केन्द्रीय सरकार की नई आर्थिक पहल: 2024 बजट में प्रमुख बदलाव
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
केन्द्रीय सरकार ने 2024 बजट में विकासात्मक खर्च को बढ़ाते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल और सामाजिक कल्याण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी। इस बजट में 32 लाख करोड़ रुपये का कुल अनुमानित खर्च और 1.3% के कम वित्तीय घाटे का लक्ष्य रखा गया है।
नई आर्थिक नीति की घोषणा के साथ, केन्द्रीय सरकार ने 2024 वित्तीय वर्ष के बजट में कई प्रमुख बदलाव प्रस्तुत किए हैं। इस बजट का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास को तेज करना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और सामाजिक सुरक्षा जाल को सुदृढ़ करना बताया गया है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि कुल अनुमानित खर्च 32 लाख करोड़ रुपये होगा, जिसमें विकासात्मक खर्च को 18 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है। इस योजना में ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा, आयकर स्लैब में सुधार और छोटे व्यवसायों के लिए कर राहत की भी घोषणा की गई है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ाने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, इस बजट को आर्थिक स्थिरता और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष के बजट में पूँजी खर्च को 12 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। प्रमुख क्षेत्रों में सड़क निर्माण, रेलवे विस्तार और पोर्ट विकास को प्राथमिकता दी गई है। विशेष रूप से, राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को 1.5 लाख किलोमीटर तक विस्तारित करने के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये की निधि आवंटित की गई है। इसी तरह, रेलवे के लिए 1.2 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है, जिससे नई हाईस्पीड कनेक्शन की योजना तेज होगी।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सरकार ने 80 हजार करोड़ रुपये का निवेश करने का लक्ष्य रखा है। इस राशि का उपयोग 5G नेटवर्क के व्यापक कवरेज, ग्रामीण broadband विस्तार और सरकारी सेवाओं के ई-गवर्नेंस प्लेटफ़ॉर्म को सुदृढ़ करने में किया जाएगा। इसके साथ ही, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के लिए 25 हजार करोड़ रुपये अलग से निर्धारित किए गए हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों में तकनीकी समाधान को बढ़ावा मिलेगा। इस पहल से रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना भी उजागर की गई है।
समाज कल्याण योजनाओं में इस बजट ने स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 1.5 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसका उपयोग ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की सुधार और नई अस्पताल सुविधाओं के निर्माण में होगा। शिक्षा के क्षेत्र में, सभी स्तरों के स्कूलों में डिजिटल कक्षाओं को लागू करने के लिए 60 हजार करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, वृद्धावस्था पेंशन और बंधु सहायता योजनाओं को 20 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त निधि प्रदान की गई है।
कुल राजस्व अनुमान 28 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जिससे वित्तीय घाटा 4 लाख करोड़ रुपये, यानी GDP का 1.3 प्रतिशत, रहने की संभावना है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 2.5 प्रतिशत से कम है, जो राजकोषीय अनुशासन का संकेत माना जाता है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस बजट को देखते हुए मौद्रिक नीति में स्थिरता बनाए रखने की घोषणा की है, जिससे ब्याज दरों में कोई तत्काल परिवर्तन नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संतुलित दृष्टिकोण से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और आर्थिक पुनरुत्थान तेज होगा।
आर्थिक विशेषज्ञों ने कहा कि यदि सरकार इन योजनाओं को समय पर लागू करती है, तो अगले तीन वर्षों में GDP वृद्धि दर 7 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने अधोसंरचना परियोजनाओं की जमीन अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी में संभावित देरी को जोखिम के रूप में उजागर किया है। कुल मिलाकर, यह बजट विकास को गति देने, सामाजिक असमानताओं को कम करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में एक संतुलित प्रयास प्रतीत होता है। सरकार का यह कदम राष्ट्रीय आर्थिक लक्ष्यों के साथ तालमेल बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।