नरेंद्र मोदी: विकास और चुनौतियों के बीच भारत का नेतृत्व
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नरेंद्र मोदी की नीतियों ने भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है, परंतु चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। इस लेख में उनके नेतृत्व की समीक्षा की गई है।
नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता, 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने। उनके कार्यकाल में डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत और मेक इन इंडिया जैसी योजनाएँ शुरू हुईं। इन पहलों ने भारत को वैश्विक मंच पर एक नया पहचान दिलाई। 2023 में, मोदी सरकार ने 1.5 ट्रिलियन रुपये के निवेश के साथ ग्रामीण विकास को तेज करने का लक्ष्य रखा। इस दौरान, उन्होंने विश्व के प्रमुख देशों के साथ व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिससे निर्यात में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
हालाँकि, मोदी की नीतियों पर आलोचना भी उठती रही। 2019 के जनगणना के बाद, उनके सरकार ने धार्मिक समानता पर विवादास्पद कदम उठाए, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ प्रतिबंध लगे। आर्थिक रूप से, 2021 में मुद्रास्फीति 6.5 प्रतिशत पर बनी रही, जिससे आम जनता पर भार बढ़ा। इसके बावजूद, मोदी ने 2024 में 100 करोड़ रोजगार सृजन का लक्ष्य घोषित किया, जो कि देश के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना मानी जा रही है।
सामाजिक क्षेत्र में, मोदी ने 2022 में ‘किशोर शिक्षा अभियान’ शुरू किया, जिससे 2.5 करोड़ विद्यार्थियों को मुफ्त ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराई गई। स्वास्थ्य क्षेत्र में, 2023 में ‘स्वास्थ्य बूस्ट’ पहल ने 10 लाख अस्पतालों में डिजिटल रिकॉर्डिंग लागू की। इस पहल के तहत, टीकाकरण कवरेज में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। साथ ही, 2024 में प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने जलवायु परिवर्तन पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया, जिसमें 50 देशों ने भाग लिया।
आर्थिक सुधारों के बावजूद, मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार और नौकरशाही के बढ़ते आरोप लगे। 2022 में, एक उच्च-स्तरीय जांच ने 3 करोड़ रुपये के अवैध धन का खुलासा किया, जिसे सरकार ने तुरंत निपटाया। इसके अलावा, 2023 में, उनके नेतृत्व में विदेशी निवेश में 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। फिर भी, मोदी ने 2025 में ‘डिजिटल इंडिया 2.0’ कार्यक्रम के साथ भारत को विश्व की शीर्ष डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने का आश्वासन दिया।
इन सभी पहलुओं को देखते हुए, नरेंद्र मोदी का नेतृत्व एक दोधारी तलवार की तरह है, जिसमें विकास और चुनौतियों का संतुलन बना हुआ है। उनका कार्यकाल भारत के लिए नई दिशा और संभावनाएँ लेकर आया है, परंतु सतत प्रगति के लिए नीति सुधार और पारदर्शिता की आवश्यकता स्पष्ट है।