मराठी केवल संवाद और भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति‑इतिहास की साक्षी है; डिजिटल युग में मराठी को ज्ञानभाषा बनाने वाला - मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
City News Mumbai••0 व्यूज़•9 मिनट पढ़ें
मुंबई। मराठी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि यह हमारी समृद्ध संस्कृति की वाहक और जीवंत इतिहास की साक्षी है। विपुल शब्दसंपदा, समृद्ध साहित्यपरम्परा और विभिन्न बोलियों की विरासत से समृद्ध मराठी को २१वीं सदी में डिजिटल और ज्ञानभाषा के रूप में अधिक सक्षम बनाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया।
मराठी के दैनिक व्यवहार में उपयोग बढ़ाने के साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी मराठी के उपयोग को बढ़ाने का आह्वान उन्होंने किया।
मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने की पृष्ठभूमि पर आयोजित ‘अभिजात मराठी भाषा सप्ताह’ और ‘अभिजात मराठी भाषा सम्मान दिवस’ कार्यक्रम का चर्चगेट स्थित श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकर्सी महिला विश्वविद्यालय के पाटकर सभागृह में उत्साह के साथ शुभारंभ हुआ। इस विशेष समारोह में फडणवीस ने भाषण दिया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मराठी भाषा व उद्योग मंत्री डॉ. उदय सामंत, मुंबई के महापौर रितू तावड़े, विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. हेमलता बागला, मराठी भाषा विभाग के सचिव किरण कुलकर्णी सहित मान्यवर, शिक्षक, छात्र और मराठी प्रेमी उपस्थित थे।
*मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा मिलना एक गर्व का क्षण है*
मराठी भाषा प्राचीन और अभिजात है; लेकिन इसे केंद्र सरकार से अभिजात भाषा की आधिकारिक मान्यता मिलना मराठी भाषकों के लिए गर्व का क्षण है, यह फडणवीस ने कहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने से महाराष्ट्र की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व मिला, उन्होंने उल्लेख किया। छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की अवधारणा के साथ स्वभाषा को भी महत्व दिया। राज्य प्रशासन में मराठी के उपयोग को बढ़ाने के लिए उन्होंने प्रयास किए और उससे मराठी के प्रशासनिक उपयोग को नई दिशा मिली, ऐसी याद भी फडणवीस ने इस अवसर पर दिलाई।
*मराठी शब्दसंपदा बढ़ाने की आवश्यकता*
दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में मराठी का १३वाँ क्रमांक है, यह बताते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मराठी एक वैश्विक भाषा है। बीसवीं सदी में तैयार किए गए मराठी ज्ञानकोश और शब्दरत्नाक में ११ से १३ लाख शब्द हैं, उनका उल्लेख किया। तुलना में ऑक्सफ़र्ड शब्दकोश में लगभग छह लाख शब्द, जबकि मंदारिन, स्पेनिश और फ्रेंच जैसी भाषाओं में सामान्यतः तीन से साडेतीन लाख शब्द हैं, उन्होंने बताया। राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित मराठी शब्दकोश में वर्तमान में लगभग तीन लाख शब्द हैं। इसके आगे के संस्करण तैयार करके शब्दसंपदा को १३ लाख शब्दों तक ले जाने का काम करने की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने इस बार उजागर की।
मराठी की समृद्ध शब्दसंपदा का उल्लेख करते हुए फडणवीस ने मराठी ज्ञानकोश और शब्दकोशों की परम्परा के महत्व को उजागर किया। विभिन्न कोशों में लाखों मराठी शब्द दर्ज किए गए हैं, और यह शब्दसंपदा मराठी की समृद्ध भाषाई परम्परा को दर्शाती है, उन्होंने कहा। मराठी का यह शब्दवैभव केवल गर्व का विषय नहीं बल्कि आधुनिक ज्ञान निर्माण में भी इसका प्रभावी उपयोग होना चाहिए। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्रों की अवधारणाएँ यदि मराठी में उपलब्ध हों तो मराठी वास्तव में ज्ञानभाषा बन जाएगी, उन्होंने स्पष्ट किया।
*‘मराठी AI’ के माध्यम से नए युग से संबंध*
डिजिटल तकनीक के कारण संवाद के माध्यम तेज़ी से बदल रहे हैं। ऐसी स्थिति में मराठी को केवल पारंपरिक उपयोग तक सीमित न रखकर नई तकनीक से जोड़ना आवश्यक है, फडणवीस ने कहा। ‘मराठी AI’ के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में मराठी के प्रभावी उपयोग को बढ़ाना, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर मराठी में जानकारी और ज्ञान सामग्री उपलब्ध कराना, साथ ही OTT प्लेटफ़ॉर्म और सोशल मीडिया पर गुणवत्तापूर्ण मराठी कंटेंट बड़े पैमाने पर बनाना आवश्यक है, उन्होंने उल्लेख किया।
क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में मराठी में ज्ञान सामग्री उपलब्ध होने से नई पीढ़ी को मातृभाषा से आधुनिक ज्ञान आत्मसात करने का अवसर मिलेगा, ऐसा विश्वास उन्होंने व्यक्त किया।
*बोलियों की मिठास को संरक्षित रखना चाहिए*
मराठी के साथ ही महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाने वाली बोलियों को मराठी की अमूल्य धरोहर बताया फडणवीस ने। कोकणी, वर्हाड़ी, खानदेशी‑अहिराणी, मालवणी, डांगी, झाड़ीबोली जैसी बोलियों में स्थानीय संस्कृति, लोक परम्परा और जीवन अनुभव समाहित हैं। इसलिए इन बोलियों का साहित्य, लोक परम्परा और भाषाई विशेषताएँ संरक्षित करने की आवश्यकता उन्होंने व्यक्त की।
मराठी नाट्यसंस्कृति का भी उन्होंने विशेष उल्लेख किया। आधुनिक प्रौद्योगिकी के साधन सीमित होने के बावजूद कई पीढ़ियों ने मराठी रंगमंच की समृद्ध परंपरा को जीवित रखा। कलाकारों ने अपने अभिनय, लेखन और प्रयोगशीलता से मराठी रंगमंच को एक अलग पहचान दिली। यह नाट्यपरंपरा मराठी की सांस्कृतिक शक्ति का विशेषता है, यह फडणवीस ने कहा।
*रोज़ के व्यवहार से मराठी का संवर्धन*
मराठी का संरक्षण और संवर्धन केवल सरकारी पहलों तक सीमित न रखकर प्रत्येक मराठी भाषी को अपने दैनिक व्यवहार से इसके लिए योगदान देना आवश्यक है। घर, शिक्षा, प्रशासन, व्यवसाय, प्रौद्योगिकी और सामाजिक माध्यमों जैसे सभी क्षेत्रों में मराठी का अधिकाधिक उपयोग बढ़ना चाहिए। परंपरा का अभिमान और आधुनिक प्रौद्योगिकी को मिलाकर मराठी को भविष्य की सक्षम ज्ञानभाषा बनाना यह सामूहिक जिम्मेदारी है, ऐसा आह्वान फडणवीस ने किया।
*आगामी विश्व मराठी साहित्य सम्मेलन भी लंदन में* - उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
हमारी मातृभाषा मराठी केवल महाराष्ट्र की पहचान नहीं, बल्कि हमारा स्वाभिमान है। संत ज्ञानेश्वर से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज तक की समृद्ध परंपरा से सजी मराठी अब सात समुद्र पार पहुंच गई है और दुनिया भर में इसका डंका बज रहा है। भविष्य में भी मराठी का वैश्विक विस्तार तेज़ी से हो, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। डिजिटल जगत, सोशल मीडिया, पॉडकास्ट, गेमिंग और कोडिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी मराठी के उपयोग को बढ़ाकर नई पीढ़ी को मराठी से जोड़ा जाना चाहिए। दुनिया के ५० से अधिक देशों में मराठी के प्रचार और प्रसार को बढ़ाने का संकल्प है, और लंदन में ‘छत्रपति शिवाजी महाराज वैश्विक मराठी केंद्र’ के निर्माण के साथ-साथ आगामी विश्व मराठी साहित्य सम्मेलन भी लंदन में आयोजित किया जाएगा, ऐसी जानकारी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दी। लंदन में लगभग ७० से ८० हजार मराठी बंधु वास कर रहे हैं, और महाराष्ट्र मंडल के माध्यम से मराठी की शिक्षा, पाठ्यक्रम और प्रमाणपत्र परीक्षाओं जैसे उपक्रम चल रहे हैं। लंदन में ‘छत्रपति शिवाजी महाराज वैश्विक मराठी केंद्र’ के निर्माण की दिशा में भी काम शुरू है, और महाराष्ट्र मंडल की इमारत खरीदी जा चुकी है, यह उन्होंने बताया। पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए जन्मदिन, सत्कार या अन्य खुशी के अवसर पर फूलों के गुलदस्ते देने के बजाय मराठी पुस्तकें उपहार में देने की नई संस्कृति को स्थापित किया जाना चाहिए, ऐसा आह्वान शिंदे ने किया। मराठी भाषा नीति, ‘पुस्तकों का गाँव’, ‘कवियों का गाँव’ जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से मराठी भाषा और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने का काम चल रहा है, यह शिंदे ने कहा।
*लंदन में ‘मराठी वैश्विक केंद्र’, १०० बोलियों का कोश* -उदय सामंत
मराठी भाषा और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक स्तर पर विस्तार के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है, और मराठी के सर्वांगीण विकास के लिए कई महत्वाकांक्षी पहलों को हाथ में लिया गया है। पुणे के डेक्कन विश्वविद्यालय में मराठी भाषा के लिए ‘उत्कृष्टता केंद्र’, लंदन में छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर ‘मराठी वैश्विक केंद्र’, राज्य की विभिन्न बोलियों के १०० कोश और नौ स्थानों पर ‘मराठी कौशल विकास केंद्र’ के निर्माण का काम चल रहा है, ऐसी जानकारी उद्योग और मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने दी। विदेश में रहने वाले मराठी बंधुओं के साथ संवाद बढ़ाने के लिए विभिन्न पहलों को लागू किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर ७५ देशों में ‘नमो संवाद’ कार्यक्रम शुरू किया गया है, और विदेश में रहने वाले मराठी बंधुओं के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जा रही है, ऐसी जानकारी सामंत ने दी। अंतरराष्ट्रीय मराठी मंचों की संख्या वर्तमान में ५२ तक पहुंच गई है और इसे जल्द ही ७५ तक ले जाने का लक्ष्य है, उन्होंने बताया। इस माध्यम से दुनिया भर के मराठी वक्ताओं के बीच संवाद का जाल अधिक मजबूत किया जाएगा। साहित्यिकों की दीर्घकालिक मांग को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा ‘साहित्य संग्रहालय’ और अत्याधुनिक ‘मराठी भाषा भवन’ के निर्माण का काम तेज़ी से शुरू किया गया है, यह सामंत ने कहा। मराठी साहित्य की विरासत को संरक्षित करना, साहित्यिकों के योगदान का दस्तावेजीकरण करना और नागरिकों को मराठी साहित्य‑संस्कृति से जोड़ने वाले आधुनिक केंद्र बनाना, यही इन पहलों का उद्देश्य है। एरॉली में उपकेंद्र तथा ‘पुस्तकों का गाँव’ और ‘कवियों का गाँव’ जैसी पहलों को भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है, उन्होंने उल्लेख किया।
*उच्चस्तरीय मराठी अनुसंधान के साथ डिजिटलीकरण पर जोर; युवाओं को मराठी की समृद्ध यात्रा में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए* - सचिव किरण कुलकर्णी
मराठी भाषा का प्रवाह केवल ज्ञानेश्वर महाराज या चक्रधर स्वामी के समय से शुरू नहीं हुआ, बल्कि लगभग डेढ़ हजार साल पहले की ‘गाथा सप्तशती’ से इसकी समृद्ध परंपरा आगे बढ़ी है। इस विस्तृत भाषाई विरासत के अनुसंधान, संरक्षण और आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए मराठी भाषा विभाग प्रतिबद्ध है, ऐसा मराठी भाषा विभाग के सचिव किरण कुलकर्णी ने कहा।
मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने के बाद से पिछले दो वर्षों में उसकी अभिजातता का अर्थ, भाषिक परंपरा और ज्ञान संपदा को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम चल रहा है, कुलकर्णी ने बताया। इस वर्ष विशेष रूप से युवाओं को केंद्र में रखकर मराठी के प्रसार और संवर्धन पर बल दिया जा रहा है, उन्होंने स्पष्ट किया। तर्कतिर्थ लक्ष्मणशास्त्री जोशी के मार्गदर्शन में शुरू हुई विश्वकोश निर्माण कार्य को अब आधुनिक तकनीक से जोड़ दिया गया है। विश्वकोश की ज्ञान संपदा को डिजिटल रूप में आम लोगों तक पहुँचाने का काम तेज़ी से शुरू हो चुका है, और इस महीने से विश्वकोश का कार्य पूरी तरह डिजिटल रूप में पोर्टल पर उपलब्ध होगा, कुलकर्णी ने कहा।
कार्यक्रम की शुरुआत में मान्यवरों का स्वागत ग्रंथ भेंट देकर किया गया। इस बार ‘मराठी का कौतुक भाग–२’ पुस्तक का प्रकाशन किया गया। इसके बाद ‘अभिजात मराठी, अभिमान मराठी’ इस संकल्पना पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। 000