भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन और नीति सुधार: 2025 तक प्राथमिक देखभाल में 30% वृद्धि का लक्ष्य
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
डिजिटल स्वास्थ्य पहल, नई निधि और सार्वजनिक-निजी साझेदारी से भारत की स्वास्थ्य सेवा में व्यापक सुधार हो रहा है, जिसमें 2025 तक ग्रामीण प्राथमिक केंद्रों में 30% वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
भारत में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली ने पिछले दशक में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे हैं, जिनमें डिजिटल स्वास्थ्य पहल, सार्वजनिक-निजी साझेदारी, और रोग नियंत्रण में नई तकनीकों का समावेश शामिल है। सरकार ने 2023 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (NHSS) लॉन्च की, जिसका उद्देश्य 2025 तक ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या को 30% बढ़ाना है। साथ ही, आयुर्विज्ञान में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए 2024 में नई निधि व्यवस्था लागू की गई, जिससे कैंसर और हृदय रोगों के उपचार में प्रगति की उम्मीद है। इन पहलों ने स्वास्थ्य सेवा की पहुँच और गुणवत्ता दोनों को सुधारने का लक्ष्य रखा है। 2022-2024 के बीच, भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक व्यय को 4.5% जीडीपी से बढ़ाकर 5.2% करने की योजना घोषित की। इस योजना के तहत 2023 में 12,000 नई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) का निर्माण शुरू हुआ, जिससे ग्रामीण इलाकों में प्रति 10,000 जनसंख्या पर उपलब्ध सुविधाएँ दो गुना हो गईं। साथ ही, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम ने टाइफ़ाइड, डेंगू और जलजनित रोगों के लिए व्यापक स्क्रीनिंग अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप 2024 में इन रोगों की रिपोर्टिंग में 18% की कमी आई। डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड (EHR) के कार्यान्वयन को तेज करने के लिए 2023 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सूचना नेटवर्क (NHIN) स्थापित किया गया। इस नेटवर्क के माध्यम से 2024 के अंत तक 70% सरकारी अस्पतालों ने इलेक्ट्रॉनिक रोगी डेटा को क्लाउड पर सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया। टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार भी प्राथमिक स्तर पर हुआ, जहाँ 2024 में 2,500 ग्रामीण क्लिनिकों ने वीडियो परामर्श के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों से जुड़ाव स्थापित किया, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में रोगी यात्रा लागत में 35% की कमी आई। इन प्रगति के बावजूद, स्वास्थ्य कार्यबल में कमी एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है। 2024 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने 1.2 लाख नई नर्सों और 45,000 डॉक्टरों की भर्ती को प्राथमिकता दी, लेकिन अभी तक केवल 68% पद भर पाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता में अंतर बना हुआ है, जिससे जटिल मामलों में रोगियों को शहरों में रेफ़र करना पड़ता है। इस अंतर को पाटने के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी के तहत मोबाइल हेल्थ यूनिट्स को 2025 में 1,200 इकाइयों तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। भविष्य की दिशा में, 2025-2030 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में रोग रोकथाम और स्वास्थ्य प्रोत्साहन पर अधिक जोर दिया गया है। नीति दस्तावेज़ में स्वस्थ आहार, शारीरिक गतिविधि और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों और कार्यस्थलों में नियमित स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य किया गया है। साथ ही, निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने के लिए 2025 में स्वास्थ्य बीमा कवरेज को 80% तक बढ़ाने की योजना है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल मिल सके। इन सामरिक कदमों के समुचित कार्यान्वयन से भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को 2030 तक विश्व स्तर पर अग्रणी बनने की संभावनाएँ स्पष्ट रूप से स्थापित होंगी।