जिला योजना के फंड को भी सूखा 'दिशा'.........! 30 नवंबर तक प्रशासनिक मंजूरी की अवधि बढ़ाई....; जलसंधारण, कृषि, स्वास्थ्य-शिक्षा के कार्यों को प्राथमिकता.....
City News Mumbai••0 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
परंतु बड़े पैमाने पर पानी लेने वाली कंक्रीट सड़कें और गटरों के कार्यों को प्रशासनिक मान्यता न दें.....
मुंबई, दिनांक 5 (अनंत नलावडे) – राज्य में वर्तमान में दुष्काळ जैसी परिस्थितियों के पृष्ठभूमि में जिला वार्षिक योजना (सामान्य) 2026‑27 के निधि उपयोग को राज्य सरकार ने प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। इस कारण से, 30 सितंबर 2026 को समाप्त होने वाले कार्यों को शासन ने नई प्रशासनिक मान्यता देने की अवधि देकर अब 30 नवंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। परंतु, इस बढ़े हुए समय में जलसंरक्षण, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता देते हुए, बड़े पैमाने पर पानी की आवश्यकता वाले कुछ निर्माण कार्यों को प्रशासनिक मान्यता न देने के स्पष्ट निर्देश शासन ने सोमवार को यहाँ एक विशेष सरकारी परिपत्रक जारी करके सभी विभागों को दिए हैं।
आज जारी किए गए योजना विभाग के शासन निर्णय संख्या JIP‑1026/प्र.क्र.196/जिविनस‑1 (ई‑1762412), दिनांक 5 अक्टूबर 2026 के अनुसार यह निर्णय लिया गया है। इसके अनुसार, जिला वार्षिक योजना में लंबित कार्यों को मंजूरी देने के लिए अवधि बढ़ाते हुए सरकार ने केवल समय बढ़ाया नहीं, बल्कि वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार किस प्रकार के कार्यों को प्राथमिकता देनी है, इसके स्पष्ट संकेत भी दिए हैं।
इसके तहत मुख्यतः पानी संचयन कार्यों को प्रथम प्राथमिकता दी गई है, जलसंरक्षण, नाला खोलीकरण, मृदसंधारण, जलयुक्त शिवार अभियान के कार्य, शिवकालीन बांधों की मरम्मत, पानी आपूर्ति योजनाओं के निकट रिचार्ज शाफ्ट व जलस्रोत सुदृढ़ीकरण, कोल्हापूर पद्धति के बांधों पर फलक लगाना और बांधों का सुदृढ़ीकरण आदि कार्यों को प्राथमिकता के साथ प्रशासनिक मान्यता देने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इस प्रकार, दुष्काळ के पृष्ठभूमि में जिला योजना का पैसा पानी उपलब्धता और जलस्रोत सुदृढ़ीकरण की ओर मोड़ने का यह स्पष्ट प्रशासनिक प्राथमिकता माना जा रहा है।
स्वास्थ्य‑शिक्षा सुविधाओं को भी प्राथमिकता... सरकारी, जिला और उपजिला अस्पतालों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं की रखरखाव‑मरम्मत और संबंधित कार्य भी प्राथमिकता में हैं। साथ ही सरकारी निवासी विद्यालय, आश्रम विद्यालय, जिला परिषद विद्यालय, अंगणवाड़ी, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था और सरकारी महाविद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की रखरखाव‑मरम्मत को भी प्राथमिकता दी गई है। इसमें वैरण विकास, कृषि व कृषि संबंधित कार्य, ग्राम विद्युत्, सौर ऊर्जा आधारित विद्युत् और श्मशानभूमि मरम्मत का भी प्राथमिकता क्रम में समावेश है।
‘पानी पर बंदी’ नहीं; निर्माण अनुमोदन पर प्रतिबंध... शासन निर्णय में सबसे प्रमुख निर्देश यह है कि बड़े पैमाने पर पानी का उपयोग होने वाले कार्यों को इस बढ़े हुए समय में प्रशासनिक मान्यता न दी जाए। इस में शासन ने उदाहरण के तौर पर कंक्रीट सड़कें और सीवेज ड्रेनेज के लिए गटरों का उल्लेख किया है। अतः इसका अर्थ सामान्यतः पानी के उपयोग पर बंदी नहीं है, बल्कि दुष्काळ जैसी परिस्थितियों में जिला वार्षिक योजना से नई प्रशासनिक मान्यता देते समय बड़े पैमाने पर पानी लेने वाले कार्यों को प्राथमिकता न देने का निर्णय है। इससे जिला योजना समितियों और संबंधित प्रशासनिक तंत्रों के सामने निधि उपयोग का प्राथमिकता क्रम अधिक स्पष्ट हुआ है।
चार विभागों में आचार संहिता का साया... पुणे, नागपूर, छत्रपति संभाजी नगर और अमरावती विभाग में स्नातक व शिक्षक मतदाता संघ की चुनाव पृष्ठभूमि पर लागू आदर्श आचार संहिता का भी कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अतः इन चार विभागों में विकास कार्यों को प्रशासनिक मान्यता देते समय निधि उपलब्धता और तकनीकी‑आर्थिक नियमों के साथ-साथ आचार संहिता की सीमाओं की भी जाँच करनी होगी। इसमें विभागीय आयुक्त, जिला अधिकारी, सक्षम अधिकारी और कार्यान्वयन तंत्रों को आचार संहिता का उल्लंघन न हो, इसकी सावधानी बरतने के आदेश भी हैं।
जिला योजना की राजनीति को भी नया संदर्भ... जिला वार्षिक योजना स्थानीय विकास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण निधि स्रोत होने के कारण कौन से कार्यों को मंजूरी मिलती है, इसका प्रशासनिक और स्थानीय राजनीतिक महत्व होता है। परंतु, इस वर्ष दुष्काळ जैसी परिस्थितियों और चार विभागों में चुनाव आचार संहिता के दो पहलुओं के पृष्ठभूमि पर “कौन सा कार्य पहले”... ? यह प्रश्न निधि उपलब्धता जितना ही महत्वपूर्ण हो जाएगा। क्योंकि इसी कारण शासन ने जलसंरक्षण, कृषि, वैरण, स्वास्थ्य और शिक्षा की मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए, बड़े पैमाने पर पानी लेने वाले कुछ निर्माण कार्यों को इस अवधि में प्रशासनिक मंजूरी न देने का निर्णय लिया है।
क्या बदला......? अनुमोदन की अवधि: 30 सितंबर के बजाय 30 नवंबर 2026 प्राथमिकता: जलसंरक्षण, कृषि, वैरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, विद्युत् मान्यता से बचना: बड़े पैमाने पर पानी उपयोग करने वाले कार्य...उदा. कंक्रीट सड़कें, सीवेज ड्रेनेज के लिए गटर विशेष शर्त: पुणे, नागपूर, छत्रपति संभाजी नगर और अमरावती विभागों में आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन....
नियम: वित्तीय, तकनीकी मानदंड और उपलब्ध प्रावधानों का पालन अनिवार्य है.... .........................(समाप्त).............