भिवंडी मनपा में 9 स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति मंजूर, कांग्रेस में घमासान
City News Mumbai••0 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
जिला कांग्रेस अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं ने मनपा गेट पर किया विरोध प्रदर्शन, पूर्व सांसद सुरेश टावरे का विधायक रईस शेख पर गंभीर आरोप
सिटी न्यूज़ मुंबई/गनी खान भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका में नौ स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति को मंजूरी मिलने के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है। बुधवार, 14 अक्टूबर को मनपा की विशेष सभा में सभी नौ नामों को मंजूरी दी गई। हालांकि, कांग्रेस के हिस्से में आए तीन स्वीकृत नगरसेवकों के नामों को लेकर पार्टी के भीतर ही विवाद खड़ा हो गया। जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मनपा मुख्यालय के गेट पर प्रदर्शन कर चयन प्रक्रिया का विरोध किया। इस दौरान पूर्व सांसद सुरेश टावरे ने समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी को खरीदकर बेच दिया है। इन आरोपों से भिवंडी की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। महानगरपालिका आयुक्त अनमोल सागर के आधिकारिक एजेंडे के अनुसार, बुधवार दोपहर 3:30 बजे स्वर्गीय विलासराव देशमुख सभागृह में विशेष सभा क्रमांक आठ आयोजित की गई। मनपा के 90 निर्वाचित नगरसेवकों के अनुपात में नौ स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति की जानी थी। पार्टीवार आवंटन के तहत कांग्रेस को तीन, भाजपा को दो तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), शिवसेना, समाजवादी पार्टी और कोणार्क विकास आघाड़ी को एक-एक सीट दी गई। कांग्रेस की ओर से इमरान मोहम्मद हदास अंसारी, अरफान अबुल अजीज शेख और शेख सलाम अहमद के नाम प्रस्तावित किए गए। भाजपा से सुगंधा चंद्रकांत टावरे और रविकांत सिताराम सावंत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) से गिरीश कृष्णा म्हात्रे, शिवसेना से संजय काशिनाथ कावळूकर, समाजवादी पार्टी से भरत जयरामदास जंगलानी और कोणार्क विकास आघाड़ी से मयूर विलास पाटील के नामों को मंजूरी दी गई। कांग्रेस के हिस्से में आए तीन स्वीकृत नगरसेवकों के नामों को लेकर पार्टी के स्थानीय संगठन ने नाराजगी जताई। जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों का आरोप है कि नाम तय करते समय जिला नेतृत्व और पुराने पार्टी कार्यकर्ताओं से उचित विचार-विमर्श नहीं किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनपा के मुख्य द्वार पर बैनर लेकर विरोध प्रदर्शन किया और चयन प्रक्रिया के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का दावा था कि प्रस्तावित तीनों उम्मीदवारों का कांग्रेस संगठन से सक्रिय जुड़ाव नहीं रहा है। जिला अध्यक्ष ने यह भी कहा कि उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से चयन प्रक्रिया पर 15 दिनों की रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन इसके बावजूद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व सांसद सुरेश टावरे ने विधायक रईस शेख पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भिवंडी में कांग्रेस संगठन के फैसलों में बाहरी हस्तक्षेप हो रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास 30 नगरसेवक होने के बावजूद पार्टी के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। टावरे ने आरोप लगाया कि विधायक रईस शेख ने कांग्रेस को खरीद लिया है और उसे बेच दिया है। उनके मुताबिक, पार्टी संगठन को दरकिनार कर ऐसे लोगों को स्वीकृत नगरसेवक बनाया गया, जिनके चयन पर स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व सहमत नहीं है। इन आरोपों के बाद कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। हालांकि, विधायक रईस शेख की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है। कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर मनपा परिसर में तनाव की आशंका को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त बंदोबस्त तैनात किया। परिसर में पुलिस की दो बड़ी वैन सहित अतिरिक्त पुलिस बल मौजूद रहा। इसी दौरान समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख लगभग 40 से 50 समर्थकों के साथ मनपा पहुंचे। भाजपा के कार्यकर्ता भी भगवा गमछे पहनकर परिसर में दिखाई दिए। विशेष सभा में नौ नामों को मंजूरी मिलने के बाद शाम को मनपा के मुख्य द्वार पर समर्थकों ने जश्न मनाया। समाजवादी पार्टी के नवनियुक्त स्वीकृत नगरसेवक भरत जयरामदास जंगलानी को समर्थकों ने कंधे पर उठाकर बधाई दी। कांग्रेस से स्वीकृत नगरसेवक बने इमरान अंसारी और अरफान शेख का भी समर्थकों ने स्वागत किया। भाजपा और कोणार्क विकास आघाड़ी के नवनियुक्त नगरसेवकों के स्वागत में फूल-मालाएं पहनाई गईं और गुलाल उड़ाया गया। नौ स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति के बाद भिवंडी महानगरपालिका में निर्वाचित और स्वीकृत सदस्यों की कुल संख्या 99 हो गई है। इन नियुक्तियों के बाद आगामी महापौर चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर नियुक्तियों को मंजूरी मिलने के बाद समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर उभरे विवाद ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह जिला इकाई की नाराजगी और चयन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का समाधान किस तरह करता है।