बंदी होते हुए शिवाजी पार्क पर आंदोलन का निर्धार....; ‘जेल भरो’ का इशारा.....!
City News Mumbai••72 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
गांधी जयंती पर 'एसआयआर' विरोध में संघर्ष की आवाज ...; मुंबई पुलिस द्वारा अनुमति नकारने से तनाव की संभावना...
मुंबई (अनंत नलावडे) - चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ और विशेष मतदाता सत्यापन प्रक्रिया अर्थात 'एसआईआर' के निषेधार्थ गांधी जयंती के दिन, 2 अक्टूबर को मुंबई में आंदोलन की हाक दी गई है।
मुंबई पुलिस ने कानून व व्यवस्था के कारण से आंदोलन की अनुमति नाकार दी, फिर भी दादर के छत्रपति शिवाजी महाराज मैदान (शिवाजी पार्क) पर निर्धारित समय पर आंदोलन करने का निश्चय कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने व्यक्त किया है। पुलिस के अवरोध पर उन्होंने 'जेल भरो' आंदोलन करने का भी इशारा दिया। इस प्रकार गांधी जयंती के दिन आंदोलनकारियों और पुलिस प्रशासन के बीच संघर्ष की संभावना उत्पन्न हुई है।
मुंबई प्रेस क्लब में गुरुवार को आयोजित पत्रकार सम्मेलन में दीपके ने आंदोलन की भूमिका और आगामी कार्यक्रम की घोषणा की। उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार, 2 अक्टूबर को शाम 4 बजे शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 से आंदोलन शुरू होगा। मुंबई में आंदोलन के बाद गोवा, बेंगलुरु, कोलकाता, पटना, उत्तर प्रदेश और रांची में भी आंदोलन का विस्तार किया जाएगा। अक्टूबर के अंत में नई दिल्ली के जंतरमंतर में बिना समय सीमा के आंदोलन करने की घोषणा भी उन्होंने की।
इस आंदोलन में पक्ष के झंडों का उपयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज हाथ में लेकर और महात्मा गांधी की तस्वीर वाले टी-शर्ट पहनकर भाग लेने का आह्वान दीपके ने किया। उन्होंने अहिंसक मार्ग से आंदोलन करने का निश्चय भी व्यक्त किया।
परवानगी नाकारने पर प्रशासन पर सवाल..
आंदोलन की अनुमति नाकारने पर दीपके ने प्रशासन की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगाया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के समय ब्रिटिशों से आंदोलन की अनुमति नहीं ली जाती थी, इस संदर्भ में उन्होंने लोकतंत्र में नागरिकों को आंदोलन का अधिकार होने का दावा किया। राजनीतिक रैलियों को साइलेंस ज़ोन में अनुमति दी जाती है, जबकि सामान्य नागरिकों के अधिकारों के लिए होने वाले आंदोलन को नकारने का सवाल भी उन्होंने उठाया। 'मुझे तीन महीने जेल में डांबने पर भी कोई आपत्ति नहीं। मैं फिर से जनता के लिए बाहर आऊंगा,' उन्होंने कहा, यह स्पष्ट करते हुए कि उन्हें गिरफ्तारी से डर नहीं है। इस प्रकार पुलिस द्वारा अनुमति नाकारने के बावजूद आंदोलन कैसे होगा, इस पर अब ध्यान केंद्रित हुआ है।
मतदाता सूची से बेरोजगारी तक मुद्दे....
इस आंदोलन का केंद्रबिंदु एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली है, लेकिन मतदान का अधिकार, बैलेट पेपर पर चुनाव, एमपीएससी-यूपीएससी छात्रों के प्रश्न, शिक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को भी आंदोलन में शामिल किया जाएगा, ऐसा दीपके ने बताया। उन्होंने राजनीतिक दल के रूप में कार्य करने के बजाय प्रभावी सामाजिक दबाव समूह बनाने का इरादा भी व्यक्त किया। दीपके के अनुसार, महाविकास गठबंधन के वरिष्ठ नेता शरद पवार, उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे, साथ ही मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस अभियान का समर्थन दिखाया है।
आंदोलकों की प्रमुख मांगें.....
मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा: ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उनके कार्यकाल की गहन जांच करके आपराधिक अपराध दर्ज करने की मांग आंदोलकों ने की है। एसआईआर प्रक्रिया रोकें: मतदाता सत्यापन के नाम पर मतदाताओं के नामों को हटाने का आरोप लगाते हुए इस अभियान को तुरंत रोकने और आगामी चुनावों को 2025 के मूल मतदाता सूची के अनुसार आयोजित करने की मांग भी की गई है। चयन समिति में बदलाव: चुनाव आयुक्तों की चयन समिति में वरिष्ठ न्यायाधीश और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को कानून के अनुसार अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग आंदोलकों की है।
अब ध्यान पुलिस की भूमिका पर...
गांधी जयंती के दिन आंदोलन करने का निश्चय और पुलिस द्वारा अनुमति नाकारणे के कारण शिवाजी पार्क परिसर की स्थिति महत्वपूर्ण हो जाएगी। आंदोलनकारियों, पुलिस प्रशासन और संभावित राजनीतिक भागीदारी के कारण इस आंदोलन पर राज्य का ध्यान केंद्रित हो गया है। यह स्पष्ट होगा कि आंदोलन शांति से होगा या 'जेल भरो' का मार्ग अपनाया जाएगा, यह कल शुक्रवार को स्पष्ट होगा।