स्वास्थ्य के नए आयाम: सरकार ने जारी किया पोषण सुधार योजना
City News Mumbai••1 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
भारत सरकार ने 10 लाख परिवारों के लिए पोषण किट्स और मुफ्त स्वास्थ्य जांच की योजना शुरू की है। इस पहल से कुपोषण दर घटाने और प्री-एक्लेम्पसिया में कमी की उम्मीद है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने आज एक नई पोषण सुधार योजना का अनावरण किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में पोषण स्तर को बेहतर बनाना है। इस योजना के अंतर्गत 10 लाख परिवारों को पौष्टिक आहार किट्स, मुफ्त स्वास्थ्य जांच और पोषण शिक्षा कार्यक्रम उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना के प्रमुख अधिकारी ने कहा कि यह कदम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 2030 तक बच्चों के कुपोषण को 30 प्रतिशत तक घटाने के लक्ष्य के अनुरूप है। इस पहल का वित्तीय भार 5,000 करोड़ रुपये है, जिसे केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बाँटा जाएगा। सभी सदस्यों के लिए।
योजना के तहत प्रत्यक्ष पोषण किट्स में दाल, चावल, दही, सब्जियाँ और विटामिन युक्त पूरक शामिल हैं। प्रत्येक परिवार को वर्ष में दो बार मुफ्त रक्तचाप, रक्तशर्करा और पाचन परीक्षण की सुविधा मिलेगी। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण स्वास्थ्य स्टेशनों पर पोषण विशेषज्ञों द्वारा मासिक कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी। योजना के क्रियान्वयन के लिए 5000 स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच 40 प्रतिशत तक बढ़ेगी। सभी नागरिकों के लिए साथ सभी संसाधन उपलब्ध है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. प्रिया शर्मा ने बताया कि इस योजना से शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार होगा। उन्होंने कहा, ‘पोषण की कमी से बचाव के लिए समय पर हस्तक्षेप आवश्यक है, और इस योजना के जरिए हम 30 प्रतिशत तक कुपोषण दर घटा सकते हैं।’ डॉ. शर्मा ने यह भी जोड़ा कि योजना की सफलता के लिए स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। सभी सदस्य किसी भी समय पहुँच सुनिश्चित करें हैं। सभी समूह।
पिछले पांच वर्षों में भारत में शिशु कुपोषण दर 27 प्रतिशत से घटकर 21 प्रतिशत हो गई है, परंतु अभी भी 12 करोड़ से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। नई योजना के लागू होने के बाद, स्वास्थ्य मंत्रालय का अनुमान है कि 2030 तक यह दर 15 प्रतिशत तक घटेगी। साथ ही, गर्भावस्था में रक्तचाप की निगरानी से 10 प्रतिशत तक प्री-एक्लेम्पसिया के मामलों में कमी आने की उम्मीद है। सभी सदस्यों के लिए सुविधा सुनिश्चित करने में सहभागिता अत्यंत आवश्यक।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने योजना के प्रति आशा व्यक्त की है। एक किसान ने कहा, ‘हम अब पोषण किट्स के बिना नहीं रहेंगे और स्वास्थ्य जांच से हमारी बीमारियाँ जल्दी पता चलेंगी।’ शहरी इलाकों में युवा भी इस पहल को स्वीकार कर रहे हैं, कहते हैं कि मुफ्त परीक्षण से स्वास्थ्य लागत में कमी आएगी। सरकार को इस सकारात्मक प्रतिक्रिया पर आगे कदम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। सभी सदस्य सफलता।
इस नई पोषण सुधार योजना के माध्यम से सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जो न केवल कुपोषण को कम करेगा बल्कि समग्र स्वास्थ्य जागरूकता भी बढ़ाएगा। यदि सभी हितधारक मिलकर कार्यान्वयन के हर चरण को सुचारु रूप से आगे बढ़ाएँ, तो 2035 तक भारत को वैश्विक स्तर पर एक स्वस्थ राष्ट्र के रूप में मान्यता मिलने की संभावना है। इस पहल के सफल कार्यान्वयन के लिए निरंतर निगरानी और समय पर सुधार अनिवार्य हैं।