जंतर मंतर पर आज शांतिपूर्वक विरोध: 200 से अधिक नागरिकों ने सरकारी नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
आज दिल्ली के जंतर मंतर पर 200 से अधिक नागरिकों ने सरकारी नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध किया। पुलिस ने 50 अधिकारियों के साथ व्यवस्था बनाए रखी, जिससे किसी भी हिंसक घटना से बचाव हुआ। यह घटना दिल्ली की राजधानी में नागरिकों के आवाज़ उठाने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
आज 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर मंतर परिसर में 200 से अधिक नागरिकों ने सरकारी नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध कार्यक्रम सुबह 9:30 बजे शुरू हुआ और दोपहर 12:00 बजे समाप्त हुआ। प्रतिभागियों ने शांतिपूर्वक ध्वज लहराए, नारे लगाए और पर्चे वितरित किए। पुलिस ने 50 अधिकारियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की, जिससे किसी भी हिंसक घटना से बचाव हुआ। यह घटना दिल्ली की राजधानी में नागरिकों के आवाज़ उठाने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें शांति और व्यवस्था का पालन हुआ। सभी प्रतिभागियों ने कानून के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए शांतिपूर्वक अपनी मांगों को प्रस्तुत किया।
जंतर मंतर, जिसे 18वीं शताब्दी में महाराजा शाहजहाँ के आदेश पर बनवाया गया था, आज एक विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह स्थल वैज्ञानिक अवलोकन के लिए निर्मित था और आज भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। इसलिए, इस स्थल पर विरोध प्रदर्शन का चयन नागरिकों द्वारा एक प्रतीकात्मक संदेश देने के रूप में देखा गया, जहाँ वे अपने असंतोष को सांस्कृतिक विरासत के बीच व्यक्त करना चाहते हैं।
प्रदर्शनों का प्रारंभ सुबह 9:30 बजे जंतर मंतर के मुख्य प्रवेश द्वार पर हुआ। लगभग 200 लोग, जिनमें युवा, वयोवृद्ध और महिलाएँ शामिल थीं, ने ध्वज और बैनर लेकर अपनी मांगें व्यक्त कीं। पुलिस ने 50 अधिकारियों के साथ एक परिधि बनाई, जिससे स्थल के आसपास के नागरिकों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। प्रदर्शन का मार्ग जंतर मंतर से लेकर राजपथ और फिर संसद भवन के पास से होकर गुजरा, जिससे सार्वजनिक परिवहन पर न्यूनतम प्रभाव पड़ा।
यह विरोध दिल्ली सरकार द्वारा हाल ही में लागू की गई कर नीति के खिलाफ है, जिसे नागरिकों ने अत्यधिक बोझिल बताया है। पहले भी 2025 में इसी नीति के विरुद्ध बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे, जिनमें हजारों लोगों ने भाग लिया। सरकार ने इन प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक व्यवस्था अधिनियम, 2000 के तहत पुलिस को विशेष अधिकार दिए हैं। इस संदर्भ में, नागरिकों ने शांतिपूर्ण तरीकों का सहारा लिया ताकि अपनी मांगों को कानूनी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
प्रदर्शन के आयोजक, समाजसेवी संगठन 'सिविक वॉयस', के अध्यक्ष ने कहा, 'हमारा उद्देश्य केवल नीति में बदलाव की मांग नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।' पुलिस प्रमुख ने बताया, 'सभी कानूनों के तहत ही कार्रवाई की गई और कोई भी अवैध गतिविधि नहीं पाई गई।' एक प्रतिभागी ने कहा, 'हमने शांतिपूर्वक अपनी मांगें रखी हैं और आशा करते हैं कि सरकार हमारे शब्दों को सुनेगी।'
इस विरोध के कारण राजपथ पर हल्का जाम हुआ, परंतु ट्रैफिक पुलिस ने वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर यातायात को सुचारू रखा। जंतर मंतर की यात्रा पर भी थोड़ी कमी देखी गई, परंतु स्थल के प्रबंधक ने बताया कि आगंतुकों को सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए गए। सरकार ने अगले सप्ताह के भीतर नीति पर पुनर्विचार करने का आश्वासन दिया, जबकि नागरिकों ने अगले महीने एक नया विरोध कार्यक्रम की योजना बनाई है।
इस प्रकार, जंतर मंतर पर आज का शांतिपूर्ण विरोध दिल्ली के नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की पुष्टि करता है, और यह दर्शाता है कि नागरिक आवाज़ें शांति और व्यवस्था के साथ सरकार तक पहुँच सकती हैं।