भारत की स्वास्थ्य नीति में डिजिटल परिवर्तन और चुनौतियाँ
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
भारत की स्वास्थ्य नीति में डिजिटल परिवर्तन, टेलीमेडिसिन और टीकाकरण के प्रयासों के बावजूद, स्वास्थ्य कर्मी और बुनियादी ढांचे की कमी प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
भारत की स्वास्थ्य प्रणाली परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जहां 2024 में सरकार ने स्वास्थ्य खर्च को जीडीपी के 4.5% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस प्रयास का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोगियों को बेहतर देखभाल उपलब्ध कराना है। हाल ही में जारी 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2024' के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ने की योजना है, जिससे निदान और उपचार प्रक्रियाएं अधिक सटीक और समय पर हों। साथ ही, टेलीमेडिसिन सेवाओं के विस्तार से दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहुँच बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इन परिवर्तनों के बावजूद, स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और कर्मियों की कमी अभी भी प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र 2023 के आंकड़ों के अनुसार, कुल स्वास्थ्य व्यय लगभग ₹3.6 ट्रिलियन रहा, जो कि वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। इस खर्च का 60% सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा वहन किया जाता है, जबकि 40% निजी क्षेत्र और व्यक्तिगत खर्चों से आता है। 2023 में देश में लगभग 1.5 मिलियन चिकित्सक पंजीकृत थे, परंतु ग्रामीण इलाकों में प्रति 10,000 लोगों पर केवल 3.2 डॉक्टर उपलब्ध थे, जो राष्ट्रीय मानक से कम है।
सरकार ने 'डिजिटल हेल्थ इनिशिएटिव 2024' के अंतर्गत 5,000 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (EHR) प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, 2024 के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को 2% अधिक फंडिंग देने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी। यह पहल रोगी के डेटा को सुरक्षित रखने के साथ-साथ, चिकित्सकों को वास्तविक समय में रोगी इतिहास तक पहुँच प्रदान करेगी।
हालांकि नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं, परंतु स्वास्थ्य कर्मियों की कमी एक गंभीर बाधा बनी हुई है। 2023 में केवल 1.2% डॉक्टरों ने महिला-प्रधान क्षेत्रों में सेवा दी, जबकि 78% पुरुष डॉक्टर शहरी केंद्रों में कार्यरत थे। इसके अलावा, अस्पतालों में वार्ड क्षमता 2023 में 15% घट गई, जिससे रोगी प्रतीक्षा समय में वृद्धि हुई। सरकार ने इन समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया, लेकिन इसके प्रभाव को देखने में अभी एक वर्ष का समय लगेगा।
टेलीमेडिसिन और एआई आधारित निदान उपकरणों के उपयोग से रोग निदान की गति में 30% की वृद्धि हुई है, जैसा कि 2024 के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चलता है। इसके अतिरिक्त, मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से रोगियों को दवाओं की याद दिलाने वाली सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे दवा पालन दर में 18% सुधार हुआ है। ये नवाचार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बना रहे हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में, सरकार ने 2025 तक टीकाकरण कवरेज को 95% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 10,000 नए टीकाकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं, और मोबाइल टीकाकरण टीमों को ग्रामीण इलाकों में भेजा गया है। साथ ही, खाद्य सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने के लिए नई नीतियाँ लागू की गई हैं, जिससे खाद्यजनित रोगों में 12% की कमी अपेक्षित है।
इन सभी प्रयासों के बावजूद, भारत को स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में समानता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर नवाचार और निवेश की आवश्यकता बनी हुई है।