मीरा-भाईंदर मनपा महासभा मारपीट प्रकरण: 16 नगरसेवकांवर FIR दाखल, सामाजिक कार्यकर्त्याने मारपीट व धमकीचे आरोप लावले
City News Mumbai••184 व्ह्यूज•5 मिनिट वाचा
मीरा-भाईंदर, दि. 16 ऑक्टोबर (सिटी न्यूज़ मुंबई)
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका की महासभा के दौरान प्रेक्षक गैलरी में हुए विवाद ने अब कानूनी रूप ले लिया है। इस घटना को लेकर सामने आए पुलिस के प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दस्तावेज में सामाजिक कार्यकर्ता करण तानाजी पवार की शिकायत दर्ज है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि महासभा के लाइव प्रसारण और मोबाइल से शूटिंग करने के मुद्दे पर विवाद के दौरान कुछ नगरसेवकों तथा अन्य लोगों ने उनके साथ मारपीट की, गाली-गलौज की और धमकियां दीं। शिकायत में पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी उल्लेख है।
पुलिस दस्तावेज के अनुसार, शिकायत 16 अक्टूबर 2026 की है। शिकायतकर्ता करण तानाजी पवार की उम्र 25 वर्ष बताई गई है। उन्होंने खुद को कराटे ट्रेनर और सामाजिक कार्यकर्ता बताया है। FIR में घटना के संबंध में विस्तृत बयान दर्ज किया गया है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता के अनुसार, वह मीरा-भाईंदर क्षेत्र में सामाजिक कार्य करते हैं और सड़क, अनधिकृत निर्माण तथा नागरिक समस्याओं जैसे मुद्दों पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रकाशित करते हैं। उनका दावा है कि महानगरपालिका की महासभा का लाइव प्रसारण करने और प्रेक्षक गैलरी में शूटिंग करने पर रोक के संबंध में उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी का हवाला दिया था।
शिकायत के मुताबिक, 16 अक्टूबर को दोपहर करीब 2 बजे से 2:30 बजे के बीच महानगरपालिका के तीसरे तल पर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह की सार्वजनिक प्रेक्षक गैलरी में विवाद हुआ। शिकायतकर्ता का कहना है कि वहां मौजूद लोगों को मोबाइल से शूटिंग करने से रोकने के मुद्दे पर विवाद बढ़ा।
तरुण शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधियों पर आरोप
FIR में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नगरसेवक एडवोकेट तरुण शर्मा सहित कई नगरसेवकों और अन्य लोगों ने उनके तथा उनके साथ मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। शिकायत में कुछ लोगों पर गाली-गलौज करने और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उनके हाथ पर चोट लगी और तरुण शर्मा ने उनके निजी अंग पर मुक्का मारा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगरसेविका रुपाली मोदी ने चप्पल फेंककर मारी। शिकायत में अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ भी मारपीट किए जाने का दावा किया गया है।
ये सभी आरोप शिकायतकर्ता के बयान पर आधारित हैं। संबंधित जनप्रतिनिधियों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी उल्लेख
शिकायत में पत्रकार जतिन ददीच और मयूर ठाकुर सहित अन्य पत्रकारों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, घटना की रिकॉर्डिंग रोकने के उद्देश्य से एक पत्रकार का मोबाइल छीनकर जमीन पर पटक दिया गया। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को घटना के दौरान धमकाया गया।
इसी विवाद के बाद पत्रकारों ने महानगरपालिका मुख्यालय के गेट पर धरना-प्रदर्शन किया था। पत्रकारों के विरोध और मामले की गंभीरता को देखते हुए उपमहापौर ध्रुवकिशोर पाटिल तथा स्थायी समिति के सभापति हसमुख गेलोत ने मध्यस्थता की थी। इसके बाद नगरसेवक एडवोकेट तरुण शर्मा और नगरसेविका शानू गोयल ने पत्रकारों के सामने माफी मांगी थी। यह घटनाक्रम अलग से सामने आए विवरणों पर आधारित है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच अधिकारी नियुक्त
दस्तावेज के छठे पृष्ठ पर पुलिस कार्रवाई वाले हिस्से में मामला दर्ज कर जांच शुरू करने का उल्लेख है। इसमें जांच अधिकारी के रूप में निरीक्षक महेंद्रसिंह संभाजीराव का नाम दर्ज दिखाई देता है।
FIR में जिन व्यक्तियों के नाम शिकायतकर्ता ने लिए हैं, उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच होना बाकी है। केवल FIR में नाम दर्ज होने से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता।
महासभा की लाइव कवरेज पर फिर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने मीरा-भाईंदर महानगरपालिका की महासभा में पत्रकारों और नागरिक प्रेक्षकों की कवरेज के अधिकार, मोबाइल से रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
यदि महासभा में रिकॉर्डिंग पर कोई प्रतिबंध लागू है, तो उसके लिखित आदेश और कानूनी आधार को स्पष्ट करना जरूरी है। वहीं, कवरेज के दौरान मारपीट या धमकी के आरोप सामने आने पर निष्पक्ष जांच और सभी संबंधित पक्षों का बयान दर्ज करना भी महत्वपूर्ण है।
सिटी न्यूज़ मुंबई का पक्ष: महासभा में हुई घटना, दर्ज शिकायत और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद कैसे शुरू हुआ, किन लोगों की क्या भूमिका थी और किन आरोपों की पुष्टि होती है।
FIR में इन नगरसेवकों के नामों का उल्लेख, शिकायतकर्ता ने लगाए मारपीट के आरोप
पुलिस को दिए गए बयान में शिकायतकर्ता करण तानाजी पवार ने कई नगरसेवकों और भाजपा के एक पदाधिकारी पर आरोप लगाए हैं। दस्तावेज में निम्न नामों का उल्लेख दिखाई देता है:
1. शानू गोहिल 2. तरुण सुभाष शर्मा।3. रुपाली मोदी 4. प्रीति जैन 5. वंदना भावसार 6. हेतल परमार 7. विशाल पाटिल।8. संजय थरवे 9. नवीन सिंह 10. कविता त्रिपाठी 11. दीपिका अरोरा 12. महेश म्हात्रे 13. भरत कोठारी 14. हेमा बेलाणी 15. योगिता शर्मा 16. मनीष पराशर 17. प्रितेश शाह — शिकायतमध्ये भाजपा कार्यकर्ता म्हणून उल्लेख
शिकायतदाराने आरोप लावला आहे की महासभेत लाइव्ह प्रसारण व मोबाइलद्वारे व्हिडिओ रेकॉर्डिंगच्या मुद्द्यावर वादाच्या दरम्यान काही जनप्रतिनिधी व इतर लोकांनी त्यांच्यासोबत व त्यांच्या सोबत उपस्थित सामाजिक कार्यकर्त्यांसोबत धक्का-मुक्की, मारपीट व गाली-गलौज केली. त्यांनी हेही आरोप लावले की त्यांना धमक्या दिल्या गेल्या.
शिकायतमध्ये आरोप आहे की वादाच्या दरम्यान काही पत्रकारांशीही दुर्व्यवहार झाला आणि त्यांच्या मोबाइल फोनला नुकसान पोहोचवले गेले. शिकायतदाराने संबंधित व्यक्तींच्या विरोधात कारवाईची मागणी केली आहे.
महत्त्वपूर्ण स्पष्टीकरण या नावे शिकायतदाराच्या विधानात नोंदवलेली आहेत. FIR मध्ये नावे येणे म्हणजे अपराध सिद्ध होणे नाही. संबंधित व्यक्तींचा पक्ष व पोलिस तपासणीचे निष्कर्ष समोर येण्याच्या नंतरच आरोपांची पुष्टी होऊ शकते.