दुष्काळ की स्थिति से शरद पवार का सरकार पर घेराव.......! १०० टक्के कर्जमाफी की मांग...; मुख्य मंत्रियों की बैठक में बलीराज के प्रश्न रखेंगे....
City News Mumbai••1 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
पानी की कमी, खराब हुई फसलें, बिजली आपूर्ति और सूखे के कारण तालुका सूची से बाहर रखे गए तालुकों का मुद्दा ऐरणी पर...
मुंबई, दि.2 (अनंत नलावडे) - राज्य में बारिश की कमी के कारण कृषि और किसान संकट में फँसे हुए समय में राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) पार्टी के अध्यक्ष खा. शरद पवार ने शुक्रवार को सीधे किसानों की बंध पर पहुँच कर सूखे के मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। इसमें उन्होंने पुणे जिले के पुरंदर, बारामती और दौंड तालुकों की यात्रा के दौरान करपली हुई फसलें, घटती हुई पाझर तालाब और जलसंकट से जूझ रहे गांवों की स्थिति को जाना। साथ ही इस भयानक समय में किसानों को १०० प्रतिशत कर्जमाफी, पीने के पानी के लिए तात्कालिक टैंकर, सूखे की सूची से बाहर किए गए क्षेत्रों का समावेश और बिजली आपूर्ति में कटौती न करने की मांग करते हुए पवार ने सूखे के मुद्दे पर सरकार के सामने चुनौती भी रखी। उसी समय इन मांगों को पूरा करने के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से व्यक्तिगत मुलाकात करके प्रश्न प्राथमिकता से रखे जाने का भी उन्होंने स्पष्ट किया।
इस दौरान शरद पवार ने पुरंदर तालुके के परिंचे, वीर, मांडकी सहित विभिन्न गांवों का दौरा कर पाझर तालाब, कुएँ और करपली हुई फसलों का निरीक्षण किया। किसानों से संवाद करते हुए उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति को गंभीर बताया और उपस्थित मीडिया को यह बात रेखांकित की। बारिश की अनिश्चितता के कारण फसलों को नुकसान और जल की कमी जैसे दोहरे संकटों का सामना किसानों को करना पड़ रहा है। ऐसी परिस्थितियों में किसानों को केवल आश्वासनों से अधिक ठोस निर्णयों की आवश्यकता है, यह मुद्दा उनकी मांगों में स्पष्ट रूप से उभरा।
कर्जमाफी की मांग.....; सरकार के निर्णय पर ध्यान....
सूखे के कारण आर्थिक संकट में फँसे किसानों को बचाने के लिए १०० प्रतिशत कर्जमाफी की घोषणा करनी चाहिए, यह स्पष्ट मांग शरद पवार ने की। क्योंकि फसल कट जाने के बाद कर्ज की पुनर्भुगतान कैसे की जाए, अगले मौसम के लिए पूँजी कहाँ से जुटाई जाए और परिवार का उपजीविका कैसे चलाया जाए, ये प्रश्न किसानों के सामने हैं। इस पृष्ठभूमि में पूरी कर्जमाफी की मांग महत्वपूर्ण बन गई है। हालांकि, कर्जमाफी की मांग और सरकार के वास्तविक निर्णय में अभी अंतर है। इसलिए अब पवार की मांग पर राज्य सरकार क्या भूमिका लेती है, साथ ही कर्जमाफी के संबंध में कौन‑सी ठोस कार्रवाई होती है, इस पर राज्य के किसानों का ध्यान केंद्रित है। क्योंकि आज टैंकर, बिजली और सूखे की सूची का मुद्दा है। सूखे की तीव्रता बढ़ते क्षेत्रों में पीने के पानी का प्रश्न गंभीर हो रहा है, यह दर्शाते हुए पवार ने आवश्यक स्थानों पर तात्कालिक सरकारी टैंकर शुरू करने की भी मांग की। साथ ही अब जलसंकट के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के साथ-साथ पशुधन को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए जल आपूर्ति के उपायों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
दूसरी ओर, स्थिति गंभीर होने के बावजूद कुछ तालुकों का सूखे की सूची में शामिल न होने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया। वास्तविक स्थिति का आकलन करके ऐसे क्षेत्रों को सूखे की सूची में शामिल किया जाए, ऐसी मांग भी उन्होंने की। साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सूखे‑ग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को बिजली आपूर्ति किसी भी स्थिति में कटौती नहीं की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री की बैठक में कौन‑से मुद्दे रखेंगे..?
सूखे‑ग्रस्त किसानों के प्रश्नों पर सरकार से चर्चा चल रही है, यह बताते हुए पवार ने जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करने का संकेत दिया। इस बैठक में पूरी कर्जमाफी, पीने के पानी के लिए टैंकर, सूखे की सूची से बाहर किए गए तालुकों का समावेश और बिजली आपूर्ति जारी रखने के प्रश्न प्राथमिकता से रखे जाएंगे।
इसलिए अब पवार के दौरे से सूखे‑ग्रस्त क्षेत्रों के प्रश्न फिर से चर्चा में आए हैं। हालांकि, दौरे में रखी गई मांगों का वास्तविक सहायता में रूपांतरण कब होगा, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसमें कर्जमाफी के संबंध में सरकार क्या निर्णय लेती है, जलसंकट पर कितनी शीघ्रता से उपाय करती है और वंचित तालुकों की सूखे‑ग्रस्त स्थिति का पुनः आकलन करती है या नहीं, इस पर किसानों को मिलने वाले राहत का स्वरूप तय होगा। .........................(समाप्त)..................