महाराष्ट्र सरकार की नई नीति: जलसंधारण और ऊर्जा क्षेत्र में प्रमुख कदम
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
महाराष्ट्र सरकार ने जलसंधारण और नवीनीकरणीय ऊर्जा को प्राथमिकता देते हुए एक व्यापक योजना पेश की है। इस नीति के तहत जलस्रोतों की सुरक्षा, सौर एवं पवन ऊर्जा का विस्तार और ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलेगी।
महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में जलसंधारण और नवीनीकरणीय ऊर्जा को केंद्र में रखकर एक विस्तृत नीति का अनावरण किया है। यह पहल राज्य के सतत विकास के लक्ष्यों को साकार करने, जल संकट को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। नीति के प्रमुख बिंदुओं में जलस्रोतों की पुनर्स्थापना, छोटे जलविद्युत परियोजनाओं का समर्थन, सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।
**जलसंधारण के प्रमुख उपाय** सरकार ने 2024‑2029 अवधि के लिए 12,000 करोड़ रुपये के बजट को जलसंधारण परियोजनाओं के लिए आवंटित किया है। इसमें नदियों, नालों और जलाशयों की डीप रिन्यूअल, जलभरण तालाबों की मरम्मत और नई जलसंधारण संरचनाओं का निर्माण शामिल है। साथ ही, जल निकायों की गुणवत्ता सुधारने के लिए जल शोधन इकाइयों की स्थापना को तेज किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों से वर्षा जल को प्रभावी रूप से संग्रहित कर कृषि एवं शहरी क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ेगी।
**नवीनीकरणीय ऊर्जा में विस्तार** ऊर्जा विभाग ने सौर ऊर्जा क्षमता को 2028 तक 20,000 मेगावॉट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में, राज्य के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर सोलर फार्म स्थापित किए जाएंगे और घर‑घर सोलर पैनल की सब्सिडी योजना को लागू किया जाएगा। पवन ऊर्जा के लिए भी 5,000 मीटर के अतिरिक्त पवन टरबाइन स्थापित करने की योजना है, विशेषकर विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में जहाँ पवन गति अधिक है।
**ग्रामीण विकास और सामाजिक प्रभाव** नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा पहुँच को सुनिश्चित करना है। सरकार ने 1.5 करोड़ घरों को सस्ती कीमत पर इलेक्ट्रिक कनेक्शन प्रदान करने की योजना बनाई है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और वायु प्रदूषण में कमी आएगी। साथ ही, जलसंधारण परियोजनाओं में स्थानीय श्रमिकों को रोजगार देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिससे आर्थिक लाभ भी स्थानीय स्तर पर साकार होगा।
**पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ** जलसंधारण और नवीनीकरणीय ऊर्जा दोनों ही जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जलस्रोतों की सुरक्षा से जल स्तर में स्थिरता आएगी, जिससे बाढ़ और सूखे दोनों के प्रभाव कम होंगे। नवीनीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से कोयला‑आधारित पावर प्लांटों पर निर्भरता घटेगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। आर्थिक दृष्टि से, इन पहलों से निवेश आकर्षित होगा, नई उद्योगों का विकास होगा और राज्य की जीडीपी में वृद्धि होगी।
**आगे की राह** महाराष्ट्र सरकार ने इस नीति को लागू करने के लिए एक समन्वित कार्य समूह बनाया है, जिसमें जल, ऊर्जा, ग्रामीण विकास और पर्यावरण विभागों के प्रमुख शामिल हैं। समूह नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट तैयार करेगा और आवश्यकतानुसार नीति में संशोधन करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को समय पर और पारदर्शी तरीके से लागू किया गया, तो महाराष्ट्र जलसंधारण और नवीनीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल बन सकता है।