छत्रो की गूँज: भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा की नई पहल
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
छत्रो की गूँज योजना, जो 15 अगस्त 2023 को लॉन्च हुई, ने 12 लाख ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। इस लेख में योजना की पृष्ठभूमि, कार्यान्वयन और प्रारम्भिक प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।
छत्रो की गूँज, भारत सरकार की ग्रामीण सामाजिक सुरक्षा पहल, ने पिछले दो वर्षों में ग्रामीण जनसंख्या के जीवन स्तर में उल्लेखनीय बदलाव लाया है। 15 अगस्त 2023 को राष्ट्रीय स्तर पर घोषित इस योजना का उद्देश्य आर्थिक असुरक्षा के जोखिम को कम करना और बुनियादी स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना है। लॉन्च के समय योजना के लिए 2,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया, जिससे 12 लाख परिवारों को प्रतिवर्ष 12,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
योजना की पृष्ठभूमि में 2020 में प्रकाशित ग्रामीण गरीबी सर्वेक्षण के परिणामों ने प्रमुख भूमिका निभाई। सर्वेक्षण में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आय असमानता और सामाजिक सुरक्षा कवरेज में अंतर बहुत अधिक था, जिससे सरकार ने एक व्यापक सुरक्षा जाल बनाने की आवश्यकता महसूस की। इस संदर्भ में छत्रो की गूँज को एक बहु-स्तरीय मॉडल के रूप में डिजाइन किया गया, जिसमें आय-आधारित पात्रता, स्थानीय निकायों की निगरानी और डिजिटल भुगतान प्रणाली को जोड़ा गया।
कार्यान्वयन चरण में केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर एकीकृत प्रबंधन मंच स्थापित किया। इस मंच के माध्यम से पात्र परिवारों की पहचान, डेटा सत्यापन और निधियों का वितरण किया जाता है। डिजिटल भुगतान के लिए यूनिक आयडेंटिफिकेशन (UID) और बैंक खाता लिंकिंग को अनिवार्य किया गया, जिससे लेनदेन की पारदर्शिता और समयबद्धता में सुधार हुआ। साथ ही, स्थानीय पंचायतों को निगरानी समिति के रूप में नियुक्त किया गया, जो फील्ड स्तर पर योजना की प्रगति को ट्रैक करती हैं।
पहले वर्ष के अंत तक, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 85% लक्षित परिवारों ने समय पर सहायता प्राप्त की, जबकि शेष 15% में तकनीकी या दस्तावेजी बाधाओं के कारण देरी हुई। योजना के प्रभाव को मापने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और आय में सुधार के सूचकांक तैयार किए गए। प्रारम्भिक रिपोर्ट में बताया गया कि योजना के तहत आय में औसत 7% की वृद्धि और बाल शिक्षा दर में 4% की बढ़ोतरी देखी गई। इसके अलावा, स्वास्थ्य बीमा कवरेज में 6% की वृद्धि ने ग्रामीण रोगी सुरक्षा को मजबूत किया।
विषय विशेषज्ञों का मानना है कि छत्रो की गूँज ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल स्थापित किया है, परन्तु सतत सुधार की आवश्यकता भी स्पष्ट है। आर्थिक अनुसंधान संस्थान के प्रमुख ने कहा कि डेटा एकीकरण और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे की मजबूती से योजना की पहुँच और प्रभावशीलता बढ़ेगी। भविष्य में योजना को विस्तार देने के लिए अतिरिक्त 1,200 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है, जिससे 5 लाख और परिवारों को लाभान्वित किया जा सकेगा। इस प्रकार, छत्रो की गूँज ग्रामीण भारत में सामाजिक सुरक्षा के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन रही है।