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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन 2024: 2026 तक 95% पहुंच लक्ष्य, बजट, चुनौतियां और रोग निवारण में संभावित प्रभाव
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन 2024: 2026 तक 95% पहुंच लक्ष्य, बजट, चुनौतियां और रोग निवारण में संभावित प्रभाव

City News Mumbai•8 सितंबर 2026 को 04:18 am बजे•5 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने 2024 में शुरू होकर 2026 तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच 95% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस लेख में बजट, कार्यान्वयन चुनौतियां और रोग निवारण पर प्रभाव का विश्लेषण किया गया है।

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार 2024 में लॉन्च किए गए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस योजना का उद्देश्य 2026 तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक देखभाल की पहुंच 95 प्रतिशत तक बढ़ाना है, जिससे रोगी उपचार में समय घटे और जीवन प्रत्याशा में सुधार हो। सरकार ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 12,000 नए स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, 8,500 स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती, और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रणाली का एकीकृत रोल‑आउट निर्धारित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से रोग निवारण और स्वास्थ्य शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति होगी।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए वार्षिक बजट 2024-2025 में 1.8 ट्रिलियन रुपये निर्धारित किया गया है, जिसमें से 55 प्रतिशत ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं के निर्माण और उपकरण अधिग्रहण में आवंटित किया गया है। शेष निधि 30 प्रतिशत डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफ़ॉर्म, 10 प्रतिशत मानव संसाधन विकास, और 5 प्रतिशत सार्वजनिक जागरूकता अभियानों के लिए earmarked है। वित्त मंत्रालय ने इस बजट को पारदर्शी निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य वित्तीय पोर्टल के माध्यम से सार्वजनिक किया है, जिससे राज्य और केंद्र दोनों स्तर पर खर्च की वास्तविक स्थिति का实时 ट्रैकिंग संभव हो रहा है।

नए स्वास्थ्य केंद्रों की निर्माण प्रक्रिया में भूमि अधिग्रहण, स्थानीय प्रशासनिक अनुमतियों, और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान प्रमुख बाधाएँ बन रही हैं। विशेषकर उत्तरपूर्वी राज्यों में सड़कों की खराब स्थिति और बिजली की अनियमित आपूर्ति ने निर्माण समयसीमा को 12 महीने से 18 महीने तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा, डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली के एकीकरण में 8,500 स्वास्थ्य कर्मियों में से केवल 40 प्रतिशत ने वर्तमान में आवश्यक आईटी प्रशिक्षण पूरा किया है, जिससे डेटा एंट्री में त्रुटियों की संभावनाएँ बढ़ रही हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र ने 2025 के मध्य तक विशेष कार्यदल स्थापित करने की घोषणा की है।

पहले दो वर्षों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने टाइप‑2 डायबिटीज, हाइपरटेंशन, और ट्यूबरकुलोसिस के प्रारम्भिक स्क्रीनिंग कवरेज को क्रमशः 68 प्रतिशत, 72 प्रतिशत, और 65 प्रतिशत तक बढ़ाया है। डेटा के अनुसार, 2025 के अंत तक इन तीन प्रमुख रोगों में मृत्यु दर में कुल 12 प्रतिशत की कमी अपेक्षित है, जबकि मातृ और शिशु मृत्यु दर में क्रमशः 9 प्रतिशत और 11 प्रतिशत गिरावट की संभावना है। इस सुधार को ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों की 1,200 सक्रिय इकाइयों और टेली‑मेडिसिन कनेक्शन की 4,500 घंटे की साप्ताहिक उपयोगिता से जोड़ा जा रहा है।

आगे चलकर सरकार ने 2027 तक सभी सार्वजनिक अस्पतालों में इलेक्ट्रॉनिक प्रिस्क्रिप्शन प्रणाली लागू करने और 10,000 अतिरिक्त स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ग्रामीण स्तर पर तैनात करने की योजना बनाई है। यह रणनीति न केवल रोगी देखभाल की गुणवत्ता बढ़ाएगी, बल्कि स्वास्थ्य डेटा की विश्वसनीयता को भी सुदृढ़ करेगी, जिससे नीति निर्माताओं को सटीक निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। इन पहलों के सफल कार्यान्वयन से भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2030 सतत विकास लक्ष्य के तहत 'सभी के लिए स्वास्थ्य' की दिशा में एक मजबूत कदम उठाने की उम्मीद है।
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