धाड़ी का दंका बड़ा... अब ‘FDA’ के घर में भी ‘आरसा’ चाहिए!
City News Mumbai••25 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
क्योंकि खाद्य सुरक्षा के मामले में ग्राहक को ब्रांड नहीं, बल्कि सुरक्षा की गारंटी चाहिए।
धारी के फोटो दिखाई देते हैं; प्रयोगशाला के अंतिम परिणाम क्यों नहीं दिखने चाहिए?
मुंबई (सिटी न्यूज मुंबई अनंत नलावडे) वास्तव में भोजन में मिलावट करने वालों पर सख्त कार्रवाई चाहिए; दवाओं की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं चलना चाहिए। लेकिन दंड जितना कठोर, उतनी ही उसकी गणना पारदर्शी होनी चाहिए; क्योंकि ‘FDA’ जनता के स्वास्थ्य की प्रहरी प्रणाली है। यह केवल आयुक्त मुंढे नहीं, बल्कि राज्य सरकार को भी याद रखना चाहिए।
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रोज़ सुबह उठने से लेकर रात को आराम से सोने तक, खाने की थाली से लेकर दवा की गोली तक, हर चीज़ नागरिकों के जीवन से जुड़ी हुई है। इसलिए खाद्य व औषध प्रशासन को देखने का दृष्टिकोण अन्य सरकारी विभागों से अलग होता है। यहाँ कोई फाइल रुक जाए तो परेशानी होती है; लेकिन अगर भोजन दूषित रहे या दवा की गुणवत्ता गिर जाए तो उसकी कीमत सीधे स्वास्थ्य को चुकानी पड़ सकती है। यह जोखिम सभी को समझना चाहिए।
इसी पृष्ठभूमि पर खाद्य व औषध प्रशासन के आयुक्त तथा विभाग के सचिव, और लगातार विवादास्पद रहे आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने पदभार संभालने के बाद शुरू की गई धड़क कार्रवाई ने राज्यभर का ध्यान आकर्षित किया है। ‘रॉयटर्स’ इस विश्व स्तर पर प्रसिद्ध समाचार संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, मई २०२६ से राज्य में ३ हजारों से अधिक धाड़ी जारी की गई हैं। बड़े खाद्य श्रृंखलाओं से लेकर स्थानीय खाद्य संस्थानों तक जांच और कार्रवाई का विस्तार हुआ है, ऐसा भी रिपोर्ट है।
जहाँ मिलावट है, वहाँ कठोर कार्रवाई का स्वागत होना चाहिए। लेकिन अब इस अभियान के अगले चरण की ओर देखने का समय आ गया है। क्योंकि धाड़ ही कार्रवाई की शुरुआत है; अंत नहीं!
धाड़ हुई। नमूने लिये गए। सामान जब्त हुआ। नोटिस जारी की गई। परवाना निलंबित किया गया।
पर आगे क्या?
नमूना प्रयोगशाला में क्या निकला? दोष सिद्ध हुआ क्या? अंतिम आदेश क्या था? जुर्माना कितना हुआ? परवाना रद्द हुआ क्या? संस्थान ने त्रुटियों को सुधारा क्या? पुनः परीक्षण हुआ क्या?
यदि ये प्रश्न अनुत्तरित रहेंगे तो हजारों धाड़ी का आंकड़ा बड़ा दिखेगा; लेकिन उससे निर्मित स्थायी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत हुई, यह समझ नहीं पाएंगे।
कानूनी दंड आवश्यक है; लेकिन वह नियमों की सीमा में ही होना चाहिए!
‘Food Safety and Standards Act, 2006’ के तहत खाद्य व्यवसायों के लिए परवाना या पंजीकरण की व्यवस्था है। स्वच्छता, भंडारण, लेबलिंग, भोजन संभालना और सुरक्षा संबंधी नियमों की भी स्पष्ट वैधानिक रूपरेखा है।
अतः किसी खाद्य व्यवसाय पर नियम उल्लंघन के लिए कार्रवाई करना अधिकारी का उपकार नहीं; वह कानून की जिम्मेदारी है। इसलिए ‘कठोर कार्रवाई क्यों करें?’ यह प्रश्न ही गलत हो सकता है।
परन्तु इस में असली प्रश्न अलग है।
कठोर कार्रवाई का मानदंड सभी के लिए समान है क्या?
भले बड़ा मॉल हो या छोटी हाथगाड़ी। फाइव स्टार होटल हो या सड़क के खाद्य विक्रेता। मान्यता प्राप्त ब्रांड हो या स्थानीय उत्पादक। कानून का माप एक ही होना चाहिए।
क्योंकि खाद्य सुरक्षा के मामले में ग्राहक को ब्रांड नहीं, बल्कि सुरक्षा की गारंटी चाहिए।