2.92 करोड़ का बाजार वसूली ठेका फेल, अब पालिका की सीधी वसूली पर सवाल
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ठेका छह महीने में छोड़कर गई कंपनी; फुटपाथ से बड़े स्टॉल तक बाजार टैक्स वसूली का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
सिटी न्यूज़ मुंबई/गनी खान
भिवंडी निजामपुर महानगरपालिका के मार्केट विभाग में बाजार टैक्स वसूली की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। करीब 2.92 करोड़ रुपये सालाना का बाजार वसूली ठेका लेने वाली कंपनी के काम छोड़ने के बाद अब पालिका द्वारा सीधे वसूली किए जाने की बात सामने आई है। इसी बीच वसूली की निगरानी और पालिका के खजाने में जमा होने वाली रकम को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
पूर्व में ‘पेस्ट कंट्रोल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ को करीब 2.92 करोड़ रुपये वार्षिक पर बाजार वसूली का ठेका दिया गया था। कंपनी द्वारा फुटपाथ विक्रेताओं से 15 रुपये, हाथगाड़ी चालकों से 30 रुपये और बड़े स्टॉल से 60 रुपये प्रतिदिन बाजार टैक्स वसूलने की व्यवस्था थी। बताया जाता है कि घाटे का हवाला देते हुए कंपनी करीब छह महीने बाद वसूली का काम छोड़कर चली गई, जिसके बाद पालिका ने ठेका रद्द कर दिया। ठेका समाप्त होने के बाद मार्केट विभाग द्वारा स्वयं वसूली किए जाने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कर्मचारियों की कमी के कारण वसूली के लिए निजी मनुष्यबल का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, विभाग प्रमुख स्नेहल पुण्यार्थी ने मोबाइल पर संपर्क किए जाने पर स्पष्ट किया कि वसूली के लिए किसी निजी व्यक्ति को नहीं लगाया गया है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि पालिका की मौजूदा व्यवस्था में प्रतिदिन कितनी बाजार टैक्स वसूली हो रही है और कितनी रकम पालिका के खाते में जमा हो रही है, तो इसका स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया। यही इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है। जब निजी कंपनी को सालाना 2.92 करोड़ रुपये के ठेके पर बाजार वसूली दी गई थी, तो अब पालिका सीधे वसूली कर रही है तो प्रतिदिन कितनी रकम वसूल हो रही है? कितनी राशि मनपा के खाते में जमा हो रही है और वसूली की निगरानी किस अधिकारी के जिम्मे है? फुटपाथ विक्रेताओं, हाथगाड़ी चालकों और छोटे-बड़े दुकानदारों से वसूली होने के कारण रोजाना बड़ी संख्या में लेन-देन होता है। ऐसे में वसूली की रसीद, दैनिक जमा रकम और संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही का रिकॉर्ड पारदर्शी होना जरूरी है। स्थानीय नागरिकों ने बाजार टैक्स वसूली की पूरी व्यवस्था की जांच करने के साथ दैनिक वसूली और पालिका खाते में जमा होने वाली रकम का लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे वसूली व्यवस्था को लेकर उठ रहे संदेह दूर होंगे और वास्तविक राजस्व की तस्वीर भी सामने आएगी।
अब देखना यह है कि मार्केट विभाग इस वसूली का दैनिक आंकड़ा और जमा रकम का विवरण सार्वजनिक करता है या नहीं।