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संसद में नई कृषि नीति पर हुई तीखी बहस: विपक्षी आलोचनाएँ और सरकार के तर्क
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संसद में नई कृषि नीति पर हुई तीखी बहस: विपक्षी आलोचनाएँ और सरकार के तर्क

City News Mumbai•11 सितंबर 2026 को 03:53 am बजे•0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

संसद में नई कृषि नीति पर हुई तीखी बहस में विपक्षी दलों ने नीति की वैधता पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने अनुदान वृद्धि और डिजिटल ऋण प्रणाली के लाभों पर जोर दिया। इस लेख में नीति के प्रमुख पहलुओं और दोनों पक्षों के तर्कों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

संसद के बहस के मंच पर इस वर्ष की पहली तिमाही में पेश की गई नई कृषि नीति पर तीखी चर्चा हुई। यह नीति, जिसे कृषि मंत्रालय ने 15 मार्च 2026 को घोषित किया, किसानों के लिए अनुदान बढ़ाने और फसल बीमा को विस्तृत करने का दावा करती है। सांसदों ने इसे पारदर्शिता और कार्यान्वयन में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। परन्तु, बहस के दौरान विपक्षी दलों ने इस योजना की वैधता और प्रभावशीलता पर प्रश्न उठाए, विशेषकर छोटे पैमाने के किसानों के लिए। इस लेख में हम इस बहस के प्रमुख बिंदुओं और दोनों पक्षों के तर्कों का विश्लेषण करेंगे।

इस नीति का आधार 2025 के राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से लिया गया है, जिसे 2018 से लागू किया जा रहा था। सरकार का दावा है कि नई योजना के तहत फसल बीमा का कवरेज 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत किया जाएगा, जबकि अनुदान दर को 10 प्रतिशत बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, नीति में किसानों के लिए डिजिटल ऋण प्रबंधन प्रणाली की शुरुआत का भी प्रावधान है, जिससे ऋण वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी।

विपक्षी दलों ने तर्क दिया कि नीति में प्रस्तावित अनुदान वृद्धि केवल सरकारी खर्च में वृद्धि करेगी और किसानों की आय में वास्तविक सुधार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि फसल बीमा का कवरेज बढ़ाने से बीमा कंपनियों पर अधिक दायित्व पड़ेगा, जिससे प्रीमियम बढ़ेगा। इसके अतिरिक्त, डिजिटल ऋण प्रणाली के कार्यान्वयन में तकनीकी अवसंरचना की कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में इसकी सफलता पर संदेह जताया गया।

सरकार ने इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि नीति का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना और किसानों की आय स्थिरता सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि अनुदान वृद्धि के साथ-साथ कर छूट और ऋण ब्याज दरों में कमी भी की जाएगी। फसल बीमा के विस्तृत कवरेज के तहत जोखिम को कम करने के लिए नई प्रीमियम स्लैब्स पेश की गई हैं, जिससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

नई नीति के तहत किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि और ग्रामीण रोजगार पर पड़े प्रभाव पर विशेषज्ञों ने भी चर्चा की। कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रवि कुमार ने बताया कि फसल बीमा कवरेज बढ़ाने से जोखिम घटेगा और उत्पादन में स्थिरता आएगी, जिससे वार्षिक आय में 15 प्रतिशत वृद्धि संभव है। दूसरी ओर, ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि डिजिटल ऋण प्रणाली से ऋण वितरण की दक्षता में 25 प्रतिशत सुधार होगा।

इस प्रकार, नई कृषि नीति पर बहस से यह स्पष्ट हुआ कि नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए सभी हितधारकों के बीच संवाद और पारदर्शिता अनिवार्य है।
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