भारत सरकार ने 2025 के लिए स्वास्थ्य योजनाएँ, AI निदान, टेलीमेडिसिन, बीमा विस्तार और रोगी संतुष्टि पर पहल की, जिससे स्वास्थ्य सेवा में सुधार हो रहा है।
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भारत सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में नई नीतियाँ और डिजिटल नवाचार के माध्यम से सेवा पहुंच और गुणवत्ता को बढ़ाया है। इस लेख में 2025 के योजनाओं, AI निदान, टेलीमेडिसिन, बीमा विस्तार और रोगी संतुष्टि पर चर्चा की गई है।
पिछले वर्ष स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना 2025-26' के तहत 10,000 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं की पहुँच बढ़ाना है। साथ ही, सरकार ने टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म के विस्तार के लिए ₹2,500 करोड़ का निवेश घोषित किया। इस निवेश से दूरस्थ इलाकों में विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा, डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड सिस्टम को मानकीकृत करने के लिए एक नई नीति लागू की गई, जिससे रोगियों के डेटा का सुरक्षित और पारदर्शी प्रबंधन संभव होगा। स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में होगा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निदान उपकरणों का उपयोग अस्पतालों में बढ़ रहा है। 2024 में भारत के 250 प्रमुख अस्पतालों ने AI‑संचालित इमेजिंग सॉफ्टवेयर को अपनाया, जिससे रोगनिदान में 15 प्रतिशत की कमी आई। इस तकनीक से अल्ट्रासोनोग्राफी, एक्स‑रे और एमआरआई इमेज की व्याख्या तेज़ और अधिक सटीक होती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए ₹1,200 करोड़ का अनुदान दिया, जिससे ग्रामीण अस्पतालों में भी AI का उपयोग संभव हो सके।
डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए 2025 में 5,000 चिकित्सा छात्र और 1,200 नर्सिंग प्रशिक्षु को ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर रोग पहचान और प्रबंधन कौशल को सुदृढ़ करना है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से त्वरित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया, जिससे रोगियों को समय पर उपचार मिल सके।
वित्तीय कवरेज के क्षेत्र में, सरकार ने 2024 में 'स्वास्थ्य बीमा विस्तार योजना' के तहत 30 लाख नई पॉलिसियाँ जारी कीं। इन पॉलिसियों के अंतर्गत, 18 वर्ष से 60 वर्ष के बीच के सभी नागरिकों को वार्षिक प्रीमियम 5,000 रुपये से कम में कवर किया गया। इस पहल से ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा खर्च का बोझ 40 प्रतिशत तक घटा है, जिससे रोगियों को समय पर उपचार लेने में सहायता मिली।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2025 के अनुसार, 68 प्रतिशत रोगियों ने स्वास्थ्य सेवा से संतुष्टि जताई। सर्वेक्षण में पाया गया कि टेलीमेडिसिन और डिजिटल रिकॉर्डिंग ने प्रतीक्षा समय को 30 प्रतिशत घटाया। वहीं, 12 प्रतिशत रोगियों ने अभी भी जाँच के लिए लंबी कतारों का सामना किया, जो शहरी अस्पतालों में अधिक स्पष्ट है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार ने शहरी अस्पतालों में स्टाफ बढ़ाने की योजना बनाई है।
आज इन पहलों के साथ, भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली धीरे-धीरे वैश्विक मानकों के अनुरूप ढाल रही है, जिससे सभी नागरिकों को बेहतर और सुलभ चिकित्सा सेवा मिलेगी।