भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन और ग्रामीण अस्पतालों की सुदृढ़ीकरण: 2024 के आँकड़ों के साथ
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन, ग्रामीण अस्पतालों की सुदृढ़ीकरण और नीति सुधार से रोगी अनुभव में सुधार की कहानी, 2024 के आँकड़ों के साथ, स्वास्थ्य मंत्रालय के नवीनतम लक्ष्यों पर प्रकाश डालती है।
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा निरंतर विस्तृत हो रहा है, परंतु इसकी गुणवत्ता और पहुँच अभी भी चुनौतियों से भरी हुई है। 2023 में, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, 65% ग्रामीण परिवारों को नज़दीकी अस्पताल तक पहुँचने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। इसी बीच, शहरी इलाकों में भी जनसंख्या के 40% हिस्से को प्रीमियम चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता महसूस हो रही है। सरकार ने इस अंतर को पाटने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफ़ॉर्म और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की सुदृढ़ीकरण प्रमुख हैं।
हालिया डेटा से पता चलता है कि भारत में प्रति 1,000 लोगों पर केवल 1.6 डॉक्टर उपलब्ध हैं, जबकि WHO द्वारा सुझाई गई न्यूनतम मानक 3.5 डॉक्टर है। इसके अलावा, 2022 में कुल 1.2 करोड़ रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, परंतु उनमें से 35% को समय पर इलाज नहीं मिल पाया। इन आँकड़ों के आधार पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2024 तक डॉक्टरों की संख्या 2.5 लाख तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को मुख्यतः दो बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है: संसाधनों की कमी और स्वास्थ्य शिक्षा का अभाव। ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालों का अभाव और उपकरणों का पुराना होना, रोगियों के इलाज में देरी का कारण बनता है। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सीमित विस्तार, उनके कौशल को अद्यतन रखने में बाधा उत्पन्न करता है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने 2023 में ‘डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम’ योजना शुरू की, जिसमें टेलीमेडिसिन, इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से रोगियों की पहुँच बढ़ाने का लक्ष्य है। इस योजना के अंतर्गत 5,000 से अधिक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में टेलीमेडिसिन कियोस्क स्थापित किये गए हैं, जिससे दूरस्थ इलाकों में भी विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध हो रही है।
इन पहलों के फलस्वरूप, 2024 की पहली तिमाही में ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल में भर्ती दर 12% बढ़ी, जबकि शहरी इलाकों में औसत प्रतीक्षा समय 15 मिनट से घटकर 9 मिनट हो गया। रोगियों का संतोष स्तर 78% से बढ़कर 86% हुआ, जो कि स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में सुधार का स्पष्ट संकेत है। साथ ही, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से 2.5 लाख नई रोगी पंजीकरण हुए, जो भविष्य में डेटा विश्लेषण और निवारक देखभाल में सहायक होंगे।
भविष्य की दिशा में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2025 तक 3,00,000 नए चिकित्सा केंद्र खोलने और 5,00,000 स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने सार्वजनिक-निजी साझेदारी के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को विस्तृत करने का इरादा जताया है, ताकि सभी वर्गों के नागरिकों को किफायती दवाओं और सेवाओं तक पहुँच मिल सके। इन कदमों से भारत की स्वास्थ्य प्रणाली वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित होने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही है।