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खुले खाद्यतेल पर FDA की कार्रवाई फिलहाल रुकी
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खुले खाद्यतेल पर FDA की कार्रवाई फिलहाल रुकी

City News Mumbai•1 सितंबर 2026 को 05:00 pm बजे•25 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

फडणवीस सरकार का व्यापारियों को एक साल का ‘ट्रांजिशन’ राहत; कानून कायम, समय सीमा खत्म होते ही नियमों का पालन अनिवार्य

मुंबई, दि. 01 (सिटी न्यूज़ मुंबई अनंत नलावडे) — राज्य में खुले खाद्यतेल की बिक्री पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंडे द्वारा कानून की सख्त कार्रवाई से परेशान पारंपरिक खाद्यतेल कारोबारियों को मंगलवार को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। हालांकि खुले खाद्यतेल की बिक्री पर वर्ष 2011 में लगाई गई पाबंदी का कानून वापस नहीं लिया गया है। फिलहाल इसकी सख्त कार्रवाई को एक वर्ष के लिए स्थगित रखते हुए कारोबारियों को कानून के अनुरूप बदलाव करने के लिए संक्रमण काल दिया गया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रालय में हुई बैठक के बाद यह निर्णय घोषित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक वर्ष बाद नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा और इसके बाद दोबारा समय बढ़ाने की कोई गुंजाइश नहीं होगी।

सरकार के इस निर्णय में व्यापारियों की समस्या के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहकों की जरूरत, पारंपरिक व्यवसाय पर निर्भर रोजगार और खाद्यतेल में मिलावट से नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव—इन तीनों पहलुओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास दिखाई देता है।

कानून कायम, सिर्फ कार्रवाई पर एक साल की राहत

खुले खाद्यतेल की बिक्री से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए कारोबारियों को अब एक साल का समय मिलेगा। इस अवधि में पारंपरिक तरीके से व्यवसाय करने वालों को आवश्यक बदलाव करते हुए कानून के अनुरूप व्यवस्था अपनानी होगी।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के बाद फिर से समय नहीं बढ़ाया जाएगा। इसलिए सरकार का यह निर्णय नियमों को स्थायी रूप से शिथिल करने के बजाय कारोबारियों को अचानक झटका दिए बिना उन्हें नियमन की व्यवस्था में लाने के लिए दिया गया संक्रमण काल माना जा रहा है।

अब FDA के सामने भी नई चुनौती

इस निर्णय के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। कारोबारियों की समस्याओं को समझते हुए उन्हें कानून का पालन करने के लिए व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अब FDA की होगी।

इसके लिए दो समितियां गठित की जाएंगी। पहली समिति पारंपरिक तरीके से कारोबार करने वाले व्यापारियों की समस्याओं का अध्ययन कर कानून के अनुरूप बदलाव के उपाय सुझाएगी। दूसरी समिति विक्रेताओं, उत्पादकों, री-पैकिंग कारोबारियों और अन्य संबंधित लोगों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उपाय सुझाएगी।

दोनों समितियों को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य में 2,103 लाइसेंसधारी कारोबारी

बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में वर्तमान में खुले खाद्यतेल के कारोबार से जुड़े 2,103 लाइसेंसधारी व्यापारी हैं। इनमें से 370 कारोबारियों के पास री-पैकिंग कर खाद्यतेल बेचने के लाइसेंस, जबकि 489 कारोबारियों के पास खाद्यतेल उत्पादन के लाइसेंस हैं।

इससे स्पष्ट है कि यह मामला केवल कुछ छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादक, विक्रेता, री-पैकर और ग्राहक—पूरी खाद्यतेल श्रृंखला इससे जुड़ी हुई है।

मिलावट बनाम पारंपरिक कारोबार की चुनौती

खुले खाद्यतेल की बिक्री पर नियमन लागू करने का प्रमुख उद्देश्य खाद्यतेल में मिलावट और उससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को रोकना है। केंद्र के नियमन के बाद राज्य में भी इस संबंध में समय-समय पर अधिसूचनाएं जारी की गई हैं।

हालांकि, कानून लागू करते समय ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राहकों की आदतों, स्थानीय बाजार व्यवस्था और पारंपरिक कारोबार पर निर्भर परिवारों के रोजगार को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी व्यावहारिक स्थिति को देखते हुए सरकार ने तत्काल कार्रवाई के बजाय एक साल का संक्रमण काल देने का फैसला किया है।

यह राहत है या डेडलाइन?

व्यापारियों को मिली एक साल की राहत निश्चित रूप से बड़ी है, लेकिन इसे स्थायी छूट समझना उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है। सरकार ने एक तरफ कार्रवाई को एक साल के लिए स्थगित किया है, वहीं दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा।

इसलिए आने वाला एक साल व्यापारियों के लिए केवल राहत का नहीं, बल्कि अपने कारोबार के तरीके में बदलाव करने का ‘डेडलाइन वर्ष’ साबित होगा।

अब असली परीक्षा किसकी?

व्यापारियों की — क्योंकि उन्हें अपने कारोबार को कानून के अनुरूप बनाना होगा।

FDA की — क्योंकि केवल नियम बताना ही नहीं, बल्कि उनका पालन करने के लिए व्यावहारिक व्यवस्था उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।

सरकार की — क्योंकि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ पारंपरिक कारोबार और रोजगार को नुकसान से बचाना भी बड़ी चुनौती होगी।

एक साल की यह अवधि समाप्त होने के बाद कितने कारोबारी कानून के अनुरूप व्यवस्था अपना पाए और कितने अब भी पुराने तरीके से कारोबार करते रहे, इसी से सरकार के इस फैसले की वास्तविक सफलता तय होगी।
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