हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप! सरनाईक ने मांगी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने वाली रिपोर्ट
City News Mumbai••46 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अवैध निर्माण को मंजूरी? मंत्री सरनाईक ने खोला मोर्चा, ‘सेवन इलेवन’ मामले मोर्चा
सेवन इलेवन’ समेत 63 मामलों की होगी जांच
बिल्डर-अधिकारी गठजोड़ पर सरनाईक का शिकंजा! हर महीने लगेगा ‘शिकायतकर्ता दरबार’
मीरा भायंदर (सीटी न्यूज मुंबई)बॉम्बे हाई कोर्ट के स्थगन आदेश और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। सरनाईक ने सवाल उठाया कि आखिर किस कानूनी अधिकार के तहत ऐसी अनुमतियां जारी की गईं और क्या अधिकारियों के लिए जनप्रतिनिधि हाई कोर्ट से भी बड़े हैं?
नवघर की आदिवासी जमीन और इको-सेंसिटिव जोन की अनुमतियों की होगी जांच
मंत्री सरनाईक ने नवघर क्षेत्र की आदिवासी और निजी जमीनों के साथ पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में जारी लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) और निर्माण अनुमतियों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कथित रूप से न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन कर अनुमतियां देने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के नाम और उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करते हुए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
नरेंद्र मेहता के कथित हस्तक्षेप और सेवन इलेवन मामले की जांच
, विधायक नरेंद्र मेहता के नगर नियोजन विभाग में कथित हस्तक्षेप और शिकायतकर्ता असगर अली वोरा द्वारा उठाए गए सेवन इलेवन कंपनी के मामले की भी जांच की जाएगी।
स्पेशल सिविल सूट क्रमांक 481/2014 के आदेश के बावजूद कंपनी को निर्माण प्रारंभ प्रमाणपत्र (CC) किस आधार पर दिया गया और बाद में उसे वापस लेते समय अधिकारियों की क्या भूमिका रही, इसकी पूरी जानकारी मांगी गई है।
इससे पहले, 16 सितंबर को प्रकाशित समाचारों में पुष्टि हुई थी कि मीरा-भाईंदर महानगरपालिका ने विवादित जमीन पर सेवन इलेवन की निर्माण अनुमति रद्द कर दी थी। नरेंद्र मेहता ने जमीन के लेनदेन में किसी प्रकार की धोखाधड़ी से इनकार किया था और कहा था कि विवाद समाप्त करने के उद्देश्य से कंपनी ने जमीन का कब्जा छोड़ने तथा निर्माण अनुमति वापस करने का निर्णय लिया।
63 मामलों में से पांच की सुनवाई, दो अनुमतियां रद्द करने का दावा
सरनाईक के जनसंपर्क विभाग के मुताबिक, 24 सितंबर की बैठक में कुल 63 मामलों में से पहले चरण के पांच मामलों पर कार्रवाई की गई। इनमें दो कथित अवैध अनुमतियां तत्काल रद्द की गईं, जबकि एक मामले में राज्य सरकार से कानूनी सलाह लेने का निर्णय लिया गया।
इन मामलों पर आगामी 16 नवंबर को आगे निर्णय लिए जाने की जानकारी दी गई है।
हर महीने लगेगा शिकायतकर्ता दरबार
मंत्री सरनाईक ने घोषणा की कि आम जनता की शिकायतों के समाधान और नगर नियोजन विभाग में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए वे हर महीने विशेष ‘शिकायतकर्ता दरबार’ आयोजित करेंगे।
इसके तहत हर महीने सेवन इलेवन कंपनी से जुड़े पांच-पांच मामलों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। सरनाईक ने कहा कि केवल कनिष्ठ कर्मचारियों को निलंबित करके वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जाएगा। जांच में पद के दुरुपयोग या गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्तता सामने आने पर संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।
‘विधायक बड़ा या हाई कोर्ट?’ — प्रताप सरनाईक
मंत्री सरनाईक ने सवाल उठाया कि मीरा-भाईंदर क्या किसी की निजी संपत्ति है? उन्होंने कहा कि शहर में कोई भी नेता या बिल्डर कानून से बड़ा नहीं है। न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद किसके कहने पर प्रशासन ने निर्माण अनुमतियां दीं, इसकी पूरी जांच की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिक बार-बार न्यायालय के चक्कर नहीं लगा सकते। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर शिकायतों का निपटारा करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए हर महीने शिकायतकर्ता दरबार आयोजित किया जाएगा।
सरनाईक ने कहा कि जब तक कथित अनियमितताओं की जांच पूरी नहीं होती और प्रभावित नागरिकों को न्याय नहीं मिलता, तब तक वे इस मामले में कार्रवाई की मांग जारी रखेंगे।
24 सितंबर के प्रेस नोट में वर्णित बैठक, जांच के निर्देश और कार्रवाई संबंधी विवरण मंत्री सरनाईक के जनसंपर्क विभाग के दावों पर आधारित हैं। इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।