जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर बढ़ा टकराव, दो आंदोलनकारी नेताओं को 5 दिन की न्यायिक हिरासत; सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई
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नई दिल्ली, (सिटी न्यूज़ मुंबई)
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और प्रदर्शन स्थल पर लगी पाबंदियों को लेकर विवाद गहरा गया है। इस बीच, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। गुरुवार, 15 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनों से संबंधित मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है।
दो आंदोलनकारी नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत
जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बैरिकेड पार कर प्रवेश करने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया है। पार्टी से जुड़े अजिंक्य शिंदे के खिलाफ भी एहतियाती कार्रवाई की गई है।
दिल्ली पुलिस का आरोप है कि 14 अक्टूबर से पहले हुई कार्रवाई के संदर्भ में पार्टी के 14 सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे और उन्होंने कथित तौर पर प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करते हुए पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली। पुलिस ने अतिक्रमण, निषेधाज्ञा के उल्लंघन और शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बंधपत्र की शर्तें तोड़ने जैसे आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है।
हालांकि, आरोपियों के वकील ने पुलिस की कार्रवाई और अदालत में रखे गए तथ्यों पर सवाल उठाए हैं। इस मामले में पुलिस के आरोपों और बचाव पक्ष के दावों को अलग-अलग देखा जाना जरूरी है।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया
दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के जरिए जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया। इसके विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को प्रदर्शन स्थलों के रूप में निर्धारित किया गया है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित अनियमितताएं हुई हैं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची की प्रक्रिया का बचाव किया गया है और कहा गया है कि मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना प्रक्रिया का हिस्सा है।
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाओं में प्रदर्शन के अधिकार और वैकल्पिक स्थलों की व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
10 अक्टूबर को इंटरनेट बंद करने के मामले में केंद्र ने मांगी माफी
10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद करने के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। केंद्र की ओर से बिना शर्त माफी मांगते हुए अदालत से अवमानना नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया गया है।
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने हलफनामे में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया। सरकार के अनुसार, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा निलंबित की गई थी। केंद्र ने अदालत से भविष्य में विशेष परिस्थितियों में वैधानिक प्रावधानों के तहत इंटरनेट निलंबन की अनुमति से संबंधित आदेश में संशोधन करने का भी अनुरोध किया है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान ट्रेन और मेट्रो सेवाओं पर व्यापक पाबंदियों से जुड़े मामले में भी सरकार से जवाब मांगा था।
ट्रेन और मेट्रो सेवाएं बंद करने पर भी विवाद
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। उस दौरान कई मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों के परिचालन पर प्रतिबंधों को लेकर विवाद हुआ। इस कार्रवाई के खिलाफ भी कानूनी सवाल उठाए गए।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान नागरिकों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के औचित्य की न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए। वहीं, सरकार और प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता का हवाला दिया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन
CJP और अन्य प्रदर्शनकारी संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में अनियमितताएं हुई हैं। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं।
इन आरोपों को निर्वाचन आयोग और सरकार की ओर से स्वीकार किए गए निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता। मतदाता सूची में नाम हटाने और पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद का अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर ही तय होगा।
### आज सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
15 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनों से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है। अदालत के सामने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने, इंटरनेट सेवा निलंबित करने और ट्रेन-मेट्रो सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।
अब सबकी नजर अदालत की सुनवाई और दिल्ली पुलिस की आगे की कार्रवाई पर है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, वैकल्पिक स्थलों की व्यवस्था और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर आगे क्या फैसला होता है, यह आने वाले घटनाक्रम में स्पष्ट होगा।