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भारत में प्रौद्योगिकी का तेज़ विकास: AI, 5G और डिजिटल बुनियादी ढांचा
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भारत में प्रौद्योगिकी का तेज़ विकास: AI, 5G और डिजिटल बुनियादी ढांचा

City News Mumbai•24 सितंबर 2026 को 03:53 am बजे•0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

डिजिटल इंडिया पहल के तहत भारत ने AI, 5G और चिप निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति की है। सरकारी नीतियों, निवेश और स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम ने इस बदलाव को गति दी, जबकि डिजिटल असमानता और डेटा सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान जारी है।

पिछले दस वर्षों में भारत ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति देखी है। सरकार की 'डिजिटल इंडिया' पहल, निजी निवेश और स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम ने मिलकर देश को AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और 5G नेटवर्क जैसी उन्नत तकनीकों के अपनाने में अग्रणी बना दिया है। 2023 में भारत ने 1.2 करोड़ नए इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को जोड़ा, जबकि 2024 की पहली तिमाही में 5G कवरेज 35 प्रतिशत राज्यों में उपलब्ध हो गया। इस तेज़ी से बढ़ते डिजिटल बुनियादी ढांचे ने शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों में परिवर्तन को गति दी है। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के तहत शहरों में IoT सेंसर की तैनाती और ई‑गवर्नेंस प्लेटफ़ॉर्म की विस्तृत कार्यवाही ने नागरिक सेवाओं को तेज़ और पारदर्शी बनाया है। इसके अतिरिक्त, भारत में AI‑आधारित स्टार्ट‑अप्स की संख्या 2022 में 4,500 से बढ़कर 2024 में 7,200 हो गई, जिससे रोजगार और नवाचार दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

2023 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति (NAAI) को आधिकारिक रूप से लागू किया, जिसका उद्देश्य AI‑संचालित समाधान को स्वास्थ्य, कृषि और वित्तीय सेवाओं में एकीकृत करना है। इस नीति के तहत 2024 तक 150 मिलियन डेटा सेट को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने, 200 AI‑सेंटर की स्थापना और 10,000 विशेषज्ञों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। भारतीय संस्थानों ने अब मशीन लर्निंग, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण और कंप्यूटर विज़न में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध पत्रों की संख्या में 30 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है।

टेलीकॉम कंपनियों ने 2024 के मध्य तक 5G सेवा को 20 प्रमुख शहरों में शुरू किया, जिसमें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद प्रमुख हैं। इस चरण में 3.5 GHz स्पेक्ट्रम बैंड के 1,200 MHz आवंटन के साथ 5G बेस स्टेशन की संख्या 12,000 तक पहुंच गई। तेज़ डेटा ट्रांसफ़र गति ने ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) आधारित शिक्षा तथा औद्योगिक ऑटोमेशन को नई संभावनाएँ प्रदान की हैं। नियामक ने 2025 तक ग्रामीण क्षेत्रों में 5G कवरेज को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की दिशा में विशेष सब्सिडी योजना प्रस्तुत की है।

चिप निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत ने 2023 में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC) योजना को 25 बिलियन रुपये की प्रारंभिक निधि के साथ शुरू किया। इस पहल के तहत गुड़गांव, अहमदाबाद और चेन्नई में तीन नई फाउंड्री स्थापित की गईं, जिनमें 7 नैनोमीटर प्रक्रिया तकनीक का उपयोग किया जाएगा। 2024 के अंत तक इन फाउंड्री की वार्षिक उत्पादन क्षमता 1.5 मिलियन सिलिकॉन वेफ़र तक पहुँचने की अनुमानित है, जिससे आयात पर निर्भरता में 40 प्रतिशत की कमी आएगी।

प्रौद्योगिकी के तेज़ विकास के बावजूद डिजिटल असमानता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार 2023 में ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच केवल 42 प्रतिशत थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 78 प्रतिशत तक पहुंच गई। डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के मुद्दे भी बढ़ते उपयोग के साथ उभरे हैं; 2024 में व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (PDPA) के मसौदे को संसद ने अंतिम रूप दिया, जिसमें उपयोगकर्ता की सहमति और डेटा ब्रीच रिपोर्टिंग के प्रावधान शामिल हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीति समर्थन, निवेश और कौशल विकास को संतुलित रूप से लागू किया गया, तो भारत 2030 तक विश्व के शीर्ष तीन डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में स्थान प्राप्त कर सकता है। आगामी पाँच वर्षों में क्लाउड सेवा बाजार का आकार 150 बिलियन डॉलर तक बढ़ने की संभावना है, जबकि स्वचालित वाहन और क्वांटम कंप्यूटिंग में शुरुआती प्रयोग भी शुरू हो रहे हैं। इस प्रकार, प्रौद्योगिकी का सतत विकास न केवल आर्थिक वृद्धि को तेज करेगा, बल्कि सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय स्थिरता में भी योगदान देगा।
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