.... यह तो आंदोलन के पीछे राजनीतिक एजेंडा है.....?
City News Mumbai••2 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
दिपक को बावनकुळ का सीधा चुनौती....; "साक्ष्य दें, सरकार कार्रवाई करेगी"......!
विद्यार्थियों के सवालों से संघर्ष को राजनीतिक मोड़; आंदोलन का अधिकार मान्य, पर दिशाभूल के आरोप पर राजस्व मंत्री का कड़ा इशारा....
मुंबई, दिनांक 2 (अनंत नलावडे) – 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा शुक्रवार को मुंबई के शिवाजी पार्क मैदान पर किए गए आंदोलन से राज्य में राजनीतिक संघर्ष को नया मोड़ मिला है। आंदोलन का अधिकार मान्य करते हुए, यदि छात्रों और सामान्य नागरिकों के सवालों का उपयोग राजनीतिक एजेंडा के लिए किया जा रहा है, तो उसे इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, यह बात राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट की। धमकी, गैरकानूनी कार्य या अन्याय के आरोप होने पर ठोस सबूत प्रस्तुत करें; सरकार संबंधित पर कार्रवाई करेगी, यह उन्होंने सीधे चुनौती के रूप में कहा।
बावनकुळे की इस स्थिति से आंदोलन के आरोपों की सत्यता, पुलिस की कार्रवाई और उसके पीछे के राजनीतिक संघर्ष के मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हालांकि, आंदोलन के पीछे राजनीतिक उद्देश्य होने का दावा बावनकुळे ने उठाया है; इसकी पुष्टि के लिए ठोस सबूत सामने आने आवश्यक हैं।
आंदोलन का विरोध नहीं है; परंतु आरोपों की जिम्मेदारी भी लें......!
लोकतंत्र में हर किसी को अपनी भूमिका व्यक्त करने और संविधानिक मार्ग से आंदोलन करने का अधिकार है, यह बावनकुळे ने स्वीकार किया। हालांकि, यदि छात्रों और सामान्य जनता के सवालों के आधार पर भ्रम पैदा किया जा रहा है, तो इस दृष्टिकोण पर आपत्ति भी उन्होंने स्पष्ट की। उनके बयान का फोकस केवल आंदोलन के अधिकार पर नहीं, बल्कि आंदोलन से किए गए आरोपों और उनके पीछे के दावों की विश्वसनीयता पर है। इसलिए अब दिपके के आंदोलन की सटीक मांगें कौन सी हैं, इसके साक्ष्य क्या हैं और सरकार का क्या उत्तर है, इस पर महत्व दिया गया है।
"अगर धमकी दी गई हो, तो नाम बताएं".....!
दिपके के आरोपों का जवाब देते हुए बावनकुळे ने सबूतों के मुद्दे को भी आगे बढ़ाया। यदि किसी को धमकी दी गई हो या कोई गैरकानूनी कार्य हुआ हो, तो संबंधितों के नाम और ठोस सबूत प्रस्तुत करें। सरकार इसे स्वीकार कर कार्रवाई करेगी, यह उन्होंने जोर देकर कहा। इस प्रकार, इस स्थिति से विवाद को आरोप-प्रत्यारोप से परे तथ्यात्मक आधार पर जवाब देने की चुनौती उत्पन्न हुई है। हालांकि, भले ही आरोप सिद्ध हो गए हों या झूठे, इसका निष्कर्ष सबूतों की पुष्टि होने से पहले नहीं निकाला जा सकता। संबंधित शिकायतों की जांच और उससे निकलने वाले निष्कर्ष निर्णायक होंगे।
पुलिस की भूमिका चर्चा में; कानून की परीक्षा महत्वपूर्ण......
आंदोलन के दौरान कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस की है, यह कहते हुए बावनकुळे ने प्रशासन के प्रतिबंधात्मक उपायों का भी समर्थन किया। आंदोलन से नागरिकों को असुविधा न हो और कानून व व्यवस्था का प्रश्न न उठे, इसके लिए पुलिस को सावधानी बरतनी चाहिए, यह उनका दृष्टिकोण है। हालांकि, कानून व व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता और शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। अतः आंदोलन पर लगाए गए प्रतिबंध, पुलिस के आदेश और वास्तविक कार्रवाई का मूल्यांकन संबंधित कानूनी प्रावधानों और उपलब्ध विवरणों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
राजनीतिक संघर्ष की अगली परीक्षा.....
बावनकुळे के बयान से दिपके के आंदोलन को सत्तारूढ़ भाजपा से सीधा जवाब मिला है। इसलिए अब इस संघर्ष में केवल राजनीतिक आरोपों का आदान-प्रदान हो रहा है या आंदोलन के मुद्दों पर ठोस चर्चा हो रही है, यह मुख्य प्रश्न है। अतः दिपके द्वारा आरोपों के समर्थन में कौन से सबूत सामने आते हैं, सरकार उस पर जांच या कार्रवाई करती है या नहीं, और पुलिस की भूमिका पर कानूनी आपत्ति उठती है या नहीं, इस पर आगे की घटनाओं का दिशा तय होगी। इसीलिए आंदोलन का अधिकार और सरकार से जवाब मांगने की मुभा बनाए रखते हुए, आरोपों की सत्यता को सबूतों पर जांचना ही इस संघर्ष की वास्तविक परीक्षा होगी।