"राजनीति का यह किसका खेल......? चेहरों पर लोकतंत्र, हाथ में केवल माचिस की पेटी"....!
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रविवार विशेष लेख.... एक कठोर टिप्पणी.. (अनंत मनोहर नलावडे. 7738497259)
पिछले सप्ताह मंगलवार की मंत्रिमंडल बैठक को "डांडी" मारते हुए फिर से शिवसेना के मुख्य नेता, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की दिल्ली यात्रा, मनसे युवा नेता अमित ठाकरे का गुस्सा, मोदी की तस्बीर से भड़कता राजनैतिक माहौल और उसके बाद के आरोप-प्रत्यारोप... एक हफ्ते में महाराष्ट्र ने राजनीति के कई रंग देखे। लेकिन सवाल यही है कि जनता के प्रश्नों की तुलना में अब नेताओं को आपस में टकराव करने में अधिक रुचि है या नहीं... इसका.....?
वास्तव में राजनीति में हमेशा मतभेद होते हैं, संघर्ष होता है, आरोप-प्रत्यारोप भी होते हैं। लेकिन जब जनता के मूलभूत प्रश्नों की तुलना में राजनीतिक अहंकार बड़ा हो जाता है, तो लोकतंत्र की कसौटी परखा जाता है। पिछले सप्ताह महाराष्ट्र में हुई ऐसी ही कुछ घटनाओं ने वही सवाल फिर से मंच पर लाया है। क्योंकि एक ओर सत्ता के केंद्र में होने वाली हलचल, दूसरी ओर छात्रों के भोजन के थाल से शुरू हुआ राजनीतिक विवाद और उससे सीधे पक्षीय संघर्ष तक पहुँचने वाला माहौल, इन सब ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक दर्पण दिखाया है।
शिवसेना के मुख्य नेता तथा उपमुख्यमंत्री और महायुती सरकार के एक मुख्य नेता एकनाथ शिंदे का अचानक दिल्ली जाना, वह भी मंत्रिमंडल बैठक छोड़कर, राजनीतिक चर्चा की चिंगारी बन गया। अब नेताओं की दिल्ली यात्रा कुछ नया नहीं है। लेकिन ऐसी मुल