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भिवंडी में साइजिंग उद्योग पर संकट, 8 नवंबर से अनिश्चितकालीन बंदी

शेख2 मिनट में पढ़ें

मंदी, कच्चे माल की महंगाई और बढ़ती उत्पादन लागत से कारोबार बेहाल; एक सप्ताह बाद होगी समीक्षा, पावरलूम उद्योग पर भी पड़ेगा असर

सिटी न्यूज़ मुंबई/गनी खान

भिवंडी के कपड़ा उद्योग में छाई मंदी का असर अब साइजिंग उद्योग पर भी गहराने लगा है। कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि, कुशल मजदूरों की कमी, कर्मचारियों के वेतन में भारी बढ़ोतरी और सरकारी विभागों के निर्देशों का पालन करने की बढ़ती लागत ने साइजिंग कारोबार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच भिवंडी के साइजिंग उद्योग ने 8 नवंबर 2026 से अनिश्चितकालीन बंदी का फैसला लिया है।

इस संबंध में 6 नवंबर को भिवंडी साइजिंग वेलफेयर एसोसिएशन की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में साइजिंग उद्योग से जुड़े सदस्य और प्रतिनिधि मौजूद रहे। उद्योग की मौजूदा परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा के बाद एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से बंदी का निर्णय लिया।

8 नवंबर सुबह 7 बजे से बंद होंगी साइजिंग इकाइयां

एसोसिएशन के निर्णय के अनुसार, भिवंडी की सभी साइजिंग इकाइयां 8 नवंबर 2026 की सुबह 7 बजे से अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेंगी। बंदी के एक सप्ताह बाद एसोसिएशन की पुनः बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें उद्योग की स्थिति की समीक्षा के साथ साइजिंग के दरों में बढ़ोतरी और बंदी को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

एसोसिएशन का कहना है कि सकारात्मक समाधान निकलने के बाद उद्योग दोबारा शुरू किया जाएगा। इस दौरान सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए अनुमन्य ईंधन, यानी कोयला अथवा बायोफ्यूल के इस्तेमाल को सुनिश्चित किया जाएगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष और बिंदु साइजिंग के मालिक अजय यादव ने यह जानकारी दी।

साइजिंग बंद होने से पावरलूम पर पड़ेगा असर

साइजिंग कपड़ा उत्पादन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें धागे को मजबूत और चिकना बनाने के लिए उस पर स्टार्च अथवा विशेष रसायनों का घोल चढ़ाया जाता है। इससे बुनाई के दौरान धागा बार-बार टूटने से बचता है और उसकी रगड़ सहने की क्षमता बढ़ती है। साइजिंग के बाद पावरलूम पर कपड़ा बुनना आसान हो जाता है तथा उत्पादन बेहतर होता है।

ऐसे में साइजिंग उद्योग की अनिश्चितकालीन बंदी का सीधा असर पावरलूम कारखानों पर पड़ने की आशंका है। यदि बंदी लंबी खिंचती है, तो कपड़ा उत्पादन प्रभावित होने के साथ उद्योग से जुड़े अन्य कारोबारियों और मजदूरों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।

शेख

संस्थापक और मुख्य संपादक | सिटी न्यूज़ मुंबई

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