टैंकर माफिया पर लगाम! पहले नल से पानी, फिर टैंकर; चारे के लिए भी सरकार की नई नीति
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
महाराष्ट्र में भीषण सूखे के बीच राज्य सरकार ने टैंकरों पर निर्भरता कम करने और बंद नल जलापूर्ति योजनाओं को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बंद जलापूर्ति योजनाओं को अगले 15 दिनों में शुरू करने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए हैं। साथ ही चारा प्रबंधन के लिए अलग मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और चारा बैंक बनाने की योजना पर भी जोर दिया गया है।
मुंबई के सह्याद्री अतिथिगृह में हुई सूखा निवारण मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक में पानी की उपलब्धता, लंबित योजनाओं, पशुओं के चारे और खेती के नुकसान की समीक्षा की गई।
### ₹3,000 करोड़ की बकाया राशि पर राहत का प्रस्ताव
राज्य की जलापूर्ति योजनाओं पर करीब ₹3,000 करोड़ की बकाया राशि सामने आई है। इस पर लगने वाले जुर्माने और ब्याज को माफ कर मूल राशि किस्तों में चुकाने के लिए एकमुश्त निपटान (वन टाइम सेटलमेंट) योजना लाने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, इस योजना का अंतिम स्वरूप अभी तय होना बाकी है।
वित्तीय कमी के कारण अधूरी पड़ी योजनाओं और पूरी हो चुकी 75 योजनाओं की समीक्षा कर उन्हें जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। जल जीवन मिशन के तहत लंबित योजनाओं को गति देने के लिए नए सरकारी आदेश की तैयारी भी की जा रही है।
### चारे के लिए ₹62 करोड़ का प्रावधान
पशुओं के लिए चारे की कमी रोकने के उद्देश्य से जिलाधिकारियों को कृषि और पशुपालन विभाग के सहयोग से चारा बैंक बनाने तथा चारा प्रबंधन की SOP तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिन जिलों में चारा अधिक उपलब्ध है, वहां से कमी वाले जिलों तक आपूर्ति की जाएगी। चारा बीज के लिए ₹62 करोड़ की राशि इस्तेमाल करने की योजना है। सरकारी संस्थाओं के माध्यम से चारे की गारंटी भाव पर खरीद करने और बांधों की गाद से प्रभावित जमीन पर चारा उगाने को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। राजस्व विभाग की खाली जमीन महिला स्वयं सहायता समूहों को चारा उत्पादन के लिए उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई गई है।
### 305 तालुकों में सूखा राहत का तीसरा चरण
राज्य के 305 तालुकों में सूखा राहत का तीसरा चरण लागू है। खेती के नुकसान का अब तक 70 प्रतिशत पंचनामा पूरा हो चुका है। शेष पंचनामा और आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
### CSR और जिला नियोजन निधि से भी राहत
सूखा निवारण के लिए कंपनियों के कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) और जिला नियोजन एवं विकास समिति (DPDC) के फंड का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है। पानी के स्रोतों की पहचान, जलसंचय और सूखाग्रस्त इलाकों में जलस्तर की समीक्षा के निर्देश भी दिए गए हैं। जिन स्थानों पर बिजली बिल का भुगतान हो चुका है, वहां करीब 450 बिजली ट्रांसफॉर्मर तत्काल चालू करने को कहा गया है।
बैठक में जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन, पानी आपूर्ति मंत्री गुलाबराव पाटील, ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे, मंत्री संजय राठोड, नितेश राणे, मकरंद पाटील, पंकजा मुंडे और कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे सहित अन्य मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सरकार का लक्ष्य टैंकरों पर निर्भरता घटाना, बंद जलापूर्ति योजनाओं को चालू करना और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ाना है। अब इन उपायों की वास्तविक सफलता अगले 15 दिनों में योजनाओं के क्रियान्वयन और 31 अक्टूबर तक नुकसान के पंचनामे पूरे होने पर निर्भर करेगी।