नरेंद्र मोदी: भारत के प्रधानमंत्री की राजनीतिक यात्रा और नीतियों का विश्लेषण
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नरेंद्र मोदी की जीवनी, उनके प्रमुख शासनकाल, आर्थिक एवं विदेश नीति पहलों और सामने आई चुनौतियों का संक्षिप्त सारांश प्रस्तुत किया गया है।
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ। एक साधारण परिवार से उठकर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया। 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और मई 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने। 2019 में दो बार की लगातार जीत ने उन्हें भारत की सबसे लंबी अवधि तक सत्ता में रहने वाली नेता बना दिया।
गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में मोदी ने बुनियादी ढाँचा, ऊर्जा आपूर्ति और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार लागू किए। उन्होंने 2002 के बाद राज्य की सामाजिक शांति को पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आर्थिक विकास को गति दी।
2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रीय जनमत गठबंधन (एनडीए) के तहत 282 सीटें जीतीं, जबकि मोदी का वोट शेयर 31.34% रहा। यह जीत भारत के इतिहास में सबसे बड़ी बहुमत में से एक मानी गई और मोदी को एक सशक्त कार्यकारी शक्ति प्रदान की।
प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए मोदी ने कई राष्ट्रीय पहलें शुरू कीं, जैसे स्वच्छ भारत अभियान (2 अक्टूबर 2014), डिजिटल इंडिया (जुलाई 2015), वस्तु एवं सेवा कर (GST) (1 जुलाई 2017) और आयुष्मान भारत (सितम्बर 2018)। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य, डिजिटल साक्षरता, कर सुधार और स्वास्थ्य बीमा को व्यापक बनाना था।
विदेशी नीति के क्षेत्र में मोदी ने "Neighbourhood First" सिद्धांत के तहत पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करने पर ध्यान दिया। उन्होंने 2020 में संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा की और चीन के साथ सीमा तनाव के दौरान कूटनीतिक संवाद बनाए रखा, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थिति को सुदृढ़ किया गया।
आर्थिक आँकड़ों के अनुसार, 2014 से 2022 तक भारत की वार्षिक औसत जीडीपी वृद्धि 6.5% रही, जबकि 2020 में बेरोजगारी दर 7.2% तक पहुंची। वित्तीय वर्ष 2022 में राजकोषीय घाटा 6.4% रहा, जो कई सुधारात्मक उपायों के बावजूद उच्च स्तर पर बना रहा।
हालाँकि, मोदी सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 2020‑2021 में कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विरोध को जन्म दिया। साथ ही, मीडिया स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में आलोचनाएँ भी सामने आईं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर चर्चा बढ़ी।
नरेंद्र मोदी की नेतृत्व शैली, नीति‑निर्धारण और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति ने भारतीय राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला है। आगामी 2024 के आम चुनाव में उनकी लोकप्रियता और नीतियों का परीक्षण होगा, जो भारत के भविष्य की दिशा तय करेगा।