भारत में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली: चुनौतियाँ और सुधार के कदम
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में हालिया नीतियों, बजट वृद्धि और निजी‑सार्वजनिक सहयोग को देखते हुए, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुधार की दिशा स्पष्ट है। इस लेख में प्रमुख आंकड़े और भविष्य के कदमों का विश्लेषण किया गया है।
स्वास्थ्य सेवा देश की सामाजिक‑आर्थिक प्रगति का प्रमुख स्तम्भ माना जाता है, और 2023 में भारत का स्वास्थ्य खर्च कुल जीडीपी का 7.5 % रहा, जो वैश्विक औसत से थोड़ा अधिक है। इस संदर्भ में, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2023 ने रोग रोकथाम, प्राथमिक देखभाल और डिजिटल स्वास्थ्य को प्रमुख स्तम्भों के रूप में स्थापित किया, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को व्यापक रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में कदम बढ़े। सरकार ने 2024 के वित्तीय वर्ष में सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट में 2,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की, जिससे मौजूदा अस्पतालों के आधुनिकीकरण और नई स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना में तेजी आएगी।
केन्द्र सरकार द्वारा 2024 में लागू किए गए प्रमुख उपायों में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान योजना (NAHP) का विस्तार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में 150 नई टेलीमेडिसिन इकाइयों की स्थापना, और 5,000 करोड़ रुपये की आयुर्वेदिक और पारम्परिक चिकित्सा कोष की स्थापना शामिल है। इन पहलों का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करना और रोगी को शुरुआती चरण में ही उचित उपचार प्रदान करना है। साथ ही, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (AB-PMJAY) ने 2024 में 12 करोड़ परिवारों को कवर किया, जिससे अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की आर्थिक बोझ में उल्लेखनीय कमी आई।
निजी स्वास्थ्य क्षेत्र ने भी 2024 में 8 % वार्षिक वृद्धि दर्ज की, जिसमें बहु‑राष्ट्रीय अस्पताल समूहों ने 1,200 नई सुविधाएँ खोलीं और 3,500 अस्पताल बिस्तरों का विस्तार किया। निजी बीमा कंपनियों ने 2024 में 4,200 करोड़ रुपये का प्रीमियम संग्रह किया, जिससे मध्यम वर्ग के लिए स्वास्थ्य कवरेज में सुधार हुआ। हालांकि, निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के बीच सेवा लागत में अंतर अभी भी बना हुआ है, और नियामक निकायों ने मूल्य नियंत्रण के लिए नई दिशाएँ जारी की हैं।
ग्रामीण स्वास्थ्य ढाँचा को सुदृढ़ करने के लिए 2024 में 1,200 नई स्वास्थ्य एवं पोषण केंद्र (HPC) स्थापित किए गए, जिनमें प्रत्येक में एक डॉक्टर, दो नर्स और एक फार्मासिस्ट की नियुक्ति की गई। साथ ही, डिजिटल स्वास्थ्य पहल के तहत 3,500 ग्रामीण क्लीनिकों को इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (EMR) प्रणाली से जोड़ा गया, जिससे रोगी डेटा की सटीकता और उपचार की निरंतरता में सुधार हुआ। इन केंद्रों ने मौसमी रोगों जैसे डेंगी और मलेरिया की रोकथाम में 15 % तक की सफलता दर हासिल की।
भविष्य की दृष्टि में, विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 तक भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को 9 % जीडीपी तक पहुंचाने की योजना है, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों की प्रशिक्षण में 25 % वृद्धि, अनुसंधान एवं विकास में 1,200 करोड़ रुपये का निवेश, और ग्रामीण क्षेत्रों में 10 % अधिक टेलीहेल्थ सेवाओं का विस्तार आवश्यक माना गया है। इन सभी उपायों के समन्वित कार्यान्वयन से भारत की स्वास्थ्य प्रणाली अधिक सुलभ, किफायती और रोग‑रोकथाम‑केन्द्रित बन सकती है।