भारत सरकार ने 2025 में एकीकृत व्यावसायिक कोड (UCC) लागू करने का निर्णय लिया
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
भारत सरकार ने 2025 में एक नया एकीकृत व्यावसायिक कोड (UCC) लागू करने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य देश के विखंडित वाणिज्यिक कानूनों को एकसमान ढांचे में समेकित करना है। इस पहल से कानूनी प्रक्रियाएँ तेज़ और पारदर्शी होंगी, और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनुबंध प्रबंधन में सुधार होगा।
भारत सरकार ने 2025 में एक नया एकीकृत व्यावसायिक कोड (UCC) लागू करने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य देश के विखंडित वाणिज्यिक कानूनों को एकसमान ढांचे में समेकित करना है। यह कोड 17 मौजूदा कानूनों को प्रतिस्थापित करेगा, जिससे व्यापारियों के लिए कानूनी प्रक्रियाएँ सरल और पारदर्शी होंगी। सरकार के अनुसार, UCC से व्यापारिक विवादों का निवारण तेज़ी से होगा और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनुबंधों का प्रबंधन अधिक कुशल बन जाएगा। इस पहल के पीछे आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और विदेशी निवेश आकर्षित करने की रणनीति भी है।
वर्तमान में भारत में वाणिज्यिक लेनदेन पर 17 अलग-अलग कानून लागू हैं, जिनमें से प्रत्येक की व्याख्या और अनुपालन में अंतराल मौजूद है। इस जटिलता से छोटे और मध्यम उद्यमों को कानूनी जोखिमों का सामना करना पड़ता है, जबकि बड़े कॉरपोरेट्स को भी उच्च अनुपालन लागत का सामना करना पड़ता है। UCC का उद्देश्य इन कानूनों को एकीकृत कर एक स्पष्ट, एकसमान ढांचा तैयार करना है, ताकि व्यवसायों को एक ही कानूनी मानदंड के तहत संचालित करने का अवसर मिले।
इस प्रस्ताव को 12 अगस्त 2024 को संसद में प्रस्तुत किया गया और तत्कालीन विधि एवं न्याय मंत्री ने इसे प्राथमिकता के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद एक विशेष समिति गठित की गई, जिसमें 10 मंत्रालयों के प्रतिनिधि और 15 कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति ने 90 दिनों के भीतर एक विस्तृत मसौदा तैयार करने का निर्णय लिया, जिसे अगले वर्ष के मध्य में संसद में पंजीकृत किया जाएगा।
UCC में डिजिटल अनुबंधों के लिए एक मानक प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर की वैधता, और ऑनलाइन विवाद समाधान के तंत्र शामिल हैं। इसके अलावा, यह कोड व्यापारिक लेनदेन के लिए एक राष्ट्रीय पंजीकरण प्रणाली की स्थापना करेगा, जिससे कंपनियों को अपनी पंजीकृत दस्तावेजों को एक ही पोर्टल पर प्रबंधित करने की सुविधा मिलेगी।
उद्योग संघों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि UCC से उनके कानूनी बोझ में कमी आएगी। दूसरी ओर, कुछ वकील समाज ने चेतावनी दी है कि नई नियमावली में अस्पष्ट प्रावधानों के कारण अनिश्चितता बढ़ सकती है। सरकार ने इन चिंताओं को दूर करने के लिए सार्वजनिक परामर्श सत्रों का आयोजन किया है।
UCC के कार्यान्वयन का चरणबद्ध कार्यक्रम 2026 से शुरू होकर 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है। प्रारंभिक चरण में पायलट राज्यों में परीक्षण किया जाएगा, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर पूर्ण रोलआउट होगा। सरकार ने 5 करोड़ रुपये की निधि आवंटित की है, जिसे प्रशिक्षण, सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए उपयोग किया जाएगा।
आलोचकों का तर्क है कि UCC के तहत संक्रमणकालीन अवधि में व्यवसायों को दोहरी अनुपालन करनी पड़ेगी, जिससे लागत बढ़ेगी। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के मुद्दे भी एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं। सरकार ने इन जोखिमों को कम करने के लिए एक स्वतंत्र निरीक्षण बोर्ड की स्थापना का प्रस्ताव रखा है।
इस प्रकार, UCC की शुरुआत भारत के व्यावसायिक परिदृश्य को सुव्यवस्थित करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।