डीजे की दहकाहट को आखिरकार मुंबई उच्च न्यायालय से ब्रेक मिला.
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सण-उत्सवों के नाम पर ध्वनि प्रदूषण पर उच्च न्यायालय की निगरानी; सामान्य नागरिक के संघर्ष को न्यायालयीन मान्यता
मुंबई, दिनांक 22 (अनंत नलावडे) – राज्य में गणेशोत्सव सहित विभिन्न सार्वजनिक सण-उत्सवों के दौरान तेज़ “डीजे”, विशाल क्षमता वाली साउंड सिस्टम और रात देर तक चलने वाली मिरवणुकों के कारण सामान्य नागरिक, बुजुर्ग, रोगी और छोटे बच्चों को होने वाली परेशानी का मुद्दा फिर से अदालत के समक्ष आया है। पुणे के सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट ने ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ लगातार आवाज उठाई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजे संस्कृति और लेज़र शो पर विरोध जताने के कारण उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। एक समाचार चैनल के साथ संवाद करते समय उन पर सड़क पर हमला होने का आरोप भी लगाया गया है।
इस पृष्ठभूमि में सण-उत्सवों में ध्वनि प्रदूषण, नियम उल्लंघन और संबंधित घटनाओं को मंगलवार को मुंबई उच्च न्यायालय ने स्वयं ही स्वीकार किया है, और यह स्पष्ट किया है कि उत्सव मनाने के विरुद्ध न्यायालय का कोई विरोध नहीं है, बल्कि उत्सव के नाम पर नागरिकों की शांति और स्वास्थ्य के अधिकारों पर असर न पड़े, ऐसी भूमिका सुनवाई में रखी गई है।
डीजे और नियमबाह्य साउंड....
अब न्यायालय के इस आक्रामक कदम के कारण सर्वपक्षीय राजनीतिक आशीर्वाद प्राप्त ऐसी प्रणालियों के खिलाफ अब तक कौन-सी कार्रवाई की गई है, इस पर राज्य सरकार से भी विस्तृत जानकारी मांगी गई है। इसलिए उत्सव के जल्लोष के पीछे नियमों को लागू करने वालों पर प्रशासन और राजनीतिक नेता तथा सत्ता में रहने वाले कितनी और किस प्रकार की कार्रवाई करते हैं, इस पर अब सभी का ध्यान केंद्रित हो गया है।
“उत्सव हवा में है; पर नागरिकों की शांति भी उतनी ही चाही जाती है”........!
सण-उत्सव मनाने का नागरिकों का अधिकार और साथ ही अन्य नागरिकों को शांति से रहने का अधिकार, इन दोनों का संतुलन बनाए रखने का मुद्दा इस मामले के कारण केंद्र में आ गया है। इसलिए न्यायालय की मान्यता के बाद ध्वनि प्रदूषण के नियम केवल कागज पर रहेंगे या वास्तविक कार्यान्वयन को गति मिलेगी, यह अब महत्वपूर्ण प्रश्न है। साथ ही बापट की लंबे समय से चल रही ध्वनि प्रदूषण विरोधी अभियान को इस न्यायालय की मान्यता से महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिला है, ऐसा कहा जा सकता है; परंतु आगामी सुनवाई में न्यायालय और राज्य सरकार से कौन-से सटीक निर्देश या उपाय सामने आते हैं, इस पर इस मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।