केन्द्रीय सरकार की नई आर्थिक नीति: प्रमुख पहल और संभावित प्रभाव
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
केन्द्रीय सरकार ने 12.5 लाख करोड़ रुपये के बजट से नई आर्थिक नीति पेश की, जिसमें बुनियादी ढाँचा, ग्रामीण विकास और नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस नीति का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में जीडीपी वृद्धि को 7.5% तक ले जाना और निवेश आकर्षण को बढ़ाना है।
नई आर्थिक नीति के तहत केन्द्रीय सरकार ने इस वर्ष के बजट में 12.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करना है। इस योजना में 3 प्रमुख स्तंभ शामिल हैं: इंडिया विस्तार, ग्रामीण विकास कार्यक्रम, और ऊर्जा परियोजनाएँ। सरकार ने 15 मार्च 2026 को इस नीति की घोषणा की, जिसमें छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए कर राहत, साथ ही इकोसिस्टम को सशक्त बनाने के लिए फंड का प्रावधान किया गया है। नीति का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में जीडीपी वृद्धि को 7.5% तक ले जाना है।
पिछले दो वर्षों में, केन्द्रीय बजट ने 10.8 लाख करोड़ रुपये का व्यय किया, जिसमें मुख्यतः स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च किया गया था। हालांकि, उद्योग क्षेत्र में निवेश की कमी और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं की असमानता ने आर्थिक गति को धीमा कर दिया था। इस संदर्भ में, नई नीति ने इन अंतरालों को पाटने के लिए विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए, जिससे आर्थिक पुनरुत्थान को तेज़ किया जा सके।
नई नीति के तहत बुनियादी ढाँचा विकास के लिए 3.2 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इन निधियों का 40% सड़क एवं राजमार्ग नेटवर्क के विस्तार, 35% रेलवे आधुनिकीकरण, और शेष 25% पोर्ट, हवाई अड्डे और डिजिटल कनेक्टिविटी परियोजनाओं में निवेशित होगा। सरकार ने कहा है कि इन कार्यों से परिवहन लागत में 15% तक कमी आएगी और व्यापारिक माहौल में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
ग्रामीण विकास कार्यक्रम के लिए 2.1 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनमें 1.4 लाख करोड़ रुपये सींचाई, सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हेतु earmarked हैं। इस पहल में 12.5 करोड़ ग्रामीण घरों को स्वच्छ जल और बिजली से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए 0.6 लाख करोड़ रुपये का समर्थन किया जाएगा, जिससे किसानों की आय में 20% की संभावित वृद्धि हो सकती है।
ऊर्जा क्षेत्र में 1.2 लाख करोड़ रुपये की पूंजी निवेश का प्रावधान किया गया है, जिसमें सौर, पवन और हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार ने 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को कुल बिजली उत्पादन के 45% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 5.5 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की योजना भी तैयार की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों के अनुरूप है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि योजना के अनुसार फंड का प्रभावी वितरण हो, तो अगले दो वित्तीय वर्षों में निवेश आकर्षण में 30% की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। हालांकि, परियोजना अनुमोदन में देरी, भूमि अधिग्रहण की जटिलताएँ और स्थानीय प्रशासन की क्षमता सीमित होना संभावित बाधाएँ बन सकते हैं। सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए एकीकृत निगरानी मंच स्थापित करने की घोषणा की है, जिससे पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होगी।
समग्र रूप से, केन्द्रीय सरकार की नई आर्थिक नीति बुनियादी ढाँचा, ग्रामीण विकास और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को सुदृढ़ कर आर्थिक स्थिरता और सतत विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी कदम है। नीति के सफल कार्यान्वयन से न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, बल्कि सामाजिक समावेशिता भी सुदृढ़ होगी। यह देखना बाकी है कि निर्धारित समयसीमा में सभी लक्ष्य कितनी हद तक प्राप्त होते हैं।