भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहल: राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2024 के प्रमुख बिंदु
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2024 लागू की, जिसमें 2.5 ट्रिलियन रुपये का बजट, प्राथमिक देखभाल सुदृढ़ीकरण, डिजिटल स्वास्थ्य समाधान और AYUSH का एकीकरण शामिल है। यह नीति स्वास्थ्य सेवा की पहुँच, गुणवत्ता और वित्तीय स्थिरता को बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
### भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहल: राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2024 के प्रमुख बिंदु
**परिचय (लगभग 100 शब्द)** भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2024 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (NHP) 2024 को औपचारिक रूप से लागू किया, जिससे स्वास्थ्य सेवा की पहुँच, गुणवत्ता और वित्तीय स्थिरता में सुधार का लक्ष्य रखा गया है। इस नीति में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ करने, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और डिजिटल स्वास्थ्य समाधान को स्केल करने के लिए विस्तृत उपाय शामिल हैं। नीति के प्रमुख बिंदुओं में 2.5 ट्रिलियन रुपये का स्वास्थ्य बजट, आयुर्वेदिक और पारम्परिक चिकित्सा को एकीकृत करना, तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या को 30 प्रतिशत बढ़ाना शामिल है। यह पहल भारत के स्वास्थ्य संकेतकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
**बजट और वित्तीय प्रावधान** नयी नीति के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र को 2.5 ट्रिलियन रुपये का वार्षिक बजट आवंटित किया गया है, जिसमें 40 प्रतिशत राशि सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को दी जाएगी। इस वित्तीय प्रावधान का उद्देश्य मौजूदा अस्पतालों की बुनियादी ढाँचा सुधारना, नई चिकित्सा उपकरणों की खरीद और रोगी सुरक्षा मानकों को उन्नत करना है। साथ ही, सरकार ने निजी निवेशकों को स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने हेतु टैक्स छूट और आसान ऋण सुविधा की घोषणा की है। यह मिश्रित वित्तीय मॉडल सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में सेवा वितरण को संतुलित करने की दिशा में काम करेगा।
**प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का सुदृढ़ीकरण** प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ करने के लिए नीति में 1.5 लाख नई स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना और मौजूदा 150,000 केंद्रों के आधुनिकीकरण की योजना है। इन केंद्रों में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, एम्बुलेंस सेवाओं और लैब सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में डॉक्टर-नर्स अनुपात को 1:1,500 से घटाकर 1:1,000 करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त 10,000 सीटें खोलने और ग्रामीण सेवा अनुदान के माध्यम से युवा चिकित्सकों को आकर्षित करने की रणनीति अपनाई है।
**डिजिटल स्वास्थ्य और AYUSH का एकीकरण** डिजिटल स्वास्थ्य को नीति का अभिन्न हिस्सा माना गया है। इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (EHR) प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत करके रोगी डेटा की सटीकता और उपलब्धता बढ़ाने की योजना है। टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म को 2025 तक सभी राज्य अस्पतालों में लागू किया जाएगा, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ सलाह प्राप्त करना संभव होगा। साथ ही, आयुर्वेद, योग, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा (AYUSH) को मुख्यधारा में लाने के लिए 5,000 करोड़ रुपये का विशेष कोष स्थापित किया गया है, जिससे इन प्राचीन उपचारों को आधुनिक अनुसंधान के साथ संयोजित किया जा सके।
**कार्यान्वयन चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा** नीति के कार्यान्वयन में कई चुनौतियाँ भी सामने हैं। स्वास्थ्य कर्मियों की कमी, बुनियादी ढाँचा की असमानता और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर विशेषज्ञों ने सतर्कता व्यक्त की है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक स्वतंत्र निगरानी बोर्ड स्थापित करने और वार्षिक प्रगति रिपोर्ट जारी करने का प्रस्ताव रखा है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों के साथ सहयोग को बढ़ाकर तकनीकी ज्ञान और फंडिंग प्राप्त करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। यदि इन उपायों को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो अगले पाँच वर्षों में भारत के जीवन प्रत्याशा में 2‑3 वर्ष की वृद्धि और मातृ‑शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी की उम्मीद की जा रही है।