मीरा-भायंदर में SIR के बाद 51 से 55% तक बोगस वोटरों का दावा, प्रताप सरनाईक ने पेश किया विधानसभा व बूथवार ब्यौरा
City News Mumbai••50 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
मीरा-भायंदर, दि. 31 अगस्त (सिटी न्यूज़ मुंबई)
SIR की मतदाता सूची में मीरा-भायंदर विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कथित बोगस वोटर पाए जाने का दावा कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाईक ने किया है। मंत्री के अनुसार, विधानसभा क्षेत्र 145 में करीब 55 प्रतिशत, जबकि विधानसभा क्षेत्र 146 में करीब 51 प्रतिशत वोटर बोगस पाए गए हैं।
चुनाव आयोग द्वारा कल SIR की सूची प्रकाशित किए जाने के बाद देर शाम मंत्री प्रताप सरनाईक ने पत्रकार परिषद आयोजित कर विधानसभा क्षेत्र और बूथवार आंकड़े मीडिया के सामने पेश किए। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची की जांच में बड़े पैमाने पर ऐसे नाम सामने आए हैं, जिन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मंत्री सरनाईक ने मीरा-भायंदर नगरपालिका चुनाव को लेकर भी गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव में काफी धांधली हुई थी। उन्होंने कहा कि इसी वजह से शिवसेना को अपेक्षा से कम सीटें मिलीं।
यदि शहर की कुल मतदाता संख्या में इतनी बड़ी संख्या में कथित बोगस वोटर मौजूद थे, तो विधानसभा और महानगरपालिका चुनाव कितने निष्पक्ष तरीके से हुए होंगे, इसको लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है।
वहीं, कांग्रेस ने भी महानगरपालिका चुनाव से पहले लगातार बोगस वोटरों का मुद्दा उठाया था। कांग्रेस नेताओं ने कथित तौर पर एक ही व्यक्ति के डबल वोट तथा गलत पतों पर दर्ज वोटरों के उदाहरण मीडिया के सामने पेश किए थे। इसके बाद चुनाव आयोग द्वारा महापौर से लेकर नगरसेवकों तक की मतदाता सूची में दर्ज कुछ नाम काटे जाने की बात भी सामने आई थी।
SIR के तहत पूरे मीरा-भायंदर शहर में लगभग साढ़े पांच लाख संदिग्ध/बोगस वोटर पाए जाने के दावे ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इतनी बड़ी संख्या में वोटर सूची से हटने या संदिग्ध पाए जाने की स्थिति में चुनावी परिणामों पर कितना असर पड़ा होगा, इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हालांकि, ये कथित बोगस वोटर किस राजनीतिक दल के समर्थक थे, इसका स्पष्ट खुलासा अभी नहीं हुआ है। SIR की सूची सामने आने के बाद अब यह सवाल भी चर्चा का विषय बन गया है कि इन वोटरों का राजनीतिक लाभ किस पार्टी को मिला।
मीरा-भायंदर में बड़े पैमाने पर कथित बोगस वोटर सामने आने के दावे के बाद लोकसभा, विधानसभा और महानगरपालिका चुनावों की निष्पक्षता को लेकर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।