महाराष्ट्र के लिए ‘वैश्विक कार्यबल गतिशीलता नीति २०२६’ घोषित
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देशव्यापी ‘स्किल पासपोर्ट’, अद्यतित प्रशिक्षण और सुरक्षित भर्ती प्रक्रिया पर जोर
मुंबई, दिनांक २१ (सिटी न्यूज मुंबई)
महाराष्ट्र के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने ‘वैश्विक कार्यबल गतिशीलता नीति २०२६’ घोषित की है। विभिन्न देशों में मौजूद कुशल मानव संसाधन की मांग को ध्यान में रखते हुए देश‑विशिष्ट ‘स्किल पासपोर्ट’ तैयार करना, प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रमों को अद्यतन करना तथा विदेश में रोजगार के लिए सुरक्षित और नैतिक भर्ती व्यवस्था विकसित करने पर सरकार का जोर रहेगा।
सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित अंतरराष्ट्रीय श्रमिक गतिशीलता पर उच्चस्तरीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मार्गदर्शन दिया। महाराष्ट्र ट्रांसफॉर्मेशन इंस्टीट्यूट (मित्रा), राजशिष्टाचार विभाग, कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार विभाग तथा महाराष्ट्र एजेंसी फॉर होलिस्टिक इंटरनेशनल मोबिलिटी एंड एडवांसमेंट (महिमा) के संयुक्त प्रयास से इस सम्मेलन का आयोजन किया गया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि विश्वभर में जनसंख्या में बदलाव और बढ़ती वृद्धावस्था के कारण कुशल मानव संसाधन की मांग बड़े पैमाने पर बढ़ रही है। भारत के युवा मानव संसाधन की क्षमता को ध्यान में रखते हुए वैश्विक बाजार की मांग के साथ महाराष्ट्र की कौशलों का प्रभावी समन्वय करना आवश्यक है। इसलिए ‘सर्कुलर मोबिलिटी ऑफ टैलेंट’ की अवधारणा को और सक्षम करने के लिए महाराष्ट्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
२८ देशों के साथ श्रमिक गतिशीलता संबंधी समझौते
भारत ने लगभग २८ देशों के साथ श्रमिक गतिशीलता संबंधी समझौते किए हैं। इन देशों में इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, निर्माण तथा विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की बड़ी मांग है।
वैश्विक आर्थिक मंच के ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट २०२५’ के अनुसार, २०३० तक विश्वभर में लगभग १७ करोड़ नए रोजगार सृजित होने का अनुमान है, जबकि लगभग ९ करोड़ २० लाख रोजगार विस्थापित हो सकते हैं। इस पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र अंतरराष्ट्रीय कार्यबल गतिशीलता के क्षेत्र में पहल करने वाला है, यह मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा।
विभिन्न देशों के मानव संसाधन की मांग की जानकारी प्रशिक्षण संस्थाओं तक पहुँचाने के लिए भर्ती संस्थाओं के अनुभव का उपयोग करने की सलाह उन्होंने दी। पारंपरिक प्रशिक्षण के साथ डिजिटल और प्रत्यक्ष प्रशिक्षण का मिश्रित उपयोग, ऑनलाइन भाषा प्रशिक्षण के लिए निश्चित अवधि और न्यूनतम परीक्षण तथा डिजिटल अनुवाद एवं इंटरप्रिटेशन उपकरणों के उपयोग के निर्देश भी दिए गए।
राज्य सरकार की नीति में कौशल विकास, वैश्विक मांग के अनुसार प्रशिक्षण, भाषा प्रशिक्षण, प्रमाणपत्र, दस्तावेज़ों के लिए सहायता और प्रस्थानपूर्व मार्गदर्शन को प्राथमिकता दी गई है। विदेश से लौटे कुशल मानव संसाधन को महाराष्ट्र के उद्योगों से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।
युवाओं के भाषा प्रशिक्षण हेतु समझौता
महाराष्ट्र के युवाओं को विदेश में रोजगार के अवसर अधिक सुगम बनाने और भाषा बाधाओं को दूर करने के लिए डिजिटल इंडिया, मित्रा और महिमा के बीच एक समझौता किया गया। अनुवाद प्रौद्योगिकी के माध्यम से उम्मीदवारों को विदेशी तथा व्यावसायिक भाषाओं का मुफ्त प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
इस पायलट परियोजना का लाभ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और तंत्रनिकेतन के छात्रों को मिलेगा।
राजशिष्टाचार मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय श्रमिक गतिशीलता केवल मानव संसाधन प्रवास की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि कौशल, निवेश, प्रवासी भारतीय समुदाय और वैश्विक बाजार को जोड़ने वाली आर्थिक साझेदारी है।
कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने कहा कि वैश्विक रोजगार के लिए आवश्यक कौशल और भाषा प्रशिक्षण के साथ-साथ संबंधित देश की स्थानीय संस्कृति के साथ समरस होने के लिए भी छात्रों को सक्षम किया जाएगा।
इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के दूतावास, ‘मित्रा’ के अधिकारी, केंद्रीय कौशल विकास विभाग के अधिकारी, राष्ट्रीय कौशल बोर्ड के प्रतिनिधि तथा अंतरराष्ट्रीय रोजगार संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।