मिरा-भाईंदर में बेकायदा बांधकामों पर मंत्री प्रताप सरनाईक का जबरदस्त हमला: "आमदार मोठा की कायदा?
City News Mumbai••60 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
विधायक नरेंद्र मेहता पर गंभीर आरोप विधायकी तक जा सकती है
मिरा-भाईंदर (सिटीन्यूज मुंबई) महानगरपालिका के नगररचना (टाऊन प्लानिंग) विभाग की कथित लापरवाही और बेकायदा बांधकामों को मंजूरी देने के मामले ने आज एक राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आज विभाग का व्यक्तिगत निरीक्षण करते हुए एक 'नायक' शैली में आक्रामक रुख अपनाया और प्रशासन तथा भ्रष्ट तंत्र पर जमकर निशाना साधा।
न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोप
मामला स्पेशल सिविल सूट नंबर 481/2014से जुड़ा है, जिसमें न्यायालय ने ४ मार्च २०२४ को विवादित जमीन पर 'यथास्थिति' (स्टेटस कोवो) बनाए रखने का स्पष्ट आदेश दिया था। आरोप है कि महानगरपालिका स्वयं इस मामले में पक्षकार होने के बावजूद, नगररचना विभाग ने न्यायालय के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए विवादित स्थल पर बने बेकायदा निर्माण कोबिल्डिंग पूर्णत्व प्रमाणपत्र (सीसी) दे दिया।
आमदार मोठा की कायदा?– मंत्री का तंज
इसी संदर्भ में मंत्री सरनाईक का सीधा निशाना भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता बने। उन्होंने पूछा,आमदार मोठा की कायदा?" यानी क्या विधायक कानून से भी बड़े हैं? न्यायालय की अवमानना करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए मंत्री ने कहा कि अगर आम नागरिकों को हर छोटे-बड़े मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा, तो प्रशासनिक तंत्र का क्या काम है?आगे कहा कि कोई अगर मामला लेकर न्यायालय गया तो विधायकी जा सकतीं है हर जमीन विवाद में नरेंद्र मेहता और ७/११ का नाम आ जाता है ।
मांगें स्पष्ट, कार्रवाई तत्काल
मंत्री सरनाईक ने नगररचना विभाग के सामने कई स्पष्ट मांगें रखीं: 1.वास्तुविशारद की सनद रद्द जोकि नरेंद्र मेहता का भांजा कोठारी। है नियमों के उल्लंघन कर बेकायदा सीसी जारी करने वाले वास्तुविशारद का परवाना तत्काल और स्थायी रूप से रद्द किया जाए। 2. सभी दोषियों पर गुन्हा दर्ज करे संबंधित वास्तुविशारद, भूमि मालिक और बिल्डर सभी के खिलाफ तुरंत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। 3. उच्चस्तरीय जांच:भूमाफियों द्वारा आदिवासी एवं भूमिपुत्रों की जमीन हड़पने और बिल्डर-अधिकारी गठजोड़ की उच्चस्तरीय जांच हो। 4. पुलिस को फाइल सौंपी: मंत्री ने गंभीर सबूतों वाली पूरी फाइल पुलिस उपायुक्त राहुल चव्हाण को सौंप कर जाँच के आदेश दिए।
*राजनीतिक माहौल गर्म*
यह घटना मिरा-भाईंदर की हाल ही में हुई नगर निकाय चुनावों के बाद तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल में आई है, जहां मंत्री सरनाईक और विधायक मेहता के बीच खुली खींचतान देखी गई है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि महापालिका में सरनाईक के समर्थकों ने विभिन्न समाज भवनों और विकास कार्यों के नाम पर आरक्षित जमीन के नियमों में बेकायदा बदलाव कराए हैं।
*भूमिपुत्रों के पक्ष में खड़े मंत्री*
मंत्री सरनाईक ने अपनी इस कार्रवाई को आदिवासी एवं स्थानीय भूमिपुत्रों के हक की लड़ाई से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि महायुती सरकार इन वर्गों के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और आवश्यकता पड़ने पर कानून में भी बदलाव लाएगी ताकि ग्रामीणों को न्याय मिल सके।
*आगे की राह*
इस घटना ने मिरा-भाईंदर के नगर प्रशासन में जमी भ्रष्टाचार एवं लापरवाही के आरोपों पर फिर से रोशनी डाली है। मंत्री की सीधी और आक्रामक पहल से यह उम्मीद जगी है कि दोषी अधिकारियों और बिल्डरों के खिलाफ जल्द कानूनी कार्रवाई होगी, और आम नागरिकों को न्याय मिलेगा। हालांकि, इससे स्थानीय राजनीति में नई टकराव की स्थिति भी पैदा हो गई है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।