राज्य की आर्थिक व्यवस्था को नया 'फाइनेंशियल रोडमैप'........!
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
सस्ते पैसे चार प्रतिशत पर; सरकार केवल 8-9 प्रतिशत पर ही ऋण लेगी.......?
मुंबई, दिनांक 28 (अनंत नलावडे) - राज्य की आर्थिक व्यवस्था में मौजूद विसंगतियों को दूर करके निधि उभार, लेखा‑जोखा और उपलब्ध संसाधनों का कार्यक्षम आवंटन करने के लिए राज्य सरकार अब संपूर्ण आर्थिक प्रणाली का पुनर्गठन करेगी। इसी के साथ, राज्य की विभिन्न संस्थाओं के पास लगभग ६ से ७ हजार कोटी रुपये की निधि चार प्रतिशत ब्याज दर पर निवेशित होने के बावजूद, राज्य को बाजार से ८ से ९ प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ रहा है, यह गंभीर आर्थिक विसंगति सोमवार को सामने आई, और इस अंतर को दूर करने के लिए अभिनव आर्थिक साधन और प्रभावी तंत्र स्थापित करने के निर्देश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यहाँ दिए।
राज्य की आर्थिक व्यवस्था में आवश्यक परिवर्तन करने के लिए छह महीने में ठोस सुधार योजना तैयार करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए। सह्याद्री अतिथिगृह में महाराष्ट्र शाश्वत सार्वजनिक वित्त समिति की बैठक में बात करते हुए राज्य के कर और करेतर राजस्व में वृद्धि के उपाय सुझाने के उद्देश्य से इस समिति का गठन किया गया, यह स्पष्ट किया।
चार प्रतिशत का पैसा, आठ‑नौ प्रतिशत का ऋण......!
राज्य की विभिन्न संस्थाओं में बिखरे हुए निधि के उपयोग का मुद्दा भी आज की बैठक में महत्वपूर्ण माना गया। लगभग ६ से ७ हजार कोटी रुपये चार प्रतिशत ब्याज दर पर निवेशित होने के बावजूद, सरकार को अपनी जरूरतों के लिए बाजार से ८ से ९ प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उठाना पड़ता है। इसलिए उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करने के लिए नई आर्थिक तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता है, यह मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया। इन तंत्रों से संबंधित संस्थाओं की आर्थिक स्वतंत्रता अडिग रहे, और उनके निधि को सुरक्षा मिले, इसके लिए अभिनव आर्थिक साधन खोजने के निर्देश भी उन्होंने समिति को दिए।
राजस्व वृद्धि के पारंपरिक हिस्से अपूर्ण....
पारंपरिक राजस्व संग्रहण की विधियों से आगे बढ़कर राज्य के संपूर्ण विकास योजना को वित्त पोषण किया जा सके, ऐसे नए मार्गों की खोज की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने प्रमुखता से व्यक्त की। साथ ही कर और करेतर राजस्व बढ़ाने के साथ उपलब्ध निधि के अधिक कार्यक्षम उपयोग पर भी समिति को जोर देना चाहिए, उन्होंने कहा।
परियोजनाओं की लागत, समय और परिणाम जांचें......!
राज्य के खर्च प्रबंधन में भी मूलभूत सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि विभिन्न परियोजनाओं का समय पर पूर्ण न होना निवेश के आर्थिक प्रभाव को अपेक्षित गुणात्मक परिणाम नहीं देता। इसलिए निधि योजना में त्रुटियों के कारण विकास कार्यों की प्रभावशीलता पर असर पड़ रहा है, इस कारण संपूर्ण प्रशासनिक कार्यों की नई समीक्षा करके खर्च की प्रभावशीलता बढ़ाने के निर्देश मुख्यमंत्री फडणवीस ने दिए। विशेषज्ञ समिति की स्थापना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि समिति की सिफारिशों के अनुसार मौजूदा विधियों और प्रणालियों में वास्तविक परिवर्तन किए जाएंगे, यह भी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया।
आज की बैठक में वित्त राज्यमंत्री आशिष जयस्वाल, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, समिति के अध्यक्ष विजय केळकर, सदस्य कार्थिक मुरलीधरन, रवी शंकर, पूर्व मुख्य सचिव डॉ. नितीन करीर, राजस्व एवं वन विभाग के उपमुख्य सचिव विकास खारगे, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव आभा शुक्ला, वित्त विभाग के उपमुख्य सचिव विकासचन्द्र रस्तोगी, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, वित्त विभाग के प्रधान सचिव विजय वाघमारे आदि उपस्थित थे।
बॉक्स.....
आर्थिक सुधारों का “छह महीने” एजेंडा.....
१. कर और करेतर राजस्व बढ़ाने के नए मार्ग २. उपलब्ध निधि का अधिक कार्यक्षम आवंटन ३. चार प्रतिशत निवेश बनाम ८‑९ प्रतिशत ऋण में मौजूद विसंगति को दूर करना ४. खर्च प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना ५. परियोजनाओं को समय पर पूर्ण करने के लिए निधि योजना में सुधार ६. मौजूदा आर्थिक और प्रशासनिक प्रणालियों में आवश्यक परिवर्तन ....,........................(समाप्त).......... …