भारत की शिक्षा नीति में नवीनतम परिवर्तनों के साथ डिजिटल साक्षरता पर नया जोर
City News Mumbai••0 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
भारत के शिक्षा मंत्रालय ने 2024-25 शैक्षणिक वर्ष के लिए नई पाठ्यक्रम रूपरेखा जारी की, जिसमें डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य छात्रों को भविष्य के कार्यबल के लिए तैयार करना है।
भारत के शिक्षा मंत्रालय ने आज 2024-25 शैक्षणिक वर्ष के लिए नई पाठ्यक्रम रूपरेखा जारी की, जिसमें डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य छात्रों को भविष्य के कार्यबल के लिए तैयार करना है, जिसमें प्रोग्रामिंग, डेटा विश्लेषण और बहुभाषी संचार शामिल हैं। साथ ही, ग्रामीण और शहरी स्कूलों के बीच डिजिटल अंतर को कम करने के लिए 1,200 नई टैबलेट और इंटरनेट कनेक्शन की व्यवस्था की जाएगी। इस कदम को शिक्षा विभाग के प्रमुख ने शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी विकास के प्रतीक के रूप में सराहा।
जैसे कि केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2023 में प्राथमिक शिक्षा में नामांकन 12.5 करोड़ था, जबकि 2024 में यह 12.8 करोड़ तक बढ़कर 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दिखा रहा है। इस वृद्धि का श्रेय मुख्यतः मुफ्त स्कूल भोजन योजना और शैक्षणिक सहायता कार्यक्रमों को जाता है।
कुल 3,50,000 शिक्षक इस वर्ष के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉड्यूल में भाग लेने के लिए पंजीकृत हुए, जिसमें विषय आधारित शिक्षण विधियों और डिजिटल टूल्स के उपयोग पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को इंटरैक्टिव वर्कशॉप्स और केस स्टडीज़ के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव दिया गया।
फिर भी, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी और अवसंरचना की कमी जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। विशेष रूप से 10,000 से अधिक गाँवों में कक्षा 1 से 5 के छात्रों के लिए पर्याप्त शिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने 2030 तक सभी प्राथमिक स्कूलों में इंटरनेट कनेक्शन और डिजिटल शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा, 2026 तक शिक्षण गुणवत्ता को मापने के लिए एक राष्ट्रीय मानक स्थापित किया जाएगा।
इस प्रकार, भारत की शिक्षा प्रणाली में निरंतर सुधार के साथ ही समावेशी विकास और तकनीकी उन्नति को संतुलित करने का प्रयास जारी रहेगा।