भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहल: रोग रोकथाम और डिजिटल चिकित्सा का उदय
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
भारत की नई स्वास्थ्य नीति ने 2026 में रोग रोकथाम और डिजिटल चिकित्सा पर विशेष जोर दिया। सरकार ने टेलीमेडिसिन और इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड को बढ़ावा दिया। इस पहल से स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।
भारत की स्वास्थ्य नीति ने 2026 में नई दिशा तय की है, जिसमें रोग रोकथाम, डिजिटल चिकित्सा और स्वास्थ्य शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भारत में 1.2 करोड़ नई रोगी रिपोर्ट की गईं, जो पिछले वर्ष से 7% अधिक है। इस परिप्रेक्ष्य में सरकार ने 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन 2026' की घोषणा की, जिसका लक्ष्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है। इस पहल के तहत टेलीमेडिसिन, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड और मोबाइल हेल्थ एप्लिकेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सभी नागरिक के लिए स्वास्थ्य सेवा सुविधा उपलब्ध कराने का।
डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने 2025 में एक नया प्लेटफ़ॉर्म 'ई-स्वास्थ्य गेटवे' लॉन्च किया, जो डॉक्टर, अस्पताल और फार्मेसी को एकीकृत करता है। इस पोर्टल पर 12,000 से अधिक चिकित्सकों को पंजीकृत किया गया है, और 3,500 अस्पतालों ने इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (EMR) सिस्टम अपनाया है। टेलीमेडिसिन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में 70% अधिक रोगी ऑनलाइन परामर्श प्राप्त कर रहे हैं, जिससे रोग पहचान और उपचार में समय की बचत हो रही है। और स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में सुधार लाया है।
रोगों की बाढ़ के बीच, 2024 में भारत में श्वसन रोग, मधुमेह और हृदय रोगों की संख्या 1.5 करोड़ से अधिक पाई गई। सरकार ने इन प्रमुख रोगों के लिए नयी दिशानिर्देश जारी किए, जिनमें 30% तक रक्त शर्करा स्तर नियंत्रित करने के लक्ष्य और 25% तक रक्तचाप घटाने के लक्ष्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 2025 में शुरू की गई 'हेल्थ ट्रैकिंग' पहल के तहत 50 लाख परिवारों को स्मार्ट घड़ियों के माध्यम से निरंतर स्वास्थ्य मॉनिटरिंग का लाभ मिला। और रोगी।
सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार ने 'स्वास्थ्य शिविर' कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें 2026 तक 1,000 स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों में टीकाकरण, पोषण परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन प्रदान किया जाएगा। विशेष ध्यान किशोरों और बुज़ुर्गों के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर दिया गया है, क्योंकि 2024 में 30% किशोर और 45% बुज़ुर्गों में तनाव और अवसाद के लक्षण पाए गए। इस पहल से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता में 20% की वृद्धि की उम्मीद है और रोगी स्वास्थ्य के लाभ के लिए।
भविष्य की दिशा में, 2027 में सरकार ने 5 अरब रुपये का बजट आवंटित किया है, जो कि शोध एवं विकास, AI आधारित निदान उपकरण और स्वास्थ्य शिक्षा पर खर्च किया जाएगा। इस वित्तीय सहायता से 2028 तक 200 नई AI डायग्नोस्टिक प्लेटफ़ॉर्म विकसित होने की उम्मीद है। साथ ही, निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी के माध्यम से 10,000 स्वास्थ्य स्टार्टअप्स को फंडिंग और मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे नवाचार की गति तेज होगी और रोगी स्वास्थ्य सेवा में सुधार लाने के लिए सभी।
इस प्रकार, भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र नवाचार, जागरूकता और सहयोग से सशक्त हो रहा है, जो आने वाले वर्षों में रोगों के नियंत्रण और रोगी देखभाल में उल्लेखनीय सुधार लाने का वादा करता है।