोत्साहन दिया। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में 2024 में 25% से अधिक साइबर हमलों को रोका गया, जिससे राष्ट्रीय डेटा संरक्षण में मजबूती आई। फेडरल और राज्य सरकारों ने मिलकर 'साइबर सुरक्षा बल' गठित किया, जिसकी क्षमता 500 साइबर विशेषज्ञों की है। इस पहल के तहत कंपनियों को 30% तक अनुदान मिल रहा है, जिससे वे अपने नेटवर्क को उन्नत सुरक्षा प्रोटोकॉल से लैस कर रहे हैं। इन प्रयासों से औद्योगिक और वित्तीय क्षेत्रों में डेटा लीक में 18% की गिरावट आई। भविष्य की दृष्टि में 2025 तक भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए सरकार ने 'डिजिटल अनुसंधान पार्क' परियोजना शुरू की, जो 10 प्रमुख शहरों में 500 एकड़ क्षेत्र में स्थापित होगी। इस पार्क में स्टार्टअप्स, विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने हेतु 3,000 करोड़ का फंड उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, हर 2 वर्ष में एक राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी फोरम आयोजित किया जाएगा, जो नई तकनीकों और नीतिगत बदलावों पर चर्चा करेगा। इन सभी पहलुओं से स्पष्ट है कि भारत की प्रौद्योगिकी परिदृश्य 2024 में तेज़ी से विकसित हो रही है, और आने वाले वर्षों में यह देश को वैश्विक डिजिटल मंच पर अग्रणी बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।